Saturday, December 21, 2019

Kolhapur Shri Mahalakshami Temple Travel Guide In Hindi

किरणोत्सव
श्री महालक्ष्मी मंदिर के पश्चिमी दीवार पर एक छोटी सी खुली खिड़की मिलती है, जिसके माध्यम से सूरज की किरणें हर साल फरवरी और नवंबर के महीनों में तीन दिनों के लिए श्री महालक्ष्मी जी की पैरो को पर्श करते हुए उनके मुख मंडल पर पड़ते है।गर्भगृह में स्थित प्रतिमा और मंदिर परिसर के पश्चिमी दरवाजे की दूरी 250 फीट से ज्यादा है। किरणोत्सव के दोनों अवसरों पर परिसर की बत्तियां बुझा दी जाती हैं।किरणोत्सव तब मनाया जाता है जब सूर्य की किरणें सीधे श्री महालक्ष्मी देवी की मूर्ति पर सीधे सूर्यास्त के समय पड़ती हैं। 
किरणोत्सव की तारीख
31 जनवरी ,1 फरवरी, 2 फरवरी, 3 फरवरी
9 नवंबर, 10 नवंबर, 11 नवंबर
31 जनवरी और 9 नवंबर -  सूर्य की किरणें सीधे श्री महालक्ष्मी देवी के पैरों पर पड़ती हैं।
1 फरवरी और 10 नवंबर - सूर्य की किरणें सीधे श्री महालक्ष्मी देवी की छाती पर पड़ती हैं।

2 फरवरी और 11 नवंबर - सूर्य की किरणें सीधे श्री महालक्ष्मी देवी के पूरे शरीर पर पड़ती हैं।

कोल्हापुर की प्रसिद्ध चीजें
कोल्हापुर शहर कोल्हापुरी छप्पल, कोल्हापुरी लवांगी मिर्ची, कोल्हापुरी गुर (गुल), कोल्हापुरी तांबड़ा और पांढरा रस्सा (लाल और सफेद करी), कोल्हापुरी मिसल, कोल्हापुरी साज़, कोल्हापुरी फेटा के लिए प्रसिद्ध है।

कोल्हापुर शहर
कोल्हापुर शहर महाराष्ट्र के दक्षिण-पश्चिम कोने में स्थित है। पहले कोल्हापुर को करवीर भी कहा जाता था, कोल्हापुर पश्चिमी भारत के सबसे पुराने धार्मिक और व्यापारिक केंद्रों में से एक है।यह शहर ऐतिहासिक तथा धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्‍वपूर्ण है।कोल्हापुर को दक्षिण की काशी कहा जाता है।कोल्हापुर देश की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। कोल्हापुर का सांस्कृतिक इतिहास 17 वीं शताब्दी का है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषा मराठी है, इसके अलावा हिंदी, उर्दू, गुजराती, का उपयोग किया जाता है। पंचगंगा नदी के किनारे स्थित यह शहर प्राचीन परंपरा और आधुनिक प्रभावों का मिश्रण है।कोल्हापुर का मराठी कला के क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कोल्हापुर अतीत में शासन करने वाले अलग-अलग राजवंश थे, लेकिन यह ज्यादातर मराठों के शासन में था। राजर्षि छत्रपति शाहू महाराजा एक वास्तुकार और आधुनिक कोल्हापुर के संस्थापक हैं। छत्रपति शाहू महाराजा के शासनकाल ने शहर को एक प्रगतिशील भावना प्रदान की और शाहू महाराज ने अपने शासन काल में रंगमंच, फिल्म निर्माण, संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, कुश्ती को बढ़ावा दिया। अभी कोल्हापुर मराठी फिल्म उद्योग का एक प्रमुख केंद्र बन गया है।कोल्हापुर गुड़ (गुल) का एक बड़ा बाजार है, कोल्हापुर जिले में गुड़ का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह गुड़ भारत के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई किया जाता है और विभिन्न देशों में निर्यात किया जाता है। कोल्हापुर भारत के सहकारी आंदोलन का एक उत्तम उदाहरण है।

कोल्हापुर कैसे पहुंचे ?
रेल मार्ग द्वारा
कोल्हापुर रेलवे स्टेशन का नाम छत्रपति शाहू महाराज के नाम पर रखा गया है। यह मध्य रेलवे के पुणे - मिराज - कोल्हापुर खंड पर स्थित है। मुंबई, नागपुर, पुणे, तिरुपति आदि के लिए दैनिक ट्रेनें चलती हैं और दिल्ली, अहमदाबाद के लिए साप्ताहिक ट्रेनें चलती हैं।

सड़क मार्ग द्वारा
कोल्हापुर राष्ट्रीय राजमार्ग 4 पर स्थित है जो कोल्हापुर को मुंबई और बैंगलोर से जोड़ता है। मुंबई, पुणे,औरंगाबाद ,नासिक ,शिरडी और बैंगलोर जैसे विभिन्न नजदीकी शहरों से निजी और महाराष्ट्र की सरकारी बस सेवा उपलब्ध है। कोल्हापुर में सेंट्रल बस स्टैंड (CBS) है जहां राज्य परिवहन (ST) बसें मुंबई, पुणे और बेंगलुरु सहित महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों के लिए बस सेवा उपलब्ध हैं।बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन कोल्हापुर शहर के मध्य में स्थित हैं और एक दूसरे से 10-15 मिनट की दूरी पर हैं।

हवाई मार्ग द्वारा

निकटतम हवाई अड्डा कोल्हापुर शहर से 9 किमी दक्षिण-पूर्व में उजलवाईवाड़ी में स्थित है।कोल्हापुर हवाई अड्डे का नाम "छत्रपति राजाराम महाराज हवाई अड्डा" है। हैदराबाद, बेंगलुरु ,तिरुपति ,मुंबई से कोल्हापुर के लिए हाल ही में हवाई सेवा शरू हुई है। दूसरे नजदीकी हवाई अड्डे पुणे,बेलगाम ,गोवा है।

मुंबई से कोल्हापुर कैसे पहुँचे?
कोल्हापुर मुंबई से 400 किमी की दुरी पर स्थित  है।मुंबई से कोल्हापुर पहुंचने के लिए महालक्ष्मी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 17411) एक अच्छा विकल्प है। मुंबई छत्रपति शिवजी महाराज टर्मिनल से रात 8.20 बजे निकलकर सुबह 7.25 बजे कोल्हापुर स्टेशन पर पहुंचती है। यह एक स्लीपर कोच ट्रेन है जिससे आपकी यात्रा बहुत सुविधाजनक हो जाती है। अगर आपको बस से कोल्हापुर पहुंचना है तो रात में दादर, वाशी मुंबई के विभिन्न स्थानों से स्लीपर बस रात में निकलती है और सुबह जल्दी 5-6 बजे कोल्हापुर पहुंचती है।


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