Sunday, April 21, 2019

Top Best Places to Visit in Nepal in Hindi

काठमांडू घाटी के दर्शनीय स्थल

पशुपति नाथ मंदिर
थमेल से पशुपतिनाथ मंदिर की दुरी - 4 km

काठमांडू में सबसे महत्व पूर्ण स्थान पशुपति नाथ जी का मंदिर है।यह मंदिर बागपति नदी के किनारे स्थित है। पशुपतिनाथ मंदिर यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत में शामिल है। पशुपतिनाथ भगवान शिव का ही एक रूप है।यह सिर्फ धार्मिक स्थल के रूप में ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। देश विदेश से काफी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। इस मंदिर में सिर्फ हिन्दुओ को ही प्रवेश दिया जाता है।गैर हिंदू पर्यटक इस मंदिर का दर्शन दूर से बागमति नदी के दूसरे किनारे से कर सकते हैं।


गुह्येश्वरी मंदिर
पशुपतिनाथ मंदिर से दुरी - 1 km
गुह्येश्वरी मंदिर हिंदुओं के साथ-साथ बौद्धों के लिए भी एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान है। मुख्य पशुपतिनाथ मंदिर के लगभग एक किलोमीटर पूर्व में स्थित, यह पशुपतिनाथ क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। शक्ति पीठ के रूप में मान्यता प्राप्त, इसे शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह माना जाता है कि सतीमाता देवी के शरीर का एक हिस्सा इस स्थान पर गिरा, जहां अब मंदिर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण राजा प्रताप मल्ल ने 17 वीं शताब्दी में करवाया था।केवल हिंदुओं को इस मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति है।इस मंदिर का निर्माण भूटानी पैगोडा शैली में कराया गया है। दीवारों और स्तंभों पर बेहतरीन नक्काशी तराशी गयी है।


बौद्धनाथ स्तूप
पशुपतिनाथ मंदिर से दुरी - 2 km
भारतीय नागरिकों के लिए एंट्री टिकट :- 60 भारतीय रुपये

एसा माना जाता है कि बौद्धनाथ स्तूप विश्व के सबसे बड़े स्तूपों में से एक है। यह विश्व धरोहर में शामिल है।स्तूप 36 मीटर ऊंचा है और कला का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस स्तूप के बारे में माना जाता है कि जब इसका निर्माण किया जा रहा था, तब इस क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ा था। इसलिए पानी न मिलने के कारण ओस की बूंदों से इसका निर्माण किया गया।बौधनाथ स्तूप का निर्माण बुद्ध की मृत्यु के बाद किया गया था। बौद्धनाथ की वास्तुकला अद्वितीय है।

स्वयंभुनाथ मंदिर
थमेल से  दुरी - 4 km
भारतीय नागरिकों के लिए एंट्री टिकट :- 30 भारतीय रुपये
स्वयंभुनाथ मंदिर विश्व धरोहर में शामिल है। स्वयंभू विश्‍व के सबसे भव्य बौद्ध स्थलों में से एक है। इसका संबंध काठमांडू घाटी के निर्माण से जोड़ा जाता है। काठमांडू से तीन किलोमीटर पश्चिम में घाटी से 77 मी. की ऊंचाई पर स्थित है स्वयंभू। इसके चारों ओर बनी आंखों के बार में माना जाता है कि ये गौतम बुद्ध की हैं जो चारों दिशाओं में देख रही हैं।कुल 365 सीढिया चढ़कर ऊपर जाना पड़ता है। काठमांडू में स्वायंभुनाथ मंदिर को ’मंकी टेम्पल’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि मंदिर के आसपास कई बंदर हैं।

