Monday, October 28, 2019

Khatu Shyam Rajasthan Complete Travel Guide In Hindi

खाटू श्याम कैसे पहुंचे ?
रेल मार्ग द्वारा

खाटू श्याम के निकटतम रेलवे स्टेशन रिंगस जंक्शन है। मुंबई ,इंदौर और दिल्ली से रिंगास के लिए ट्रैन सेवा उपलब्ध है। रींगस से खाटू श्याम की दुरी 18 किमी है। रींगस रेलवे स्टेशन से खाटू जाने के लिए टैक्सी और जीप मिल जाती है।

दिल्ली से रींगस ट्रैन
Daily Train-
Train No.12981 Chetak Express
Sarai Rohilla Departs - 19:52 Arrives - 23:17 Daily
Weekly Train

1) Train No.22452 Chandigarh - Mumbai Bandra (T)  SF Express Delhi Cantt - Departs 10:07 Arrives - 13:33 ( Sun ,Wed.)

2) Train No.22950 Delhi Sarai Rohilla - Bandra Terminus SF Express  -  Sarai Rohilla - Departs -16:32 Arrives - 19:49 (only Thurs.) 

3) Train No.12066 Delhi Sarai Rohilla - Ajmer Jan Shatabdi Express  

Sarai Rohilla Departs - 16:32 Arrives - 19:44 (Mon Tue Wed Fri Sat)

4)Train No. 14021 Sainik Express
Sarai Rohilla Departs - 22:42 Arrives - 06:40 (Tue Thu Sat)

5) Train No.12981 Chetak Express
Sarai Rohilla Departs - 19:52 Arrives - 23:17 Daily

सड़क मार्ग द्वारा

जयपुर से खाटू जाने के लिए जयपुर सिंधी कैंप बस स्टैंड से सरकारी और निजी बसे उपलब्ध है।दिल्ली से सड़क मार्ग से गुडग़ाव, कोटपूतली, नीमकाथाना, श्रीमाधोपुर से रींगस होते हुए बस व कार से खाटू आया जा सकता है।दिल्ली से भी राजस्थान सरकार की बसे खाटू के लिए उपलब्ध है।

हवाई मार्ग द्वारा
खाटू श्याम मंदिर से निकटतम हवाई अड्डा जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जिसे सांगानेर हवाई अड्डे के रूप में भी जाना जाता है। खाटू जी का मंदिर सांगानेर हवाई अड्डे से लगभग 95 KM दूर है।जयपुर हवाई अड्डे से खाटू जाने के लिए टैक्सी या कार किराये पर मिल जाती है। 


खाटू श्याम कितने दिन निवास करे - एक दिन

खाटू श्याम में कहाँ रुके -
खाटू ख्याम धर्मशाला के नाम और पते

खाटू श्याम फाल्गुन मेला
खाटू श्याम जी में फाल्गुन मेला बड़ी धूम धाम से भरता है। खाटू श्याम का मेला राजस्थान में भरने वाले बड़े मेलों में से एक है। जिसमे लाखो भक्त श्यामजी बाबा के मंदिर में शीश झुकाने दूर दूर से अपने परिवार और मित्रो के साथ आते है। होली के पांच दिन पहले (फरवारी /मार्च) फाल्गुन मेला अष्टमी से बारस तक ५ दिन के लिए भरता है।मुख्य मेला ५ दिन का होता है प्रत्येक वर्ष भक्तो की भीड़ बढ़ती ही जा रही है इस लिए अभी मेला १० दिनों का कर दिया गया है। मेले का मुख्य दिन फाल्गुन महीने का फाल्गुन शुक्ला एकादशी का होता है। माना जाता है इस दिन श्याम कुंड से बाबा का शीश निकला था। फाल्गुनी मेले के दौरान भक्त रींगस से खाटू तक 18 किमी की पद यात्रा करते हुए हाथो में निशान लेकर बाबा के जयकारो लगाते हुए बाबा के दरबार खाटू में पहुंचते है। खाटू श्यामजी में इसके अलावा कृष्ण जन्माष्टमी, झूल-झुलैया एकादशी, होली एवं बसंत पंचमी आदि त्यौहार पूरे हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया जाता है।
फाल्गुन मेला 2020
खाटू श्यामजी में वर्ष 2020 में फाल्गुन मेला 27 फरवरी से शुरू होगा और 7 मार्च तक चलेगा। मुख्य मेला 6 मार्च को फाल्गुन शुक्ल एकादशी पर है।


खाटू श्यामजी मंदिर दर्शन समय तालिका
गर्मी के दिन
मंदिर खुलने का समय - सुबह 4:30
मंदिर बंद - दोपहर 12 :30
मंदिर खुलना - शाम 4:00
मंदिर बंद - रात्रि 10:00
सर्दी के दिन
मंदिर खुलने का समय - सुबह 5:30
मंदिर बंद - दोपहर 01:00
मंदिर खुलना - शाम 5:00
मंदिर बंद - रात्रि 9:00

