Wednesday, September 11, 2019

Kailash Mansarovar Yatra guide in hindi

कैलाश मानसरोवर यात्रा करने का सबसे अच्छा समय
इस पवित्र यात्रा करने का सबसे अच्छा समय मध्य मई से मध्य अक्टूबर के बीच है, क्योंकि इन दिनों में मौसम साफ और ठंड कम रहती है।दिन का तापमान सहनीय रहता है, लेकिन रात का तापमान शून्य से निचे चला जाता है।

कैलाश मानसरोवर सरकार द्वारा आयोजित यात्रा की प्रक्रिया -
1) यात्रा रजिस्ट्रेशन -भारत सरकार विदेश मंत्रालय द्वारा यात्रा रजिस्ट्रेशन की तारीख घोषित होने के बाद kmy.gov.in इस वेबसाइट पर जाकर यात्री को रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। 
2)यात्रा चयन की सूचना - यात्री का चयन होने पर ईमेल या मोबाइल के माध्यम से सूचित किया जाता है।
3) दिल्ली में रिपोर्ट करना - निर्धारित यात्रा कार्यक्रम के अनुसार यात्री को दिल्ली में उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
यात्रा से पहले दिल्ली में चार दिन रुक कर कार्य पूर्ति -
पहले दिन - दिल्ली गुजराती समाज सदन में पहुंच कर उपस्थिति दर्ज करना और निवास करना।
दूसरे दिन -दिल्ली हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट (DHLI) में मेडिकल चेक-अप करना।
तीसरे दिन - ITBP Hospital में अंतिम मेडिकल चेक-अप करना।
चौथे दिन - चीनी वीज़ा, चीनी मुद्रा युआन, यात्रा शुल्क इत्यादि कार्य करना। 


सरकार द्वारा आयोजित यात्रा में चयन होने के बाद निम्न दस्तावेज जमा करने होते है -
1. भारतीय पासपोर्ट - कम से कम छह महीने के लिए वैध।
2. पासपोर्ट की सामने और पीछे के पृष्ठ की फोटोकॉपी।
3. फोटो - पासपोर्ट साइज हाल ही में निकाले 6 फोटो।
4. क्षतिपूर्ति बॉन्ड (फॉर्म 1)- यात्री अपने जोखिम पर यात्रा पर जा रहे है।ऐसा एक गैर-न्यायिक 100 /- स्टैम्प पेपर प्रथम श्रेणी के एक मजिस्ट्रेट या नोटरी द्वारा प्रमाणित।
5. अंडरटेकिंग (फार्म -2)- आपातकालीन मामले में हेलीकाप्टर द्वारा निकासी के लिए सहमति पत्र।
6. कन्सेंट (फार्म -3) - चीन के भूमि पर यात्री की मृत्य होने के बाद शव के दाह संस्कार के लिए सहमति पत्र।

भारत सरकार आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग
1 ) लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) 2 ) नाथू ला दर्रा (सिक्किम)

1 ) लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) मार्ग
यात्रा कालावधि - 21 दिन

लिपुलेख दर्रा उत्तराखंड से यात्रा मार्ग में सुविधा देने की जिम्मेदारी कुमाऊँ मंडल विकास निगम उत्तराखंड की है।
लिपुलेख दर्रा भारत की भूमि में यात्रा मार्ग
बस द्वारा

दिल्ली से अल्मोड़ा, अल्मोड़ा से दार्चुला।दार्चुला से बूंदी 42 km जीप द्वारा।
पैदल या घोड़े द्वारा ट्रेकिंग - 66 km
दार्चुला से बूंदी 12 km ,बूंदी से गुंजी -17 km,गुंजी से नबी - 6 km , गुंजी से कालापानी - 10 km ,कालापानी से नाभिधांग - 9 km , नाभिधांग से लिपुलेख चीनी बॉर्डर -12 km.
लिपुलेख दर्रा चीन की भूमि में यात्रा मार्ग
बस द्वारा -
लिपुलेख चीनी बॉर्डर से तकलाकोट ,तकलाकोट से दारचेन बेस कैंप 

2 ) नाथू ला दर्रा (सिक्किम)
यात्रा कालावधि - 18 दिन

नाथू ला दर्रा सिक्किम से यात्रा मार्ग में सुविधा देने की जिम्मेदारी सिक्किम पर्यटन विकास निगम (STDC) की है।
नाथू ला दर्रा भारत की भूमि में यात्रा मार्ग
हवाई मार्ग द्वारा
दिल्ली से बागडोगरा
बस द्वारा -
बागडोगरा से गंगटोक ,गंगटोक से शेराथोंग चीन बॉर्डर
नाथू ला दर्रा चीन की भूमि में यात्रा मार्ग
बस द्वारा -
शेराथोंग से कंगमा ,कंगमा से लज़ी ,लज़ी से ज़्होंगबा ,ज़्होंगबा से दारचेन बेस कैंप।