काठमांडू दरबार स्क्वायर
थमेल से दुरी - 2 km
भारतीय नागरिकों के लिए एंट्री टिकट :- 90 भारतीय रुपये
काठमांडू दरबार स्क्वायर हनुमान ढोका के नाम से भी जाना जाता है। यह देशी विदेशी सैलानियोँ के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है ।दरबार स्क्वायर कभी राजा की ताजपोशी करने वाला स्थान था। मल्ला राजाओं का निवास स्थान रहा यह दरबार अपने काष्ठ मंडपो के लिए मशहूर है । यहाँ पर बहुत सारे काष्ठ मंडप और लकड़ी के मंदिर और महल बनाए गए है। उनके नाम पर ही इस जगह का नाम काठमांडू पड़ गया ।यहाँ पर शिव पार्वती मंदिर,कुमारी महल भी है जहाँ पर जीवित कुमारी देवी रहती है । श्वेत भैरव मंदिर ,कालभैरव मंदिर ,महेन्द्रश्वर मंदिर ,महा विष्णु मंदिर ,जगन्नाथ मंदिर ,कोटिलिंगेश्वर महादेव मंदिर ,म्यूजियम भी है।

पाटन दरबार स्क्वायर
काठमांडू दरबार स्क्वायर से दुरी :- 5km
भारतीय नागरिकों के लिए एंट्री टिकट :- 150 भारतीय रुपये
पाटन काठमांडू घाटी का सबसे पुराना शहर है, जिसमें मंदिरों, महलों और स्मारकों का बेहतरीन संग्रह है।पाटन चार स्तूपों से घिरा हुआ है जो सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए थे। पाटन में कृष्ण मंदिर ,भवानी मंदिर , पाटन के सबसे दिलचस्प आकर्षणों में स्वर्ण मंदिर ,पांच मंजिला कुंभेश्वर मंदिर , और लाल मच्छेंद्रनाथ मंदिर और यहाँ एक संग्रहालय भी है।

भक्तपुर दरबार स्क्वायर
पाटन दरबार स्क्वायर से दुरी :- 12 km
भारतीय नागरिकों के लिए एंट्री टिकट :- 300 भारतीय रुपये

भक्तपुर दरबार स्क्वायर भी यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत घोषित किया जा चूका है। पचपन खिडकियों वाला महल सबसे प्रमुख ईमारत है।भक्तपुर दरबार स्क्वायर मे और भी ढेर सारी इमारतें हैं जिनमे सिद्धि लक्ष्मी मंदिर ,पशुपतिनाथ मंदिर ,वत्सला देवी मंदिर ,केदारनाथ मंदिर ,गोपीनाथ मंदिर , नयातापोला मंदिर शामिल है।

सपनों का बगीचा
थमेल से दुरी - 350 मीटर
भारतीय नागरिकों के लिए एंट्री टिकट :- 125 भारतीय रुपये

गार्डन ऑफ़ ड्रीम्स का निर्माण 1920 में किया गया है ।इसे किशोर नरसिंह द्वारा डिज़ाइन किया गया था और फील्ड मार्शल कैसर समशेर राणा द्वारा बनाया गया था।बगीचे का क्षेत्र कुल 6,895 वर्ग मीटर हैं।इस बगीचे में तीन मंडपों, एक रंगभूमि,तालाब और अनेक प्रकार के सुन्दर सुन्दर फूल ,पेड़ ,पौधे देखने लायक है। 1960 के दशक के मध्य में कैसर समशेर राणा की मृत्यु के बाद यह बगीचे की हालत खस्ता हो गयी थी।लेकिन हाल ही में ऑस्ट्रेलिया सरकार की मद्दत  से इसका पुनर्निर्माण कराया गया है। 

बूढ़ानिलकंठ मंदिर
थमेल से दुरी - 10 km

यह मंदिर शिवपुरी पहाड़ी के निचे स्थित है। आराम की स्थिति में भगवान विष्णु की नक्काशीदार मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।प्रतिमा 5 मीटर ऊंची  एक कुंड में स्थापित है। कुंड 13 मीटर  लंबा है। खुली हवा में स्थित बुधनिलकांठ मंदिर नेपाल का एक वास्तुशिल्प चमत्कार है। प्रतिमा 1000 वर्ष से अधिक पुरानी है। प्रतिमा को काले पत्थर के एक खंड से उकेरा गया है।

