Sunday, July 21, 2019

Amarnath yatra & Vaishno devi yatra का मेरे अनुभव कैसे रहा

15 जून 2019 वो दिन था। ऐसे ही बैठा था। अचानक  मेरे मन में अमरनाथ यात्रा जाने का विचार आया। मैंने रेलवे की वेबसाइट पर चेक किया। मेरे शहर से जम्मू जाने के लिए रिजर्वेशन उपलब्ध था। जम्मू एंड कश्मीर बैंक में गया।नजदीक के कोनसे तारीख का यात्रा परमिट मिल सकता है पूछा। 6 जुलाई का कोटा ओपन था।मैंने बैंक से ब्लेंक यात्रा रजिस्ट्रेशन फॉर्म और हेल्थ सर्टिफिकेट लिया।सिविल हॉस्पिटल में गया और एक वॉर्ड से दूसरे वार्ड ऐसे आठ वार्ड के चक्कर काटने के बाद मुझे दूसरे दिन हेल्थ सटिफिकेट प्राप्त हुवा। जम्मू एंड कश्मीर बैंक में फॉर्म और हेल्थ सर्टिफिकेट सबमिट करने के बाद मुझे 6 जुलाई 2019 बालटाल मार्ग से जाने का यात्रा परमिट मिला। पहले मै  2017 को बालटाल मार्ग से अमरनाथ यात्रा कर चूका था।इस साल पहलगाम मार्ग से जाने की बड़ी इच्छा थी।लेकिन मेरे पास समय की कमी थी। इसलिए मुझे बालटाल मार्ग का ही यात्रा परमिट लेना पड़ा। मैंने एक कागज पर अमरनाथ यात्रा की योजना बनायीं। योजना के अनुसार रेलवे के आने और जाने के टिकेट बुक कर लिए। 

मेरी श्री अमरनाथजी यात्रा की प्लानिंग इस प्रकार थी।
4 जुलाई      5  जुलाई             6  जुलाई           7  जुलाई                      8  जुलाई
जम्मू पहुंचना      जम्मू से बालटाल       बालटाल से अमरनाथजी        बालटाल से                  कटरा वैष्णो देवी दर्शन करना 
                          प्रस्थान करना             प्रस्थान करना            जम्मू प्रस्थान करना               जम्मू ट्रैन से घर वापसी 

8 जुलाई का दिन मैंने एक्स्ट्रा रखा था। बारिश या किसी बजह से लेट हो जाऊ तो 8 जुलाई का दिन काम आजायेगा। नहीं लेट हुवा तो माता वैष्णोदेवी का दर्शन हो जायेगा।

मेरी अमरनाथ यात्रा इस प्रकार रही-
यात्रा  का पहला दिन 4 जुलाई कैसे बिता  और खर्चा  कितना हुवा।
मेरी ट्रैन 4 जुलाई को जम्मू स्टेशन पर सुबह 11 बजे के करीब पहुंची।मुझे जम्मू रेलवे स्टेशन से  भगवती नगर श्री अमरनाथजी यात्री निवास जाना था। स्टेशन के बाहर आटो वाले खड़े थे। उनसे मैंने भगवती नगर जाने का किराया पूछा। उन्होंने मुझे 200 रुपये किराया बताया।अमरनाथ यात्री यो की काफी भीड़ थी। इस लिए इन लोगो ने किराया बढ़ा दिया था। मुझे एक बन्दे ने बताया आप आगे चले जाओ मिनी बस मिल जाएगी। वैष्णोदेवी मंदिर के यात्री निवास वैष्णवी धाम और कालिका धाम  के सामने से मैंने मिनी बस पकड़ी बस का  किराया सिर्फ 20 रुपये था। 20 मिनट में  मै भगवती नगर यात्री निवास पहुंच गया। यहाँ पर तीन चार जगह मेरी बैग चेक हुयी यात्रा परमिट पर बार कोड लगा रहता है। उसे स्कैन किया गया और मुझे अंदर जाने दिया गया।जम्मू में भीषण गर्मी थी।मै सीधे बैग पकड़ कर बस टिकट की लाइन में खड़ा हो गया। यहाँ पर पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग से जाने वाले बस टिकट काउंटर साथ साथ लगे थे। मै बालटाल मार्ग की लाइन में खड़ा हो गया मेरे आगे पहले ही बिस पच्चीस लोग खड़े थे। सभी  के हाथ में 5 से 10 लोगो के यात्रा परमिट थे।दो घंटे के बाद मेरा नंबर आया।बालटाल बस किराया548/-था।  काउंटर पर एक सरदारजी थे। उन्होंने टिकट के पीछे लिखा समजा दिया। 59 B बस पर स्टीकर लगा होगा। सीट नंबर  14  है और रात २ बजे बस निकलेगी।बस का टिकट मिल गया। अभी दूसरा काम बाकि था  हॉल में बेड बुक करने का। बस टिकट काउंटर के पिछली साइड में बेड बुकिंग काउंटर था।यहाँ एक फॉर्म भरना पड़ा। फॉर्म भरकर लाइन में लग गया।