खाटू श्यामजी पौराणिक कथा
पांडवो के वनवास काल में भीम का विवाह हिडिम्बा के साथ हुआ । हिडिम्बा ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम घटोत्कच रखा गया। घटोत्कच का विवाह कामकंटकटा(अहिलावती) के साथ हुआ। कामकंटकटा ने बर्बरीक नामक पुत्र को जन्म दिया। बर्बरीक को भगवती जगदम्बा से अजेय होने का वरदान मिला था और भगवान् शिवजी से तीन दिव्य बाण प्राप्त हुए थे। दिव्य बाण की विशेषता यह थी की ये बाण लक्ष्य को भेदकर वापस लौट आते थे। 



बर्बरीक ने महाभारत के युद्ध के बारे में सुना तो युद्ध में भाग लेने के लिए आतुर हो गया। बर्बरीक ने अपनी मां से इस युद्ध में भाग लेने की अनुमति मांगी। बर्बरीक की मां ने उसे युद्ध में भाग लेने की अनुमति देते हुए कहा कि वह युद्ध में उस पक्ष का साथ देगा जो कमजोर नजर आने लगेगा। अपनी माता से आज्ञा लेकर बर्बरीक युद्ध में भाग लेने के लिए निकल गए। कौरवो का पक्ष कमजोर था। श्री कृष्ण भगवान को चिंता होने लगी अगर बर्बरीक ने कौरवो का साथ दिया तो पांडवो की हार होनी तय थी। कृष्ण भगवान् ने एक ब्राम्हण भेस में बर्बरीक की शक्ति परीक्षा लेने उसके पास पहुंच गए। श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से पूछा की तुम कुरुक्षेत्र क्यों जा रहे हो। बर्बरीक ने कहा वह एक दानी योद्धा है और एक बाण से महाभारत का युद्ध समाप्त कर सकता हु। 

कृष्ण भगवान् ने बर्बरीक की परीक्षा लेनी चाही। तब दोनों एक पीपल के पेड़ के निचे खड़े थे। कृष्ण भगवान् ने बर्बरीक से कहाँ अगर तुम एक ही बाण में पीपल के सभी पत्तो में छेद कर देते हो, तो वह मान जायेंगे बर्बरीक सच में पराक्रमी योद्धा है। बर्बरीक ने चुनौती स्वीकार कर ली। उसने बाण चलाया जिससे पीपल के पेड़ के सभी पत्तो में छेद हो गया। एक पीपल का पत्ता कृष्ण भगवान् के पैर के निचे था उसे भी भेद कर बाण वापस तरकस में चला गया। बर्बरीक की क्षमता को श्रीकृष्ण पहचान चुके थे। उन्होंने बर्बरीक से पूछा वह युद्ध में किसका साथ देंगे। बर्बरीक ने अपनी माँ से किये वादे के बारे में बताया। युद्ध में जो सेना कमजोर पड़ती नजर आयेगी वह उसीका साथ देगा। कृष्ण भगवान् किसी भी तरह बर्बरीक को युद्ध में भाग लेने से रोकना चाहते थे। कृष्ण भगवान् ने बर्बरीक से कहा तुम महादानी और पराक्रमी योद्धा हो मुझ गरीब को कुछ दान नहीं दोगे। बर्बरीक ने कृष्ण भगवान् को दान मांगने के लिए कहा तो कृष्ण भगवान् ने बर्बरीक से उसका शीश दान में मांग लिया। श्री कृष्ण भगवान् द्वारा वास्तविक परिचय देने पर बर्बरीक ने अपना शीश श्रीकृण भगवान् को दान कर दिया। शीश दान देने से पहले बर्बरीक ने महाभारत का युद्ध देखने की इच्छा प्रकट की। श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के शीश को युद्ध अवलोकन के लिए एक ऊंचे स्थान पर स्थापित कर दिया। 

युद्ध समाप्ति के बाद पांडव विजय के श्रेय को लेकर वाद विवाद करने लगे तब कृष्ण भगवान् ने कहा इसका फैसला बर्बरीक का शीश कर सकता है। बर्बरीक के शीश ने बताया युद्ध में श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र चल रहा था और द्रोपदी महाकाली के रूप में रक्त पान कर रही थी। श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के शीश को प्रसन्न होकर वरदान दिया की कलियुग में तुम मेरे श्याम नाम से पूजित होंगे। तुम्हारे स्मरण मात्र से भक्तो का कल्याण होगा उनकी मनोकामना पूर्ण होगी और मोक्ष की प्राप्ति होगी। बर्बरीक का शीश खाटू के श्याम कुंड से प्रकट हो कर खाटू में स्थापित हो गया और कलियुग में श्यामजी बाबा के नाम से पूजे जाने लगे।
खाटू श्याम यात्रा youtube Video 

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