दक्षिणकाली मंदिर
थमेल से दुरी - 22 km

दक्षिणकाली मंदिर देवी काली को समर्पित है। दक्षिणकाली मंदिर हिंदुओं के लिए एक पवित्र स्थान है। यहाँ पशुओं की बलि दी जाती है।ये अनुष्ठान आमतौर पर मंगलवार और शनिवार को किए जाते हैं, हालांकि इन अनुष्ठानों का पालन करने का सबसे अच्छा समय दशा महोत्सव है, जो आमतौर पर अक्टूबर में पड़ता है। उत्सव के दौरान, दक्षिणकाली मंदिर को खूबसूरती से सजाया जाता है, हजारों श्रद्धालु उत्सव में शामिल होते हैं।

चांगुनारायण मंदिर
भक्तपुर दरबार स्क्वायरइस से दुरी :- 7 km
यह मंदिर शिवपुरी पहाड़ी पर स्थित है जिसे चंगु या डोलगिरी के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर चंपक वृक्ष के जंगल और एक छोटे से गाँव जिसे चंगु के नाम से जाना जाता है, से घिरा हुआ है।पहाड़ी के बगल में मनहारा नदी बहती है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर को नेपाल के इतिहास का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। कश्मीरी राजा ने अपनी बेटी का विवाह भक्तपुर के राजकुमार चंपक से कराया था। चंगु नारायण मंदिर का नाम उनके नाम पर रखा गया है।इस मंदिर का निर्माण चौथी शताब्दी में किया गया था।  कुछ कारणों से इसे दोबारा 1702 मे भी बनवाया गया। इस मंदिर में शेषनाग के साथ भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित है।  पत्थर से बनी यह मूर्ति शिल्प कला का अद्भुत नमूना है।

चंद्रगिरि हिल
काठमांडू से दुरी :- 15 km
चंद्रगिरी केबल कार टिकट वन साइड :- 415 भारतीय रुपये
चंद्रगिरि हिलटॉप एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, चंद्रगिरि हील्स की ऊंचाई 2500 मीटर है। आप पैदल भी ऊपर जा सकते है या केबल कार से भी जा सकते है।नेपाल में शनिवार छुट्टी का दिन होता है।शनिवार के दिन यहाँ काफी भीड़ होती है। यहाँ पर भालेश्वर महादेव मंदिर भी है। यहाँ रात रुकने के लिए होटल भी है। यहाँ से हिमालयी पर्वतीय क्षेत्रों के पूरे खंड को देखा जा सकता है। बहुत ही खूबसूरत जगह है।पूरी काठमांडू घाटी का दृश्य यहाँ से देखा जा सकता है।

नगरकोट
काठमांडू से दुरी :- 32 km
नगरकोट नेपाल का एक हिल स्टेशन है जो कि 2100 मीटर की उंचाई पर है। इस स्थान का खास महत्व इसलिए है कि यहां से प्रात:काल सूरज निकलने का मनोरम दृश्य देखा जाता है। इसके लिए पर्यटक रात में ही नगरकोट पहुंच जाते हैं। ठहरने के लिए कई होटल आदि हैं।यहाँ से हिमालय के अनेक चोटियों के साथ ही माउंट एवेरेस्ट का बढिया नजारा दिखता है।

काठमांडू घाटी के बाहर के दर्शनीय स्थल

पोखरा और पोखरा के नजदीक के दर्शनीय स्थल

फेवा झील

पोखरा का प्रमुख आकर्षण फेवा झील है।यह नेपाल की सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा देखी जाने वाली झील है।फेवा झील 742 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और लगभग 4.43 किमी के क्षेत्र में फैली हुयी है।बहुत ही खूबसूरत जगह है। झील का पानी एकदम साफ है।अन्नपूर्णा हिमालय की चोटियाँ का प्रतिबिंब दिखलाई पड़ता।फेवा झील के चारों तरफ बिखरी पहाड़ियों में भी छोटे-छोटे झरने बहते रहते हैं।इन झरनों का पानी काफी ठंडा होता है। गर्मियों में ही इसमें नहाया जा सकता है।पर्यटक यहाँ नौका विहार का खूब आनंद उठाते है।