लाइन में पहले ही दस पन्दरह लोग खड़े थे।एक आदमी को सात मिनट से ज्यादा का समय लग रहा था। सुबह रेल में सिर्फ चाय पि थी। कुछ खाने का समय ही नहीं मिला। गर्मी से हालत ख़राब हो चुकी थी।शरीर से पसीना निकल रहता और पसीने से कपड़े भीग गए थे। लाइन में खड़े होकर १ घंटा बीत गया।इतनी गर्मी की मुझे आदत नहीं थी। मुझे लगा मै चक्कर आकर गिर पडूंगा। मै तुरंत लाइन में ही निचे बैठ गया।  बैठने के बाद थोड़ा अच्छा लगने लगा। अकेले यात्रा पर जाने की पनिशमेंट मुझे मिल रही थी। मेरे साथ एक दो लोग होते तो बारी बारी से लाइन में खड़े रहते।मेरे आगे एक पचपन साठ साल के व्यक्ति खड़े थे। वह भी अकेले थे।उनका नाम बालक्रिशनजी था और जोधपुर राजस्थान से अकेले आये थे।मेरा नंबर नजदीक आया। आगे 5 सात  लोग ही बचे होंगे काउंटर पर बैठा बंदा बोला कोई एक ही व्यक्ति होगा तो  दूसरे के फॉर्म में अपना नाम अड़ कर ले। मेरे आगे खड़े बालकिशन जी को मैंने कहा आपके फॉर्म में मेरा नाम अड़ कर ले वो मान गए और उनके फॉर्म में नंबर ऑफ़ पर्सन के सामने 1 की बजाय 2 लिख दिए। AC हॉल में एक बेड का किराया 50 रुपये था और NonAC का सिर्फ 10 रूपये किराया था।हमने AC हॉल में बेड बुक कराया। बालकिशनजी मेरे अच्छे दोस्त बन गए थे। हम दोनों साथ ही हॉल में गए।  हमें पहली मंजिल पर हॉल नंबर 5 मिला था।मै और बालकिशनजी अपनी अपनी बैग उठाकर हॉल में गए। AC हॉल में जाते ही बहुत ही अच्छा लगा। यहाँ कोई कॉट नहीं होता है खुला हॉल होता है। फर्श पर सोना पड़ता है। मैंने बालकिशनजी को हॉल में बैठने को कहा और गद्दे लेने निचे चला गया। यहाँ भी एक सरदारजी थे। 50 रूपये में एक गद्दा ,तकिया और बेडशीट मिली। 200 रुपये अलग डिपाजिट देना पड़ा जो गद्दे लौटाने पर वापिस मिलने वाले थे।दो गद्दों के 500 रूपये दिए सरदारजीने मुझे रसीद दी।ये सब होते होते दोपहर के 3 बज चुके थे। सुबह से मैंने कुछ भी खाया नहीं था।बालकिशनजी पहले ही भंडारे  में  खाना खा चुके थे। मै अकेला निचे भंडारे  में खाना खाने चला गया। लंगर अभी भी चालू था। रोटी सब्जी ख़त्म हो चुकी थी सिर्फ दाल चावल परोसा जा रहा था। भोजन मुक्त में था। दाल चावल खाने के बाद मुझे तरो ताजा महसूस होने लगा। यात्री निवास और बस टिकट काउंटर के बिच में ओपन स्पेस में एक प्राइवेट कैंटीन बनायीं गयी थी मैंने वहाँ से पानी की बोतल और लस्सी ली। लस्सी बहुत ही बढ़िया थी। हॉल में थोड़ा विश्राम करने के बाद मै नहाने चला गया।सभी मंजिल पर टॉयलेट और बाथरूम अलग बनाये गए थे। साफ सफाई का अच्छा खयाल  रखा गया था।
रात के साढ़े आठ बज चुके थे। मै खाना खाने निकल पड़ा। हॉल के बाहर निकला तो देखा पूरा यात्री निवास लोगो से भरा पड़ा है। हॉल फुल हो जाने के बाद हॉल का टिकट काउंटर बंद कर दिया गया था। लोग जहा कही भी जगह मिली वहा गद्दे बिछाकर आराम कर रहे थे।सो रहे थे। मतलब आप देर से यहाँ पहुंचेंगे तो आपको हॉल में जगह नहीं मिलेगी।भंडारे के बाहर लंबी लाइन लग चुकी थी। एक घंटे भंडारे के बाहर लाइन में खड़ा रहना पड़ा। एक बार आपने यात्री निवास में एंट्री कर ली तो बाहर जाना बड़ा मुश्किल है। बाहर आसानी से जा सकते है। लेकिन अंदर आने में पूरी सिक्युरिटी प्रोसेस से दुबारा गुजरना पड़ता है। दोपहर के बाद यहाँ काफी लंबी लाइन लग जाती है। इस लिए लंगर में भोजन करना उचित होता है। भोजन के बाद मै हॉल में आकर रात 1 बजे का अलार्म मोबाइल पर लगाकर सो गया।इस तरह जम्मू में मेरा पहला दिन 4 जुलाई बिता।
४ जुलाई का मेरा खर्च इस प्रकार रहा
जम्मू स्टेशन से भगवती नगर बस किराया   20.00
