Wednesday, January 9, 2019

Trimbakeshwar Complete Travel Guide In Hindi

त्र्यंबकेश्वर कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग
त्र्यंबकेश्वर का निकटतम हवाई अड्डा महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में स्थित है। त्र्यंबकेश्वर से लगभग 200 किमी दूर है।नाशिक के नजदीक ओजर एयरपोर्ट बना है। यहाँ से मुंबई और पूना के लिए हवाई सेवा उपलब्ध रहती है। लेकिन हवाई कंपनी द्वारा निरंतर सेवा दी नहीं जाती।
रेल मार्ग
त्र्यंबकेश्वर का नजदीकी रेलवे स्टेशन नासिक रोड है।नासिक देश के अन्य हिस्सों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। मुंबई जाने वाली सभी ट्रेने नासिक रोड रेलवे स्टेशन से गुजरती है।
सड़क मार्ग
त्र्यंबकेश्वर नासिक से ३० किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।मुंबई,पूना, औरंगाबाद जैसे महाराष्ट्र की बड़े शहरों से निजी ट्रेवल कंपनी द्वारा बस सेवा उपलब्ध है।महाराष्ट्र के सभी जिलों और कस्बेा से महाराष्ट्र सरकार की बसे त्र्यंबकेश्वर के लिए चलती है।


नासिक से त्र्यंबकेश्वर कैसे जाये -
निजी वाहन - अगर आप किराये के कार से जाना चाहते है। नासिक रोड रेलवे स्टेशन के बाहर से ही कार किराये पर मिल जाएगी।
सरकारी बस - नासिक सेंट्रल बस स्टैंड के नजदीक मेला बस स्टैंड है। वहासे त्र्यंबकेश्वर के लिए नियमित अंतराल से बसे चलती है।

त्र्यंबकेश्वर यात्रा के लिए कितने दिन लगते है
सिर्फ त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन - १ दिन में वापसी
त्र्यंबकेश्वर के नजदीकी दर्शनीय स्थल को भेट देना - २ दिन
त्र्यंबकेश्वर और नासिक के दर्शनीय स्थल को भेट देना - ४ दिन

त्र्यंबकेश्वर में कौनसे महीने में जाये - 
किसी भी माह में जा सकते है।बारिश के मौसम में कभी कभार भारी बारिश होती है।

त्र्यंबकेश्वर में कहाँ रुके
त्र्यंबकेश्वर में भक्त निवास,धर्मशाला में 250 से 800 तक रूम किराये पर मिल जाती है।
त्र्यंबकेश्वर भक्त निवास ,धर्मशाला ,आश्रम नाम और पता

मंदिर का निर्माण

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का पुनः निर्माण तीसरे पेशवा नानासाहेब पेशवा ने करवाया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार सन 1755 में शुरू हुआ था और काम का अंत 1786 में पूर्ण हुआ।इस भव्य मंदिर का निर्माण कार्य में लगभग 16 लाख रुपए का खर्च आया था, जो की उस समय काफी बड़ी धन राशि मानी जाती थी।


त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार एक बार महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्याबाई का तपोवन में निवास करने वाले ब्राह्मण की पत्नियां से किसी बात पर तना तनी हो जाती है और ब्राह्मण की पत्निया अहिल्याबाई से नाराज हो जाती है। उन सभी पत्नियों ने अपने पतियो के कान भर दिये और गौतम ऋषि का अपमान करने के लिए उनको उकसाया।ब्राह्मणों ने गौतम ऋषि को सबक सिखाने के लिए श्रीगणेशजी की आराधना की ब्राह्मणों की आराधना से प्रसन्न होकर भगवान गणेशजी ने ब्राह्मणों को वर मांगने को कहा।ब्राह्मणों ने कहा प्रभु गौतम ऋषिको इस आश्रम से निष्कासित कीजिये।भगवान गणेश जी को विवश होकर अपने भक्तो की बात माननी पड़ी।

गणेश जी ने एक गरीब गाय का रूप धारण कर लिया और ऋषि गौतम के खेत में जाकर फसल खाने लगे। गाय को फसल खाते देख गौतम ऋषि ने हाथ में डंडा उठाया और गाय को वहां से भगाने लगे।गौतम ऋषि के डंडे का स्पर्श होते हैं गाय खेत में ही मृत हो गयी।उसी समय सभी ब्राह्मण बहा एकत्र होगये और ऋषि गौतम पर गो हत्या का पाप लगा दिया।और उनको भला बुरा कहने लगे। गौतम ऋषि इस घटना से बहुत निराश और दुःखी हुये। सभी ब्राह्मणों ने गौतम ऋषि को कहा तुम्हें यह आश्रम छोड़कर दूसरे स्थान पर कही दूर चले जाना चाहिए। गो-हत्यारे के साथ रहने से हमें भी पाप लगेगा।

गौतम ऋषि विवश होकर अपनी पत्नी अहिल्या के साथ वहाँ से कोसो दूर जाकर रहने लगे।ब्राह्मणों ने वहाँ भी उनका पीछा किया और उनका जीना मुश्किल कर दिया। ब्राह्मणों ने उनसे कहा गो-हत्या का पाप लगने से तुम अब वेद-पाठ और यज्ञादि के कार्य करने का अधिकार खो चुके हो।अत्यंत विनम्रता से ऋषि गौतम ने उन ब्राह्मणों से प्रार्थना की आप लोग ही गोहत्या के पाप से मुक्त होने का मार्ग दिखाये। 


ब्राह्मणों ने कहा गौतम तुम तीन बार पृथ्वी की परिक्रमा करो और जहा भी जाओ अपने गोहत्या के पाप की चर्चा करो फिर लौटकर यहां 1 महीने तक तप करो। तप के बाद ब्रम्हगिरी का 101 बार परिक्रमा करो तभी तुम गोहत्या के पापा से मुक्ति मिलेगी।अथवा गंगा जी को यहाँ लाकर उनके जल से स्नान करके एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग से भगवान शिवजी की आराधना करो।आराधना के बाद फिर से गंगा जी में स्नान करके इस ब्रह्मगिरी पर्वत की 11 बार परिक्रमा करो।उसके बाद 100 घरों के पवित्र जल से पार्थिव शिवलिंग के ऊपर जलाभिषेक करने से गोहत्या के पाप से तुम्हे मुक्ति मिलेगी और तुम्हारा उद्धार होगा।



ब्राह्मणों की सलाह मानकर गौतम ऋषि ने सारे विधि पूरे करके पत्नी के साथ पूर्णता भगवान शिव की आराधना में खोगये। गौतम ऋषि की भक्ति देखकर शिवजी प्रसन्न होगये और उनको वर मांगने को कहा। महर्षि गौतम ने कहा हे भोलेनाथ मुझे गौ हत्या के पाप से मुक्त कर दीजिए।शिवजी ने कहा गौतम तुम निरपराध हो।गौ हत्या का पाप तुम पर एक साजिश के तहत लगाया गया था।तुम पर झूठा आरोप लगाने वाले तुम्हारे आश्रम के ब्राह्मणों को मैं दंडित करना चाहता हूं। इस पर गौतम ऋषि ने कहा हे भगवान उन्हें क्षमा कर दे उन्हीं के कारन मुझे आपके दर्शन प्राप्त हुए हैं। आप मुझ पर दया करे और सदा के लिए यही  पर निवास करे।भगवान शिव ने गौतम ऋषि की बात मानकर वहां त्रंबक ज्योतिर्लिंग के रूप मे स्थापित हो गए।

 त्रंबकेश्वर youtube Video 

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