Thursday, November 22, 2018

Varanasi (Banaras / kashi) complete travel guide in hindi

वाराणसी कैसे  पहुंचे 
रेल मार्ग द्वारा
वाराणसी में तीन रेलवे स्टेशन हैं।

वाराणसी जंक्शन :- वाराणसी रेलवे जंक्शन को आमतौर पर वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन के नाम से जाना जाता है। इस स्टेशन से रोजाना 1.5 लाख से अधिक यात्रियों और रोजाना 240 से अधिक ट्रेनों की आवा - जाहि होती है।
मुगल सराई जंक्शन :- जो वाराणसी से करीब 8 किलोमीटर दूर है। इस रेलवे स्टेशन से  विशेष रूप से पूर्वी भारत के लिए कई ट्रेनें चलती है।
मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन :- वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से करीब 4 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। यह स्टेशन उत्तर पूर्वी रेलवे की ट्रेनों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है।
राजधानी एक्सप्रेस, शिवगंगा एक्सप्रेस, लोकमान्य  तिलक वाराणसी एक्सप्रेस, विभूति एक्सप्रेस, हावड़ा जोधपुर एक्सप्रेस, गंगा कावेरी एक्सप्रेस, संगमित्र एक्सप्रेस, सिकंदराबाद पटना एक्सप्रेस और मारुधर एक्सप्रेस कुछ प्रमुख ट्रेनें हैं जो भारत भर से वाराणसी जाते हैं।

सड़क मार्ग द्वारा
वाराणसी इलाहाबाद, लखनऊ, पटना, गोरखपुर और रांची जैसे शहरों के साथ सड़क से जुड़ा हुवा है। । लखनऊ से वाराणसी तक कई आरामदायक वातानुकूलित लक्जरी बसे चलती है। कई राज्यों की सरकारी बस और निजी बस सेवाये उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, एनएच 2 और एनएच 28 से वाराणसी पहुंच सकते है। लखनऊ से वाराणसी पहुंचने में 6 से 7 घंटे का समय लगता।

हवाई मार्ग द्वारा
लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा वाराणसी शहर से २६ किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। मुंबई और दिल्ली जैसे कुछ प्रमुख भारतीय शहरों से जुड़ा हुआ है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी घरेलू एयरलाइंस दिल्ली, खजुराहो, बैंगलोर, मुंबई और गोवा से नियमित उड़ानें संचालित करती हैं। काठमांडू के लिए भी उड़ानें उपलब्ध हैं। वाराणसी शहर पहुंचने के लिए प्रीपेड टैक्सी किराए पर मिल जाती है।

वाराणसी में कितने दिन रुके :- ३ दिन

काशी विश्वनाथ मंदिर शीघ्र दर्शन (VIP) टिकट मूल्य :- रु.300/-

ऑनलाइन VIP दर्शन और आरती पूजा टिकट बुकिंग के लिए वेबसाइट लिंक :- https://www.shrikashivishwanath.org

VIP दर्शन की विशेष व्यवस्था

ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले श्रद्धालुओं को आम श्रद्धालु से अलग नीलकंठ द्वार गेट नंबर तीन से प्रवेश दिया जाता है । मंदिर में बनाए गए हेल्प डेस्क् पर तैनात मंदिर प्रशासन के कर्मचारी ऑनलाइन बुकिंग टिकट दिखाने पर क्यूरआर कोड को स्कैनर से चेक करेंगे। चेकिंग के बाद दर्शनार्थी को एक पंडित मंदिर के उत्तरी गेट से गर्भगृह में प्रवेश कराके दर्शन-पूजन कराएगा। दर्शन,पूजा के बाद पश्चिमी गेट से दर्शनार्थी को बाहर निकाला जाएगा।