हॉल किराया                                             50.00
गद्दे का किराया                                         50.00
२ पानी बोतल  का                                     40.00
2  वक्त की चाय का                                    20.00
एक लस्सी का                                          25 .00
जम्मू से बालटाल बस किराया                    548.00
                                                            ----------
                  4 जुलाई का कुल खर्चा रहा    753.00 रुपये।

यात्रा का दूसरा दिन 5  जुलाई  कैसे बिता  और खर्चा  कितना हुवा।
रात एक बजे मोबाइल का आलार्म बजते ही मै जाग गया। बालकिसनजी को भी जगाया। सबसे पहले मैंने गद्दे उठाये और गद्दे के काउंटर पर जाकर गद्दे वापस किया और दो गद्दे का 400 डिपाजिट वापस लिया। अगर देरी से जाता तो यहाँ काफी लंबी लाइन लग जाती। स्नान कर के ही सोया था इसलिए अभी फिर से स्नान नहीं किया।फ्रेश होते होते डेढ़ बज गये।हम दोनों अपनी अपनी बैग उठाकर बस की और चल दिए। यात्री निवास को लगकर ही एक मैदान में बहुत सारी  बसे खड़ी थी।बालकिसनजी ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे।मैंने बालकिसनजी का बस का टिकट लिया  और उनके बस को पहले ढूंढना शुरू किया।यहाँ मैदान में अंधेरा था रास्ते पर लगी लाईट की रोशनी और बस की लाइटो की वजह से थोड़ा बहुत दिख रहा था। बालकिसनजी की पहलगाम वाली बस ढूंढने में बिस मिनट लगे। उनको बस में बिठाकर मै मेरी बस ढूडने लगा। दस मिनट ढूंढने के बाद मेरी बस मिलगई जिस पर 59B का स्टीकर लगा था।बस में जाकर मेरी सीट पर जा बैठा।सुबह के चार बज गए लेकिन बस हिलने को तैयार नहीं थी। साढ़े चार बजे बसे एक के पीछे एक धीरे धीरे  चलना शुरू  हुयी।ढाई घंटे हम बस में ऐसे ही बैठे रहे। सभी बसे जब रोड पर आगयी तो एक एक बस को आगे बढ़ने दिया गया तब 5 बज चुके थे।बिच रास्ते में दो जगह भंडारे के पास बस को रोका गया।भंडारे में बहुत ही अच्छे पकवान थे। कचोरी,जलेबी,पानी पूरी,डोसा ,खीर,आइसक्रीम ,गुल्फी ,दाल ,चावल ,रोटी सब कुछ था।सिर्फ ज्यादा समय नहीं था। सभी बसे एक साथ एक ही जगह रोकने के कारन ज्यादा भीड़ हो गयी। अच्छी चीजे खाने के लिए लंबी लाइन लग गयी।मैंने दाल चावल सब्जी रोटी लेना मुनासिब समजा क्यों की वहा लाइन बड़ी नहीं थी। बालटाल पहुंचते पहुचेत श्याम के 7 बज गए और हलकी हलकी बारिश शुरू हो गयी। मैंने बस में ही रेन कोट चढ़ा लिया। बालटाल से एक किलोमीटर पहले बस से उतरकर बैग चेक  करानी पड़ी। फिर दुबारा बस में बैठ गए। बालटाल बस स्टैंड पर हमें उतारा गया। हलकी हलकी बारिश हो ही रही थी।
बस स्टैंड से थोड़ा आगे सिक्योरिटी चेक पॉइंट था वहा  फिर से बैग और यात्रा परमिट चेक करने के बाद आगे जाने दिया गया। अँधेरा हो चूका था और ठंड भी बज रही थी।  जगह जगह पर टेंट लगे दिख रहे थे। टेंट वाले टेंट चाहिए क्या पूछ रहे थे।मै पछली बार दो हजार सत्रह में आया था तब पानीपत के लोग दोस्त बन गए थे उनके यहाँ का भंडारा लगा था उनके साथ मै भंडारे में रुका था। भंडारे में अच्छी व्यवस्था हुयी थी। इसलिए मैंने सोचा इस बार भी भंडारे में रुका जाये। 500 मीटर चलने के बाद मुझे भंडारे दिखे। भंडारे वाले सज्जन से मैंने रुकने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा इस साल हमने  रुकने की व्यवस्था नहीं की है।और एक भंडारे में जाकर कोशिश की मुझे वही जबाब मिला। अभी टेंट में रुकने के शिवा कोई चारा नहीं था। भंडारे के सामने ही टेंट लगे थे। एक टेंट में जाकर देखा कॉट पर बिस्तर लगाए गए थे। मैंने इसी टेंट में रुकना ठीक समजा। टेंट वाले से 300 रुपये में बात पक्की हुयी।