बाराही देवी मंदिर 
बाराही देवी मंदिर  फीवा झील में बीचो-बीच एक छोटे से टापू पर बना हुआ है।यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण देवी दुर्गा के महान भक्त राजा कुलमंदन शाह (कास्की के पहले शाह राजा) ने कराया।यहाँ पर बोट से पहुंचना पड़ता है।बाराही देवी मन्दिर पोखरा का सर्वाधिक प्रसिद्ध हिन्दू मन्दिर है। यह मंदिर पैगोडा शैली में बना है। बाराही देवी मंदिर काफी रमणीक है। यहाँ से चारों ओर झील और हिमालय काफी खूबसूरत दिखलाई पड़ते हैं।

डेविस फॉल
फेवा झील के पास ही डेविस फॉल है। 31 जुलाई 1961 को एक डेविस नाम की स्विस दम्पति यहाँ तैरने गये थे। लेकिन महिला अतिप्रवाह के कारण एक गड्ढे में डूब गई। उसका शव 3 दिन बाद फुसर नदी में बड़ी मेहनत से बरामद हुआ था।तब से यह फॉल डेविस फॉल के नाम से प्रसिद्ध हुवा। इसका नेपाली नाम पटले चांगो है।जुलाई-अगस्त के महीनों में यहाँ पानी इतने तेज रफ्तार से गिरता है कि चारों तरफ पानी का धुंध ही दिखलाई पड़ता है।

गुप्तेश्वर महादेव गुफा

भारतीय नागरिकों के लिए एंट्री टिकट :- 100 भारतीय रुपये
पोखरा में विश्व शांति स्तूप के दूसरी तरफ डेविस फॉल्स के करीब स्थित गुप्तेश्वर महादेव गुफा नेपाल की सबसे प्रसिद्ध गुफा है। यह नेपाल की सबसे लंबी गुफा है। कहा जाता है कि इस गुफा की खोज 16 वीं शताब्दी में हुई थी। मुख्य गुफा में दो कक्ष हैं जिनमें कई मंदिर हैं। इनमें से सबसे बड़ा मंदिर शिव को समर्पित है।निचे गुफा में जाने के लिए कुछ सीढिया उतरकर जाना पड़ता है। गुफा के भीतर भी कुछ सीढिया उतरकर जाना पड़ता है।

विश्व शांति स्तूप
विश्व शांति स्तूप गुप्तेश्वर महादेव से करीब 3 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित है।पोखरा में शांति स्तूप का निर्माण निप्पोनज़ान-मयोजी भिक्षु मोरीओका सोनिन ने स्थानीय समर्थकों के साथ एक बौद्ध भिक्षु और निप्पोनजान-म्योहजी के संस्थापक निचिदत्सु फ़ूजी के मार्गदर्शन में किया था।पैगोडा 115 फीट लंबा और 344 फीट व्यास का है। 100 से ज्यादा सीढिया चढ़कर ऊपर जाना पड़ता है। ये स्थल बहुत शांत व रमणीक स्थल है।

बिन्ध्यवासिनी मन्दिर
पोखरा से दुरी :- 12 km
बिंध्यबासिनी मंदिर नेपाल के पोखरा में बागर के पास स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर का संबंध भारत के उत्तर प्रदेश में बिंध्याचल में विंध्यवासिनी के प्रसिद्ध मंदिर से है। कास्की के राजा सिद्धि नारायण शाह ने नेपाल के एकीकरण से पहले देवीमाता को पोखरा में लाया था। बिंध्यवासिनी मंदिर कुछ उचाई पर होने के कारन सीढिया चढ़कर ऊपर जाना पड़ता है। यह मंदिर देवी दुर्गा माता को समर्पित है। यहाँ गार्डन भी बनाया गया है। यह बहुत ही खूबसूरत जगह।

सारंगकोट
पोखरा से दुरी :- 7 km
सारंगकोट 5500 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित यह एक बहुत ही रमणीय स्थल है। जीप या माइक्रोबस ऊपर टॉप तक नहीं जाती है। कुछ चढ़ाईकर ऊपर जाना पड़ता है। यहाँ पर सूर्योदय का दृश्य देखने लोग आते है।यहाँ से हिमालय के धौलागिरी और अन्नपूर्णा की श्रृंखला देखी जा सकती है।यहाँ से सूर्योदय का दृश्य काफी सुन्दर दिखता है। जैसे-जैसे सूर्य की किरणें फैलती हैं, उसी के अनुसार पर्वतों का रंग बदलता रहता है।यहाँ पर पैराग्लाइडिंग की जाती है।

