Saturday, June 15, 2019

Murudeshwar Karnataka Travel Guide and Visiting places

मुरुदेश्वर पौराणिक कथा 
मुरुदेश्वर कैसे पहुंचे -
हवाई मार्ग

मैंगलोर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा मुरुदेश्वर से लगभग 153 किमी दूर है। यह देश के सभी प्रमुख शहरों जुड़ा हुआ है और विदेशों में भी  कुछ उड़ाने भरी जाती है। मुरुदेश्वर पहुंचने के लिए हवाई अड्डे से टैक्सियाँ उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग
मुरुदेश्वर रेलवे स्टेशन मैंगलोर और मुंबई से जुड़ा है। नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन मैंगलोर है और यह भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। मुरुदेश्वर रेलवे स्टेशन से मंदिर 2 किमी की दुरी पर स्थित है।मुरुदेश्वर रेलवे स्टेशन से मुरुदेश्वर मंदिर बस और ऑटो-रिक्शा द्वारा पहुँचा जा सकता है।
सड़क मार्ग
निजी और कर्नाटक सरकार की बसे मुंबई, कोच्चि और बेंगलुरु से मुरुदेश्वर के लिए बस सेवा उपलब्ध है।मुरुदेश्वर एनएच 17 पर स्थित है जो मुंबई को कोच्चि से जोड़ता है, दोनों शहरों के बीच नियमित रूप से बसें चलती है।
मुरुदेश्वर यात्रा समय :- १ दिन


मुरुदेश्वर कब जाये :- साल में कभी भी जा सकते है। 


मुरुदेश्वर मंदिर दर्शन टाइम :- सुबह 6 से 1 बजे तक
                                          दुपहर 3 से 8 बजे तक 


मुरुदेश्वर के आस पास के दर्शनीय स्थल

1.भटकल
मुरुदेश्वर रेलवे स्टेशन से 13 किलोमीटर की दूरी पर, भटकल एक ऐतिहासिक और प्राचीन बंदरगाह शहर है। जो उडुपी की ओर NH17 पर स्थित है। भटकल में विजयनगर साम्राज्य समय के मंदिर और कई प्राचीन जैन स्मारक हैं।यहाँ का केथाप्य नारायण मंदिर देखने लायक है। चंद्रनाथ बसडी और पार्श्वनाथ बसदी के प्राचीन जैन मंदिर और भटकल बीच भटकल का एक और आकर्षण है।

२.इदगुनजी गणपति मंदिर

यह मंदिर मुरुदेश्वर से 15 किलोमीटर की दूरी पर और होनवर से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस क्षेत्र में प्रसिद्ध मंदिरों में से एक गणपति मंदिर है।किंवदंती के अनुसार, भगवान गणपति इस स्थान पर रुके थे, जिसे कुंजारन्या के नाम से जाना जाता था।स्कन्दपुराण में इदगुनजी के महत्व का उल्लेख किया गया है। यह स्थान शरवती नदी के बाएं किनारे पर स्थित है। यह मंदिर दक्षिण कन्नड़ के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है और प्रति वर्ष 1 मिलियन से अधिक भक्तों दर्शन के लिए आते है। 

श्रीगणेशजी भगवान इस मंदिर में खड़े मुद्रा में विराजमान है, श्रीगणेशजी के खड़े मुद्रा में बहुत ही कम मंदिर है। विनायक चतुर्थी यहाँ मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है।

३. नेत्रानी द्वीप
मुरुडेश्वर से 20 किलोमीटर की दूरी पर, भटकल और नेतरानी द्वीप से 25 किलोमीटर दूर अरब सागर में एक छोटा सा द्वीप है जो डाइविंग / स्नोर्कलिंग के लिए प्रसिद्ध है। इसे Netragudo & Pigeon Island के नाम से भी जाना जाता है।नेत्राणी स्नोर्कलिंग और डाइविंग गतिविधियों के लिए बहुत उपयुक्त है। प्रवाल, तितली मछली, ट्रिगर मछली, तोता मछली, ईल और चिंराट की कई किस्में यहां देखी जा सकती हैं। इस द्वीप में एक प्राचीन मंदिर, एक रोमन कैथोलिक चर्च और एक मस्जिद है। इस द्वीप पर भटकल और होन्नावर से नाव द्वारा पंहुचा जा सकता है।

४ .बैनदूर (बिंदूर)
मुरुदेश्वर से 30 किलोमीटर की दूरी पर और उडुपी से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित , बैनदुर जिसे बिंदूर के रूप में भी जाना जाता है।   एक छोटा सा ऐतिहासिक शहर है जो मुरुदेश्वर और उडुपी के बीच NH17 पर स्थित है। बैनदूर कई मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है - श्री सेनेश्वरा मंदिर, श्री महाकाली मंदिर और समुद्र तट पर स्थित श्री सीता रामचंद्र मंदिर, श्री सोमेश्वर मंदिर। बैनदुर में एक सुंदर समुद्र बिच भी है।श्री सेनेश्वरा मंदिर होयसला की शैली में निर्मित यहाँ का सबसे सुंदर मंदिर है। श्री महाकाली मंदिर कम से कम 300 साल पुराना है और हाल ही में इसका जीर्णोद्धार हुआ है।

५. कुदुमरी (चट्टीकल) वाटर फॉल
मुरुदेश्वर से 43 किलोमीटर की दूरी पर, उडुपी से 93 किलोमीटर और शिरोर से 17 किलोमीटर (उडुपी - करवार रोड पर), कुदुमरी वाटर फॉल चट्टीकला गांव के पास गहरे जंगल में स्थित एक शानदार झरना है। कुदुमरी झरने का पानी 300 फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ एक शानदार झरना है। घने जंगल से होकर चटीकल से लगभग 3 किलोमीटर दूर ट्रेक करना पड़ता है। ट्रेक मार्ग बहुत खतरनाक माना जाता है। नवंबर दिसम्बर इस जगह को ट्रेक करने का सबसे अच्छा समय है।

६.कोसल्ली वाटर फॉल
मुरुदेश्वर से 45 किलोमीटर की दूरी पर, उडुपी से 95 किलोमीटर और शिरोर से 20 किलोमीटर (उडुपी - करवार रोड पर), कोसल्ली वाटरफॉल एक शानदार झरना है जो कोसल्ली गांव के पास गहरे जंगल में स्थित है। कोसल्ली झरना 380 फीट की ऊंचाई से गिरता है। घने जंगल से होते हुए कोसल्ली से 5 किलोमीटर तक ट्रेक करना पड़ता है, यहाँ पहुंचने में कोसल्ली गांव से 2 घंटे लगते है। यह जगह बारिश के मौसम में बेहद खतरनाक हो जाती है जब चट्टानें फिसलन भरी हो जाती हैं। नवंबर - दिसम्बर इस जगह को ट्रेक करने का सबसे अच्छा समय है। ऑटो से शिरूर से कोसल्ली पहुँचा जा सकता है। कोसल्ली के पास कोई होटल नहीं है, इसलिए पर्याप्त भोजन और पानी साथ ले जाएं। एक गाइड साथ लेना अच्छा रहता है।


No comments:

Post a Comment

Thank you for comment