थोड़ी देर बाद  हैदराबाद के दो सज्जन आगये और ऋषिकेश के रहने वाले स्वामीजी भी आगये। उनसे जान पहचान हो गयी। भंडारे के पीछे पब्लिक टॉयलेट और बाथरूम बनाये गए थे। वहाँ जाकर देखा अँधेरा था कोई लाइट लगायी गयी नहीं थी।एक बंदा एक बड़े बर्तन में पानी गर्म कर रहा था और पचास रूपये में एक बाल्टी गरम पानी बेच रहा था।ठण्ड तो काफी लग रही थी।मैं टेंट में गया और बैग में से स्टार्च लेकर आया और एक बाल्टी पानी लेकर बाथरूम में स्नान कर लिया।सुबह 4 बजे का अलार्म लगाकर सो गया। सुबह मुझे 5 बजे ही पैदल श्रीअमरनाथजी के  दर्शन के लिए जाना था।
5  जुलाई का मेरा खर्च इस प्रकार रहा
टेंट का किराया                300.00
रस्ते में 2 पानी बोतल       40.00
गर्म पानी                      50.00 
                                  --------
5 जुलाई का कुल खर्चा   390.00 

यात्रा का तीसरा  दिन 6 जुलाई  कैसे बिता  और खर्चा  कितना हुवा।
सुबह 4 बजे अलार्म बजते ही मै जाग गया। स्नान नहीं किया क्यों की ऊपर अमरनाथ में स्नान की सुविधा थी।फ्रेश होने के बाद  मैंने  मेरी बैग मेसे छोटा बैग निकाला उसमे  स्नान के लिए उपयुक्त कपडे ,छाता ,रेनकोट,स्टार्च डाली।बैग पीठ पर लटका दी ।मुझे बड़ी बैग लॉकर में रखनी थी। टेंट वाले को लॉकर कहा है पूछा। टेंट वाला बोला  यही टेंट में बैग रख दो।मैंने उसे कहा भाई मेरा कोई आज ही वापस आने का फिक्स नहीं है। बारिश हो गयी या ज्यादा थकावट हुयी तो मुझे ऊपर अमरनाथजी में रुकना पड़ेगा।टेंट वाला लॉकर  के पास लेकर गया। लॉकर वाला ताला लगाकर गायब था। टेंट में बैग रखने के शिवा और कोई चारा मेरे पास नहीं था। भंडारे में चाय नास्ता मिल रहा था। लेकिन मैंने कुछ भी लिया नहीं। मुझ से खाने पिने के बाद चढ़ाई नहीं होती। खाली पेट ही मै चढ़ाई कर सकता हु।यह मेरी आदत थी। लेकिन आप खाली पेट चढ़ाई करने की चेस्टा न करे।मैंने 5 बजे चलना शुरू किया। मैंने तय किया था चाहे कुछ हो जाये मै पैदल ही चढ़ाई करूँगा और पैदल ही वापस आऊंगा। 2 किलोमीटर चलने के बाद डोमेल चेक पोस्ट लगा। यहाँ पर यात्रा परमिट चेक करने के बाद आगे जाने दिया जाता है।काफी भीड़ थी।यात्रा परमिट की एक काउंटर चेकपोस्ट पर देनी पड़ी। चेकपोस्ट पर आधा घंटा लगा। डोमेल चेकपोस्ट से असली चढ़ाई की शुरुवात होती है।डोमेल से 6 km बरारी तक सीधी खड़ी चढ़ाई है। आसमान साफ था।रुक रुक कर धीरे धीरे  एक एक चढ़ाई पार करते गया।थकावट महसूस होने पर मै रुक जाता था। थोड़ा पानी पिता था। साथ चॉकलेट लाया था। उनको चबाते गया। निचे बैठा नहीं।खड़ा ही रहा। बैठने से बॉडी ठंडी हो जाती है फिर चलने में बहुत तकलीफ होती है।आखिर में बरारी जगह आगयी। यहाँ पर खड़ी चढ़ाई समाप्त होती है।यहाँ एक कश्मीरी ने चाय की दुकान लगा रखी थी। मेरा पानी ख़त्म हो चूका था। उस दुकान से मैंने 50 रुपये में पानी की बोतल खरीदी। दुकान वाले ने बाहर प्लास्टिक की चेयर रखी थी उस पर मै शांति से बैठ गया और चैन की सांस। ली। 8 km मै चल चुका था और अभी 6 km चलना बाकि था।10 मिनट विश्राम करने के बाद मैंने चलना शुरू किया। आधा किलोमीटर चलने के बाद मुझे बहुत ज्यादा थकावट महसूस होने लगी। मेरी समज में नहीं आरहा था।मैंने  6 km की खड़ी चढ़ाई पार करली लेकिन मुझे ज्यादा थकावट नहीं हुयी। अभी तो प्लेन रास्ता है बहुत कम चढ़ाई  है।