मनकामना मन्दिर
काठमांडू से दुरी :- 140 km
केबल कार टिकट वन साइड :- 300 भारतीय रुपये
नेपाल के गोरखा जिले में स्थित मनकामना मंदिर देवी भगवती का पवित्र स्थान है, जो पार्वती का अवतार है।काठमांडू से पोखरा जाते वक्त बिच रस्ते में काठमांडू से 140 km की दुरी पर मनकामना मंदिर पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर 1302 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ की चोटी पर स्थित है। ऊपर पहाड़ी पर आप पैदल भी चढ़ाई कर जा सकते है। पैदल जाने में 3 से 4 घंटे का समय लता है। केबल कार से भी जा सकते है। केबल कार से पहुंचने में लगभग 10 मिनट लगते हैं।केबल कार का टिकट one साइड 300 भारतीय रुपये है। केबल कार आमतौर पर दिन के समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच चलती है। नेपाल का प्रसिद्ध मंदिर होने के कारन यहाँ हमेशा काफी भीड़ होती है। यह माना जाता है कि देवी मनकामना उन लोगों की इच्छाओं को पूरा करती हैं जो उनकी पूजा शुद्ध मन से करते हैं।

नेपाल के अन्य मुख्य दर्शनीय स्थल
देवघाट धाम
पोखरा से देवघाट धाम 107 km की दुरी पर स्थित है।देवघाट का यह पवित्र स्थान मुख्य भुटवाल- काठमांडू मार्ग के पास में स्थित है। देवघाट धाम भी नेपाल का प्रमुख पर्यटन स्थल है।  देवघाट धाम काली गंडकी और त्रिशूली नदियों के संगम पर स्थित है।  मकर सक्रांति के दौरान संगम पर डुबकी लगाने श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां आते हैं।यहाँ पर महर्षि वेद व्यास गुफा ,सिद्धेश्वर महादेव मंदिर ,श्री जालपा देवी मंदिर ,सीता गुफा ,मुकुन्देश्वर गुफा और भी घूमने लायक कई ऐतिहासिक स्थल भी हैं. अनेक देवी देवता के मंदिर और गुफा है।

देवघाट वह स्थान है जहाँ मुक्तिनाथ से पवित्र नदी गंडकी, गोसाई कुंड से बहकर पवित्र नदी त्रिशूली से मिलती है। यहाँ से गंडकी नदी आगे चलकर बिहार राज्य से होकर भारत में बहती है और पटना में गंगा में मिल जाती है। देवघाट के किनारे पर ऋषि वसिष्ठ मुनि का आश्रम था और जहाँ उन्होंने तपस्या की थी। भगवान राम और उनके भाइयों को उनके बचपन के दौरान राजा दशरथ ने वसिष्ठ मुनि के गुरुकुल में भेजा था। देवघाट वह स्थान है जहाँ भगवान ब्रह्मा ने अपना पहला यज्ञ यहाँ किया था और उसके बाद इस स्थान को पुराणों में आदि प्रयाग भी कहा जाता है। जैसा कि वशिष्ठ मुनि ने यहाँ ध्यान किया था, इसलिए आप यहाँ की गुफा भी देख सकते हैं जिसे वाशिष्ठ गुफ़ा के नाम से जाना जाता है।

मुक्तिनाथ
पोखरा से दुरी :- 180km 
मुक्तिनाथ हिंदू और बौद्ध दोनों का पवित्र स्थान है जो 3710 मीटर की ऊँचाई पर हिमालय में स्थित है।मुक्तिनाथ मंदिर दुनिया के सबसे पुराने विष्णु मंदिरों में से एक है।यहां भगवान विष्णु की पूजा शालिग्राम के रूप में होती है। इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता जोखिम भरा और खतरनाक है।मुक्तिनाथ मंदिर में 108 पवित्र तीर्थ के नल हैं जहाँ पानी 24 घंटे बहता है और यहाँ सभी 108 नलों में स्नान करने की परंपरा है।