काशी में निम्न सावधानी बरते

  • विश्वनाथ गल्ली में प्रसाद की दुकान से प्रसाद खरीद ते वक्त प्रसाद का दाम पहले ही तय कर ले।प्रसाद,पूजा सामग्री लेने के बाद अच्छे से चेक कर ले। 
  • नकली पंडित से सावधान रहे। शीघ्र दर्शन कराने जैसा झांसा देने वाले से सावधान रहे। विश्वनाथ मंदिर में सिक्यूरिटी बहुत टाइट रहती है। कोई बिच में प्रवेश नहीं कर सकता। 
  • जेब कतरो से सावधान रहे। 
  • पैदल चलते समय सांडो से बचे। 
  • गंगा घाटों पर साधु ,बाबा के चक्कर में न पड़े। 
वाराणसी में कहा रुके :-
अस्सी घाट के नजदीक बहुत सारे निजी  होटल  और धर्मशाल ,आश्रम है।गंगा घाटों पर भी होटल बने है। साथ में बुजुर्ग या चलने में असहाय व्यक्ति है तो विश्वनाथ मंदिर के नजदीक भी होटल और गेस्ट हॉउस बने है। रेलवे के रिटायरिंग रूम में AC और NonAc डोरमेटरी रूम भी उपलब्ध है।

वाराणसी शहर के बारे में

वाराणसी को बनारस और काशी भी कहते है।इसे हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पवित्र शहर में से एक माना जाता है। इसके अलावा बौद्ध एवं जैन धर्म में भी इसे पवित्र माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, काशी नगर की स्थापना भगवान शिवजी ने लगभग ५००० वर्ष पूर्व की थी। अविमुक्त क्षेत्र यानि शिव के त्रिशूल पर बसी है काशी नगरी जहां कभी प्रलय नहीं आ सकता। एक मान्यता अनुसार यहां बहने वाली पवित्र गंगा नदी में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते है।
भारत के अनेक प्रतिभाशाली कवि, लेखक, संगीत सम्राट कहे जाने वाले लोगो ने काशी में निवास किया है। संत कबीर, वल्लभाचार्य, रविदास, स्वामी रामानंद, त्रैलंग स्वामी, शिवानन्द गोस्वामी, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पंडित रवि शंकर, गिरिजा देवी, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खां इत्यादि लोग इस पवित्र स्थान पर रहे है। हिन्दू धर्म का परम-पूज्य ग्रंथ रामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास जी ने काशी में ही लिखा था और गौतम बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन सारनाथ में दिया था।

काशी विश्वनाथ मंदिर

जिसे स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है, इस मंदिर की काशी में सर्वोच्च महिमा है, क्योंकि यहां विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग स्थापित है।काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।सन 1669 में औरंगजेब ने इस मंदिर को तुड़वा दिया था।इसके अधिकांश भाग को एक मस्जिद में बदल दिया।सन १७८० में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा इसका पुनर्निमाण किया गया था। सन १८३९ में पंजाब के शासक महाराजा रणजीत सिंहजी ने इस मंदिर के दोनों शिखरों को १००० किलोग्राम सोने से मढ़वाया था।



काशी में मोक्ष की प्राप्ति 
इन्सान हो या कोई प्राणी काशी में प्राणत्याग करने से उसे मुक्ति मिल जाती है। भगवान शिव मरते हुए प्राणी के कान में तारक-मंत्र का उपदेश करते हैं, जिससे उसे मोक्ष मिल जाता है।

क्या आप आपके किसी परिजनों को काशी में मोक्ष देना चाहते है.

काशी में काशी लाभ मुक्ति भवन नाम की संस्था है। 1958 में डालमिया चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इसकी शुरुवात की गयी थी। इस संस्था में आखरी घडी गिन रहे लोगो को प्रवेश दिया जाता है। जिन लोगी की इच्छा होती है उनकी मृत्य काशी में हो और उनका अंतिम संस्कार काशी में हो उन लोगो को 15 दिन तक मुक्त में रहने की अनुमति होती है। उनके कोई भी एक परिजन को भी मुक्त में रहने दिया जाता है। मुक्ति भवन अंतिम संस्कार करने में भी मदत करता है। इस संस्था में १५ हजार से ज्यादा लोगो को मोक्ष मिल चूका है। अगर 15 दिन के भीतर उनकी मृत्य नहीं हुयी तो उनको मुक्ति भवन को छोड़ना पड़ता है।
काशी लाभ मुक्ति भवन का पता -गीता मंदिर रोड के पास, गिरजा घर रोड, मिशीर पोखरा, वाराणसी, उत्तर प्रदेश 221001
वाराणसी धर्मशाला और आश्रम 
वाराणसी गंगाघाट 
वाराणसी यात्रा का youtube video 

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