फिर मुझे इतनी ज्यादा थकावट क्यों हो रही है। तभी मेरी दिमाग में लाइट जली लौ ऑक्सीजन की वजह से मुझे प्रॉब्लम हो रही थी। साढ़े बारा बजे मै अमरनाथजी पहुंच गया। इस साल बहुत ज्यादा बर्फ गिरी थी। दूर दूर तक बर्फ ही बर्फ दिख रही थी। एक टेंट के पास मै रुक गया।उसका टेंट खाली था।उसके पास गर्म पानी भी था और टेंट के पीछे पत्रे का बाथरूम बना था। मैंने उसे कहा भाई मै थोड़ा आराम कर लेता हु बाद में स्नान करूँगा। उसने कहा ठीक है। मैं  टेंट में 20 मिनट लेटा रहा।विश्राम करने के बाद मुझे अच्छा लगने लगा। फिर मैंने स्नान कर लिया। 100 रूपये का प्रसाद मैंने उससे ख़रीदा और मेरा बैग और मोबाइल उसके पास जमा कर दिया। उसने मुझे मोबाइल और बैग की रसीद दी। पैसा नहीं लिया क्यों की मैंने उससे प्रसाद ख़रीदा था। टेंट से पवित्र गुफा 1km दूर थी।मैंने सुबह से कुछ भी खाया पिया नहीं था। गुफा की तरफ जाते समय रस्ते में भंडारा लगा। मेरा इरादा दर्शन के बाद भोजन करने का था। लेकिन खाली पेट चलना मेरे लिए बहुत कठिन हो रहा था। मैंने भंडारे में दाल ,चावल,सब्जी ,चपाती खाली। खाना खाने के बाद दो कप चाय भंडारे में ही पि ली। अभी मेरे में बहुत जान आ चुकी थी। गुफा के नजदीक पहुंचने पर लाइन में लगाना पड़ा यहाँ भी सिक्योरिटी चेकिंग से गुजरना पड़ा। यात्रा परमिट स्कैन किया गया। भोले बाबा के पूर्ण रूप का दर्शन हुवा।कहा जाता बारह तेरह साल के बाद बाबाने पूर्ण रूप से दर्शन दिए है। 5 मिनट तक मै बाबा के सामने डटा रहा।सिक्योरिटी वालो ने मुझे जबरन हटाया।बाबा बर्फानी का  दर्शन कर धन्य धन्य हो गया।मै टेंट में लौट आया। दोपहर के 3 बज चुके थे। अभी मेरे सामने दो विकल्प थे या तो मै रात अमरनाथजी में रुक कर  सुबह बालटाल के लिए निकलू।
या अभी बालटाल के लिए प्रस्थान कर लू। अगर मै अमरनाथजी में रुकता हु। तो मेरा एक दिन बर्बाद होने वाला था। जो मैंने माता वैष्णोदेवी के दर्शन के लिए रखा था।थकावट काफी महसूस कर रहा था। लगता था मेरे से अभी बालटाल जाना होगा नहीं। मै टेंट में पंद्रह  मिनट के लिए लेट गया।मैंने हिम्मत जुटाई जो हो देखा जायेगा। अभी बालटाल के लिए चलते है। ज्यादा प्रॉब्लम हुयी तो बिच रास्ते में घोड़े भी मिल जाते है। सोच कर चलना शुरू किया। साढ़े तीन बजे चलना शुरू किया भोले की कृपा  से साढ़े सात बजे मै बालटाल सही सलामत पहुंच गया।कोई ज्यादा परेशानी नहीं हुयी। न ही ज्यादा थकावट हुयी।सब भोले की कृपा से संभव हुवा। एक दिन में चौदह किलोमीटर चढ़ाई कर एक दिन में ही चौदह किलोमीटर उतरकर आना।यह मेरा अब तक का रेकॉर्ड था। ऐसा करने वाला मै अकेला नहीं था बहुत सारे लोग ऐसा करते है।
टेंट वाले ने बड़ा बैग संभालकर रखा था।थोड़ी देर  टेंट में विश्राम किया और जम्मू का टिकट निकाल ने बालटाल बस स्टैंड चला गया।क्यों की लाउड स्पीकर पर अनाउंसिंग की जा रही थी। सुबह 5 बजे के बाद किसी भी वाहन को जम्मू या श्रीनगर जाने नहीं दिया जायेगा। ये बात मुझे पहले से पता थी। इसलिए मै अमरनाथजी पर रात में रुका नहीं।बस स्टैंड पर सरकारी बस का टिकट काउंटर मुझे कही नजर नहीं आया।बस स्टैंड पर शेड में एक बंदा टेबल लगाकर जम्मू जाने के टिकट कटवा रहा था। मैंने उसे ही 600 रूपये में जम्मू का टिकट लिया। उसने रसीद के पीछे बस नंबर लिख दिया और सुबह 3 बजे का टाइम बताया।टेंट में लौट आया तो देखा कल मेरे साथ रुके थे हैद्राबाद बाद से आये दो बंदे और स्वामीजी भी अमरनाथजी का दर्शन कर लौट आयेथे। हैद्राबाद के दोनों ने अमरनाथजी आने और जाने में घोड़े के इस्तेमाल किया। लेकिन स्वामीजी जिनकी उमर 60 साल के करीब लग रही थी  मेरी तरह पैदल चढ़ाई की और पैदल ही वापस बालटाल लौट आये थे।फिर भी स्वामीजी तरो ताजा दिख रहे थे। स्वामीजी ने बाबा रामदेव की तरह पेहराव कर रखा था।स्वामीजी ने मुझे कुछ ओरिजिनल रुद्राक्ष भी दिए। सुबह तीन बजे जाना था। मोबाइल पर दो बजे का अलार्म लगाकर सो गया।