चितवन राष्ट्रीय उद्यान
रक्सौल बॉर्डर से दुरी :- 130 km
भारतीय नागरिकों के लिए एंट्री टिकट :- 500 भारतीय रुपये

चितवन राष्ट्रीय उद्यान नेपाल का पहला राष्ट्रीय उद्यान है। इसे 1973 में स्थापित किया गया था और 1984 में इसे विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था। यह 952.63 किमी के क्षेत्र में फैला हुवा है और यह नवलपुर, परसा जिलों में दक्षिण-मध्य नेपाल के उपोष्णकटिबंधीय भीतरी तराई क्षेत्रों में स्थित है। ।यहाँ जीप या हाथी पर बैठकर जंगल सफारी कर सकते है। आपको यहाँ कई जानवर दिखाई देंगे जिनमें शेर ,हाथी, सींग वाले गैंडे , हिरण, बंदर, जंगली सूअर, हाइना, घड़ियाल मगरमच्छ और पक्षी की 450 से अधिक प्रजातिया देखने को मिलती है।

लुंबिनी
सोनौली बॉर्डर से दुरी :- 30 km

गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी दुनिया भर के बौद्ध अनुयायियों का तीर्थस्थल है।  सम्राट अशोक के स्मारक स्तंभ के लिए जाने जाना वाला यह स्थल यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में भी शामिल है। सम्राट अशोक ने इसे अपनी नेपाल यात्रा की स्मृति में बनावाया था। यहां का प्रमुख आकर्षण 8 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ बाग है।  इसके अलावा गौतमबुद्ध की माँ मायादेवी मंदिर भी तीर्थयात्रियों के बीच खासा लोकप्रिय है।  इसमें गौतम बुद्ध की मां मायादेवी की मूर्ति है। लुम्बिनी में कई पुराने मंदिर हैं, जिनमें मायादेवी मंदिर, और विभिन्न देशों के बौद्ध संगठनों द्वारा निर्मित विभिन्न नए मंदिर है। कई स्मारक, मठ और एक संग्रहालय, और लुम्बिनी अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान भी पवित्र स्थल के भीतर हैं। इसके अलावा, पवित्र तालाब भी है, जहां बुद्ध की मां ने उनके जन्म से पहले अनुष्ठान किया था और जहां उन्होंने अपना पहला स्नान किया था।

जनकपुर
जयनगर बिहार से दुरी :- 35 km

यह शहर काठमांडू के दक्षिण-पूर्व में 123 किमी की दूरी पर स्थित है। इस शहर को जनकपुरधाम के नाम से भी जाना जाता है, जिसकी स्थापना 18 वीं शताब्दी की शुरुआत में हुई थी।जनकपुर में स्थित जानकी मंदिर ऐतिहासिक स्थल है।यह मंदिर, नेपाल के सबसे बड़े मंदिरों में से एक, 1898 में टीकमगढ़ की रानी ब्रिसभानु कुँवारी द्वारा बनवाया गया था। निर्माण की लागत के बाद इसे "नौलखा मंदिर" भी कहा जाता है, जिसेके निर्माण में नौ लाख रुपये खर्च हुये थे।यह शहर भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है। भगवान श्रीराम से विवाह के पहले सीता माता ने ज़्यादातर समय यहीं व्यतीत किया था। यह मंदिर देवी सीता को समर्पित है।यहाँ एक विवाह मंडप है जिसमे में विवाह पंचमी के दिन पूरी रीति-रिवाज से राम-जानकी का विवाह किया जाता है।जनकपुरी से १४ किलोमीटर 'उत्तर धनुषा' नामक स्थान है। बताया जाता है कि रामचंद्र जी ने इसी जगह पर धनुष तोड़ा था।जनकपुर में सबसे पुराना मंदिर श्री राम मंदिर है, जिसे गोरखाली जनरल अमर सिंह थापा ने बनवाया था। जनकपुर में 200 से अधिक पवित्र तालाब भी है। दो सबसे महत्वपूर्ण तालाब - धनुष सागर और गंगा सागर, शहर के मध्य में स्थित हैं।


























No comments:

Post a Comment

Thank you for comment