Tuesday, February 5, 2019

Omkareshwar Jyotirlinga Complete Travel Guide in Hindi

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। यह नर्मदा नदी के तट पर मन्धाता नामक द्वीप पर स्थित है। यहां पर नर्मदा नदी ॐ के आकार में बहती है। इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है।यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगओं में से एक है और चौथे स्थान पर है। ओंकारेश्वर अन्य द्वादश ज्योतिर्लिंगों से अलग है क्योंकि यहां भगवान शिवजी दो रूपों में विराजमान हैं एक ओंकारेश्वर और दूसरे ममलेश्वर। दो रूपों में स्थित होने पर भी ज्योतिर्लिंगों की गणना में यह ज्योतिर्लिंग एक ही गिना जाता है।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व
शास्रो के अनुसार कोई भी तीर्थयात्री देश के सभी तीर्थ की यात्रा कर ले किन्तु जब तक वह ओंकारेश्वर आकर किए गए तीर्थों का जल ओंकारेश्वर भगवान पर नहीं चढ़ाता उसके सारे तीर्थयात्रा अधूरे माने जाते हैं।

नर्मदाजी का महत्त्व
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ नर्मदाजी का भी विशेष महत्व है।शास्त्र मान्यता के अनुसार जमुनाजी में पंद्रह दिन स्नान और गंगाजी में सात दिन का स्नान करने से जो पुण्यफल प्राप्त होता है उतना ही पुण्यफल नर्मदाजी में एक बार स्नान करने से प्राप्त हो जाता है।

ओंकारेश्वर कैसे जाये
सड़क मार्ग
ओंकारेश्वर जाने के लिए खंडवा और इंदौर से मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (एमपीआरटीसी) और कुछ निजी यात्रा कंपनी के बस सेवा उपलब्ध है।

ओंकारेश्वर से कुछ प्रमुख शहरों से दुरी -
ओंकारेश्वर खंडवा से 73 किलोमीटर, इंदौर से 80 किलोमीटर, देवास से 114 किलोमीटर, उज्जैन से 133 किलोमीटर, भोपाल से 268 किलोमीटर, विदिशा से 334 किलोमीटर, वडोदरा से 376 किलोमीटर, नागपुर से 446 किलोमीटर, 576 किलोमीटर दूर है। पुणे, मुंबई से 576 किलोमीटर। 
रेलवे मार्ग
ओंकारेश्वर रेलवे मार्ग से पहुंचने के लिए खंडवा एंव इंदौर पहुंचना पड़ता है। इंदौर और खंडवा भारत के सभी प्रमुख शहरों से रेल सेवा द्वारा जुड़ा हुआ है। जैसे नई दिल्ली, बैंगलोर, मैसूर, लखनऊ, चेन्नई, कन्याकुमारी, पुरी, अहमदाबाद, जयपुर और रतलाम इत्यादि।
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा इंदौर है, जो ओंकारेश्वर से लगभग 84 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। वाराणसी, दिल्ली, लखनऊ, काठमांडू, भोपाल, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों से एयर इंडिया, जेट एयरवेज, इंडिगो, स्पाइस जेट की नियमित उड़ाने उपलब्ध है।

श्री ओंकारेश्वर मंदिर कार्यक्रम
मंदिर खुलने का समय:
प्रातः काल ५ बजे - मंगला आरती एवं नैवेध्य भोग
प्रातः कल ५:३० बजे – दर्शन प्रारंभ
मध्यान्ह कालीन भोग:
दोपहर १२:२० से १:१० बजे – मध्यान्ह भोग (दर्शन बंद)
दोपहर १:१५ बजे से – पुनः दर्शन प्रारंभ
सायंकालीन दर्शन:
दोपहर ४ बजे से – भगवान् के दर्शन 
(जल और बिल्ब पत्र चार बजे के बाद चढ़ा नहीं सकते )
शयन आरती:
रात्रि ८:३० से ९:०० बजे – शयन आरती
रात्रि ९:०० से ९:३५ बजे – भगवान् के शयन दर्शन 

ऑनलाइन शीघ्र दर्शन (VIP) टिकट मूल्य :- ५००/-
ऑनलाइन VIP टिकट बुक करने के लिए मंदिर ट्रस्ट की वेबसाइट लिंक :
http://shriomkareshwar.org/HOnlineticketbooking.aspx

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग अभिषेक

मुख्य गर्भगृह में शिवलिंग अभिषेक प्रतिबंधित है।मंदिर प्रांगण में “अभिषेक हॉल” बनाया गया है, जहाँ पर पुजारियों द्वारा अभिषेक संपन्न करवाया जाता है। अभिषेक के लिए मंदिर ट्रस्ट कार्यालय में संपर्क करे अथवा अभिषेक का टिकट ऑनलाइन भी बुक कर सकते है।

ओंकारेश्वर के दर्शनीय स्थल 
ओंकारेश्वर मांधाता पर्वत परिक्रमा 

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पौराणिक कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार नारद ऋषि विन्ध्य पर्वत से मिलने पहुंचे। विन्ध्य पर्वत नारदजी से अहंकार भरी बातें करने लगा।मै सर्वगुण सम्पन्न हूं, मेरे पास हर प्रकार की सम्पदा है, मुझ में कोई कमी नहीं है। नारदजी को विन्ध्य पर्वत का बर्ताव ठीक नहीं लगा। तभी नारदजी ने विन्ध्याचल को सुनाया तुम्हारे पास सब कुछ है, किन्तु मेरू पर्वत इतने तुम ऊंचा नहीं हो।तुमसे मेरु पर्वत कई गुना ऊँचा है। नारदजी की बात सुनकर विन्ध्य पर्वत को काफी दुख हुआ और मेरु पर्वत की ऊँचाई से उसे जलन होने लगी।उसने उसी समय निर्णय लिया वह भगवान शंकर जी की शरण में जायेगा और शिवजी की तपस्या करेगा जहां पर साक्षात ओंकार विद्यमान हैं। उसने एक मिट्टी का शिवलिंग बनाया और भगवान शिव की कठोर तपस्या करने लगा। कई वर्षो की कठोर तपस्या के बाद भगवान शिवजी उसे प्रसन्न हो गये। शिवजी ने विन्ध्य को अपने दिव्य स्वरूप का दुर्लभ दर्शन दिया।भगवान शिव ने विन्ध्य को कोई भी कार्य को सिद्ध करने वाली अभीष्ट बुद्धि प्रदान की और विन्ध्य जिस प्रकार का कार्य करना चाहे, वैसा कार्य करने का वर विन्ध्य को दिया।उसी क्षण देवतागण तथा कुछ ऋषिमुनि भी वहाँ आ गये।उन्होंने भी शिवजी की विधिवत पूजा की और उनसे अनुरोध किया - हे भोलेनाथ आप हमेशा के लिए यहां स्थापित होकर निवास करें।भगवान शिवजी ने उन देवताओं तथा ऋषियों की बात को स्वीकार कर लिया। वहाँ स्थित ज्योतिर्लिंग दो स्वरूपों में विभक्त हो गया। एक प्रणव के अन्तर्गत शिवलिंग ओंकारेश्वर और दूसरा पार्थिव लिंग ममलेश्वर एंव अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से विख्यात हुए।




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