6  जुलाई का मेरा खर्च इस प्रकार रहा
अमरनाथजी में एक पानी बोतल ली थी  उसका    50.00
निचे बालटाल में पानी बोतल ली उसका              25.00
दूसरे दिन का टेंट का किराया                           200.00 
बालटाल से जम्मू बस किराया                         600.00
                                                                --------
                          6  जुलाई का कुल खर्चा रहा 875.00 

यात्रा का चौथा  दिन 7 जुलाई कैसे बिता  और खर्चा  कितना हुवा।
सुबह दो बजे मोबाइल का अलार्म बज ते ही मै जाग गया। फ्रेश होकर जाने के लिए तैयार होगया।स्वामीजी पहले ही जा चुके थे। हैदराबाद के दोनों सज्जन मेरे साथ ही बस स्टैंड की और निकल लिए।दो बजे भंडारे बंद थे इस लिए चाय भी नसीब नहीं हुयी। तीन बजे से बस में बैठे रहे सुबह 5 बजे बस एक के बाद एक चलना शुरू हुयी।दोपहर 12 बजे बस को एक भंडारे पर रोका गया। भंडारे में भोजन का स्वाद लिया। बस श्याम 8 बजे के करीब जम्मू पहुंच गयी। बस बाले ने जम्मू के फ्लाय ओवर ब्रिज के निचे बस रोक दी और चिल्लाया रेलवे स्टेशन  वाले यही उतर जाये बस आगे भगवती नगर जाएगी। मैंने रेलवे स्टेशन के नजदीक वैष्णोदेवी मंदिर के कालिका भवन  भक्त निवास में ऑनलाइन AC हॉल में 150 रूपये में बेड बुक कर रखा था।इसलिए मुझे यही पर फ्लाय ओवर ब्रिज के निचे उतरना पड़ा।यहाँ से एक मिनी बस स्टेशन जाने के लिए मिल गयी उसका किराया केवल 10 रुपये था । कालिका  भवन में मैंने चेक इन कर लिया।कालिका भवन में साफ सफाई का अच्छा खयाल रखा दिखा।कालिका भवन में ही भोजनालय बना है। 75 रुपये में मैंने वेज थाली और 15 रुपये की पानी बोतल ली। सुबह मुझे 5 बजे  वैष्णोदेवी जाना था इसलिए मोबाइल पर 4 बजे का अलार्म लगाकर सो गया।
7  जुलाई का मेरा खर्च इस प्रकार रहा
जम्मू आते वक्त एक पानी बोतल ली उसका               20.00
कलिका भवन में थाली और पानी बोतल का               90.00
और बेड का मैंने ऑनलाइन पे किया था                   150.00 
                                                                       ---------
                                 7 जुलाई का कुल खर्चा         260 .00 

यात्रा का पांचवा और आखरी दिन 8 जुलाई कैसे बिता  
सुबह 4 बजे मोबाइल का अलार्म बजते है मै जाग गया। नहा धोकर फ्रेश होकर वैष्णो देवी जाने के लिए तैयार हो गया।मेरी वापसी की ट्रैन जम्मू से रात 9 बजे की थी। कालिका भवन में मेरी कुछ लोगो से वैष्णो देवी जाने की बात हुयी थी।वो लोग बोले आपका 9 बजे तक माता का दर्शन कर लौटना संभव नहीं है। माता वैष्णोदेवी का दर्शन कर किसी भी हालात में 8 बजे तक लौटने का इरादा पक्का कर लिया। रेलवे स्टेशन पर लॉकर  रूम के पास सवा पांच बजे मै बैग लेकर पंहुचा।देखा लॉकर रूम बंद था।लॉकर  रूम के पास ही चाय की दुकान थी। दुकान वाले को पूछा क्लॉक रूम कब खुलेगा।उसने बोला लॉकर रूम में एक लड़का सोया है। उसे आवाज दो।मैं दरवाजे के पास गया और उसे धकेला। मैंने देखा चैन लगाकर ताला लगाया था। एक फिट दरवाजा खुल गया। टेबल पर एक लड़का सोया हुवा था। उसे आवज दिया। भाई कितने बजे खुलेगा उसने घडी की तरफ देखा और बोला साढ़े पांच बजे खुलेगा और फिर से सो गया। अभी सवा पांच बजे थे। मैंने उसे दो बार आवाज लगायी भाई खोल दे मुझे अर्जन्ट जाना है।