यात्रा में क्या सावधानी बरते
1.पर्याप्त भोजन और तरल पदार्थ का सेवन करे।
2.लिक या टाइट जूते न पहने।
3.गीले सॉक्स न पहने।
4.शरीर पर कट, छाले जैसी छोटी चोटों की उपेक्षा न करें।
5.बूट के साथ न सोएं।
6.बहुत अधिक भार न रखें (अधिकतम 5 किलोग्राम)
7.यात्रा के दौरान धूम्रपान और शराब का सेवन न करें विशेष रूप से उच्च ऊंचाई पर, क्योंकि यह खतरनाक है।गंभीर परिणाम हो सकते है।

यात्रा में कोनसी चीजे लेकर जाये

वुलन स्वेटर ,मंकी कैप ,वुलन दस्ताने ,वुलन और पॉलीस्टर सॉक्स ,सन ग्लास ,ट्रेकिंग के जूते ,बैटरी ,बड़े आकार  के रेन कोट.सन स्क्रीन लोशन ,वाकिंग स्टिक इत्यादि। 

मानसरोवर
मानसरोवर चीन तिब्बत में स्थित एक झील है। हिन्दू तथा बौद्ध धर्म में इसे पवित्र माना गया है।यह झील लगभग 320 वर्ग किलोमाटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके उत्तर में कैलाश पर्वत तथा पश्चिम में राक्षसताल है। यह समुद्रतल से लगभग 4556 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसकी परिमिति लगभग 88 किलोमीटर है और औसत गहराई 90 मीटर।

मानसरोवर की धार्मिक मान्यता 
हिन्दू धर्म में इसे अत्यंत पवित्र माना गया है। मानसरोवर में स्नान करने के लिए हज़ारों लोग प्रतिवर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा में भाग लेते है। हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार यह झील सर्वप्रथम भगवान ब्रह्मा के मन में उत्पन्न हुयी थी।पुराणों में 'क्षीर सागर' के नाम से वर्णित है। बौद्ध धर्म में भी इसे पवित्र माना गया है। एसा कहा जाता है कि रानी माया को भगवान बुद्ध की पहचान यहीं हुई थी।जैन धर्म तथा तिब्बत के स्थानीय बोनपा लोग भी इसे पवित्र मानते हैं।

कैलाश पर्वत
कैलाश पर्वत चीन तिब्बत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है।यहां से कई महत्वपूर्ण नदियां निकलतीं हैं - ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलुज इत्यादि।इस पर्वत को अस्टापद, गणपर्वत और रजतगिरि भी कहते हैं। कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6,638 मीटर है। हिन्दू मान्यता अनुसार कैलाश पर्वत मेरू पर्वत है जो ब्राह्मांडकी धूरी है और यह भगवान शिवजी  का प्रमुख निवास स्थान है। कैलाश पर्वत दुनिया के 4 मुख्य धर्मों- हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म इसे अत्यंत पवित्र स्थान मानते है। कैलाश पर्वत के महत्व को ऊंचाई से नहीं बल्कि इसके विशेष आकार की वजह से समझा जाता है। इस पर्वत का चौमुखी आकार दिशा बताने वाले कंपास के चार बिंदुओं जैसा माना जाता है।कैलाश पर्वत के दक्षिण भाग को नीलम, पूर्व भाग को क्रिस्टल, पश्चिम को रूबी और उत्तर को स्वर्ण रूप में माना जाता है।बौद्ध धर्मीय भगवान बुद्ध तथा मणिपद्मा का निवास मानते हैं।बौद्ध धर्मियो का मानना है कि इस स्थान पर आकर उन्हें निर्वाण की प्राप्ति होती है।उनका मानना है कि भगवान बुद्ध की माता ने यहां की यात्रा की थी।जैन धर्मियो की मान्यता है कि आदिनाथ ऋषभदेव का यह निर्वाण स्थल 'अष्टपद' है। कहते हैं ऋषभदेव ने आठ पग में कैलाश की यात्रा की थी। कुछ सिख धर्मीयो का मानना है  कि गुरु नानकजी ने भी यहां कुछ दिन रुककर ध्यान किया था। इसलिए सिखों के लिए भी यह पवित्र स्थान है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा youtube Video 


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