भीतर से कोई आवाज नहीं आयी। मै परेशान होगया। सुबह का समय होने के बावजूद मौसम गर्म  था। मै स्टेशन के बाहर खुले में आगया और साढ़े पांच बजने का इंतजार करने लगा। साढ़े पांच बजते ही मै लॉकर रूम की तरफ गया।लॉकर रूम का दरवाजा खुल चूका था। एक पंजाबी लड़का वहा आँखे मलकर चेयर में बैठा था। मैंने उसे पूछा लॉकर तो 24 ऑवर खुला रहता है। फिर बंद क्यों था। वो पंजाबी में कुछ बड़बड़ाने लगा। मैंने बैग रख दी और रसीद ली। कटरा जाने के लिए रेलवे स्टेशन के बाहर चार पांच बसे खड़ी थी। एक बस में ज्यादा यात्री बैठे थे  मै उसीमे बैठ गया। बस पूरी भरने के बाद सव्वा छे बजे चलना शुरू हुयी। बस का ड्राइवर सरदारजी था। उसने कटरा से पहले एक होटल पर बस रोक दी और बोला कुछ चाय पानी नाश्ता करना है तो कर लो।होटल वाला भी सरदारजी था। बस यहाँ रोकने का चक्कर मेरे समज में आगया। मैंने यहाँ चाय और बिस्कुट लिया। आधे घंटे के बाद होटल से बस चलना शुरू हुयी। साढ़े आठ बजे बस कटरा बस स्टैंड पर पहुंच गयी। बस वाले ने 60  रूपये किराया लिया। मुझे कुछ नास्ता करना था। बस स्टैंड के सामने ऑटो स्टैंड के पास एक पंजाबी होटल है। वहा मै चला गया।यहाँ मै पछली बार आया था तो इसी होटल में खाना खाया था।यहाँ के रेट बहुत ज्यादा थे। सभी सब्जी के रेट 200 से  ज्यादा ही है।मैंने यहाँ पर वड़ा सांबर लिया। जिसका रेट 80 रुपये था। होटल के सामने ही ऑटो स्टैंड है। मै वहा चला गया और एक ऑटो वाले से बाणगंगा जाने के लिए पूछा उसने 150 रुपये किराया बताया। मैंने उसे बताया मुझे स्पेशल जाना नहीं है। उसने मुझे 50 रूपये किराया बताया लेकिन दो सवारी आने के बाद निकलूंगा बोला। मै ऑटो से बाणगंगा पंहुचा। मैंने यात्रा पर्ची पहले ही ऑनलाइन निकाल रखी थी। बाणगंगा चेकपोस्ट पर कड़ी चेकिंग के बाद आगे जाने दिया गया। सुबह के 9 बज चुके थे।बाणगंगा चेकपोस्ट से थोड़ा आगे चलने के  बाद नया तारा कोट मार्ग  रास्ता दिखा। मैंने वैष्णोदेवी पैदल ही जाने की और वापस आने की ठान ली थी।नये मार्ग से  जाने की बड़ी तमन्ना थी। लेकिन नया तारा कोट मार्ग पुराने मार्ग से एक  किलोमीटर लंबा है।नये मार्ग से सिर्फ पैदल यात्री ही जा सकते है। घोड़े वाले को अल्लोव नहीं है।जिन लोगो को घोड़े और घोड़े  के लीद के बदबू से प्रोब्लेम है वह लोग  नया मार्ग से जाना पसंद करते है। मेरे लिए ये सब चीजे मायने नहीं रखती थी। मुझे माता का दर्शन कर समय पर जम्मू लौटना था।इसलिए पुराने मार्ग से ही मैंने चढ़ाई की शुरुवात करि। समय की कमी के कारन मै अधकुवारी गया नहीं। हिमकोठी मार्ग से भवन पहुंच गया। मैंने यहाँ कुछ बदलाव देखे।छोटे बच्चो के लिए इस टाइप के सायकल का प्रबंध किया गया है। इसका किराया बाणगंगा से भवन तक 540 रूपये है। अधकुवारी से भवन तक बैटरी कार पहले सिर्फ विकलांग,बीमार  और बुजुर्ग लोगो के लिए ही थी अभी सभी के लिए अल्लोव कर दी गयी है। जिसका अधकुवारी से भवन तक किराया 354 प्रति व्यक्ति रखा गया है। और भवन से अधकुवारी तक 236 रखा गया है।भवन पहुंचते पहुंचते दोपहर का १ बज गया। मेरे पास कोई बैग नहीं था। लेकिन मै मोबाइल साथ लेकर आया था। गुफा के भीतर मोबाइल लेजाना  अल्लोव नहीं है। निचे कुछ सीढिया उतरने के बाद लॉकर बने है। यहाँ लाइन में खड़ा रह गया। आधे घंटे के बाद मेरा नंबर आया। मुझे एक ताला और चाबी दी गयी। एक खुले लॉकर में मैंने मोबाइल बेल्ट और वॉलेट रख दिया। लॉकर सुविधा मुक्त है। 70 रुपये का प्रसाद लिया और लाइन में लग गया। इस मौसम में ज्यादा भीड़ नहीं होती है । ज्यादा तर अमरनाथजी के यात्रियों की ही भीड़ होती है।गुफा में जाने के लिए पहले एक ही मार्ग था अभी दो मार्ग बनाये गए है। इसलिए दर्शन के लिए ज्यादा समय नहीं लगता। मुझे माता के दर्शन के लिए सिर्फ बिस पच्चीस सेकंड ही मिले होंगे।अफसोस की बात है  मै ठीक तरह  माता का दर्शन भी नहीं कर पाया था।माता का दर्शन कर गुफा से बाहर आ गया।दो बज चुके थे। मैंने पहले लॉकर से मेरा सामान निकाल  लिया। अभी भैरवनाथजी के दर्शन करना बाकि थे।भैरवनाथजी के दर्शन किये बिना मेरी यात्रा अधूरी रह जाती। मैंने पहले मंदिर ट्रस्ट के भोजनालय में वेज थाली और पानी बोतल 90 रूपये में ली।आप सबको पता है भवन से भैरवनाथ के लिए रोपवे शुरू हो चूका है। मैंने रोपवे के पास जाकर देखा बहुत बड़ी लम्बी लाइन लगी थी।लाइन में खड़ा रहता तो  १ घंटा आराम से लग जाता।भवन से भैरवनाथ ढाई किलोमीटर की दुरी पर है। लेकिन चढ़ाई कर जाना पड़ता है।मैंने चलकर ही भैरवनाथ जाने का फैसला किया। आधे किलोमीटर चढ़ाई करने के बाद शॉर्टकट जाने के लिए सीढिया बनायीं गयी थी। मैंने सीढ़ियों का इस्तेमाल किया  25 मिनट में मै भैरवनाथ पहुंच गया।मेरा  भैरवनाथजी का दर्शन 15 मिनट में  हो गया।मैंने रोपवे के टिकट काउंटर पर जाकर देखा दो तीन लोग ही थे। मुझे रोपवे का अनुभव भी करना था और समय भी बचाना था। रोपवे का टिकट दोनों साइड का 100 है। मै एक साइड से ही जाने वाला था फिर भी मुझ 100 का  टिकट लेना पड़ा। 5 मिनट से भी कम समय में मै भवन पहुंच गया। जब मैंने भवन से निचे उतरना शुरू किया तो साढ़े तीन बज चुके थे। मै सामान्य गति से बिना रुके  6 बजे बाणगंगा पहुंच गया। ऑटो वाले खड़े ही थे। 50 रूपये देकर कटरा बस स्टैंड पहुंच गया।कटरा बस स्टैंड पर जम्मू जाने वाली बस खड़ी थी। उसमे मै बैठ गया। बस वाले ने  80 रुपये  किराया लिया। 8 बजे के करीब मै जम्मू पहुंच गया। मेरी ट्रैन 9 बजे की  थी एक घंटे का समय मेरे पास और था। मै कलिका भवन के भोजनालय में गया और वहा  वेज थाली और 1 पानी बोतल 90 रुपये में ली और सही समय पर स्टेशन पहुंच गया। लॉकर रूम से 15 रुपये देकर बैग ली और समय पर  ट्रैन पकड़ ली। आप सभी के क्रिपा से इस तरह मेरी अमरनाथजी यात्रा   संपन्न हुयी।
8  जुलाई का मेरा खर्च इस प्रकार रहा
जम्मू से कटरा बस किराया                     60 .00
कटरा जाते वक्त चाय बिस्कुट                   25.00
कटरा पहुंचने पर वड़ा सांबर लिया            80.00
कटरा से बाणगंगा ऑटो किराया              50.00
बाणगंगा से भवन जाते वक्त 2 चाय ली     15.00
गन्ने का जूस 1 ग्लास लिया                   20.00
प्रसाद                                                70.00
भवन में वेज थाली और  पानी बोतल        90.00
रोपवे टिकट                                      100.00
बाणगंगा से बस स्टैंड ऑटो किराया          50.00
कटरा से जम्मू बस किराया                     80.00
जम्मू में वेज  थाली और पानी बोतल        90.00
                                                     -----------
                       8 जुलाई का कुल खर्चा  730 .00 

अभी सभी दिनों का कुल खर्चा कितना हुवा देखते है।
पहले दिन 4 जुलाई               753.00
दूसरे दिन 5 जुलाई               390.00
तीसरे दिन  6 जुलाई             875.00
चौथे दिन 7 जुलाई               260.00
पांचवा दिन 8 जुलाई            730.00
                                      ----------
                                       3008.00
मेरा पांच दिनों का कुल खर्चा हुवा  3008 /-

                                                                 

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