Thursday, November 22, 2018

वाराणसी के प्रमुख गंगा घाट


वाराणसी में लगभग ८४ घाट हैं। ये घाट लगभग ६.५ किमी लं‍बे तट पर बने हुए हैं। इन ८४ घाटों में पांच घाट बहुत ही पवित्र माने जाते हैं। इन्हें 'पंचतीर्थी' कहा जाता है। पांच घाट इस प्रकार है, अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, आदिकेशव घाट, पंचगंगा घाट तथा मणिकर्णिक घाट। अस्सी ‍घाट सबसे दक्षिण में स्थित है जबकि आदिकेशव घाट सबसे उत्तर में स्थित हैं।
अस्सी घाट
इस घाट पर अस्सी नदी गंगा से मिलती है। यहाँ अस्सी नदी का गंगा के साथ संगम होने के कारन इस घाट का नामकरण अस्सी हुआ है। एक पौराणिक कथा अनुसार दुर्गा माता ने शुम्भा राक्षस का वध करने के बाद दुर्गा माता ने दुर्गाकुंड के तट पर विश्राम किया था ओर यहीं अपनी असि (तलवार) छोड़ दी थी जिस के गिरने से असी नदी उत्पन्न हुई। यहां प्रत्येक सुबह और शाम 7 बजे गंगा आरती का आयोजन किया जाता है। कई श्रद्धालु गंगा  आरती को इसे देखने के लिए इस घाट पर आते हैं।आरती के बाद सुबह ए बनारस के मंच पर सांस्कृतिक एंव शास्रीय संगीत ,नृत्य का आयोजन किया जाता है।

दशाश्वमेध घाट
सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण घाटों में एक दशाश्वमेध घाट वाराणसी के सबसे ओजस्वी घाटों में से एक है। इस घाट को लेकर दो हिंदु पौराणिक कथाएं प्रचलित है, ब्रह्माजी ने काशी में आकर यहीं दस अश्वमेध यज्ञ किए थे। दूसरी एक पौराणिक अनुसार यहां यज्ञ के दौरान 10 घोड़ों की बलि दी गई थी। संध्याकाल में गंगा आरती का दृश्य देखने लायक होता है। दशाश्वमेध घाट में डुबकी लगाने से पापों से मुक्ति तो मिलती ही है साथ में दस अश्वमेध यज्ञ के पुण्य की प्राप्ति भी होती है।इस घाट का निर्माण 1735 में बाजीराव पेशवा ने कराया था।

आदिकेशव घाट
एक पौराणिक कथा अनुसार भगवान विष्णु शिवजी से मिलने सर्वप्रथम जब काशी में आये थे तो वह इसी घाट पर पधारे थे। भगवान विष्णु ने स्वंय की प्रतिमा इस घाट पर स्थापित कर दी थी। आज भी वह प्रतिमा आदिकेशव मंदिर में स्थापित है। जिसके कारन ही इस घाट का नाम आदिकेशव घाट पड़ा। गंगा एंव वरुणा नदी के संगम स्थल पर स्थित होने के कारन इसे गंगावारुणा संगम घाट भी कहा जाता है। इस घाट पर ज्ञान केशव ,संगमेश्वर शिव,चिन्ताहरण गणेश ,मंदिर स्थापित है। बंगाल की महारानी भवानी ने इस घाट का प्रथम अठ्ठारहवी शताब्दी में निर्माण कराया था। कुछ सालो के बाद यह घाट क्षतिग्रस्त हो गया जिसका पुनः निर्माण ग्वालियर के राजा दिवान नरसिंह राव शितोले ने करवाया था।

पंचगंगा घाट
एक मान्यता के अनुसार इस घाट पर गंगा में अदृश्य रूप से यमुना, स्वरस्वती ,किरणा और  धूतपापा नदियों का संगम होता है। पाँचो नदियों का संगम होने के कारण इसे पंचगंगा घाट कहते है। इन पांच नदियों में से केवल गंगा को देखा जा सकता है, बाकी चार नदियां दिखाई नहीं देती वह धरती में समा गई है। इस घाट को वाराणसी के सबसे पवित्र घाटों में से एक माना जाता है।प्राचीन काल में यहाँ भगवान विष्णु का मंदिर स्थापित था। इस मंदिर को सत्रहवीं सदी में औरंगजेब द्वारा नष्ट कर दिया गया था और मंदिर के स्थान पर आलमगीर मस्जिद का निर्माण करवा दिया था। इसी पंचगंगा घाट पर अनेक वैष्णव संतों ने निवास किया, जगदगुरु रामानन्द जी, श्री वल्लभाचार्य जी, संत एकनाथ, समर्थगुरु रामदास, महात्मा तैलंगस्वामी इत्यादि ने यहीं निवास किया था। इस घाट पर स्नान करना सर्वाधिक पुण्यकारी माना जाता है। 

मणिकर्णिंका घाट
मणिकर्णिका घाट वाराणसी में गंगानदी के तट पर स्थित एक प्रसिद्ध घाट है। एक पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती जी का कर्ण फूल यहाँ एक कुंड में गिर गया था, जिसे ढूढने का काम भगवान शंकर जी द्वारा किया गया, जिस कारण इस स्थान का नाम मणिकर्णिका पड़ गया।जिसकी मृत्यु काशी में होगी वह जन्म और मृत्यु के अंतहीन चक्र से मुक्त हो जाएगा और उसकी आत्मा भी मुक्त हो जाएगी।मणिकर्णिका घाट को स्वर्ग का द्वार कहते है।माना जाता है इस घाट पर स्वयं भगवान शंकर मरने वाले के कान में तारक मंत्र का उपदेश करते हैं।जिससे चिता पर लेटने वाले को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है।मणिकर्णिका घाट भारत का एक मात्र ऐसा घाट है जहाँ दिन रात यानि 24 घंटे शवों का दाह संस्कार किया जाता है। 

वाराणसी के गंगा घाट 
अस्सी घाट
गंगामहल घाट
रीवां घाट

तुलसी घाट
भदैनी घाट
जानकी घाट
माता आनंदमयी घाट
जैन घाट
पंचकोट घाट
प्रभु घाट
चेतसिंह घाट
अखाड़ा घाट
निरंजनी घाट
निर्वाणी घाट
शिवाला घाट
गुलरिया घाट
दण्डी घाट
हनुमान घाट
प्राचीन हनुमान घाट
मैसूर घाट
हरिश्चंद्र घाट
लाली घाट
विजयानरम् घाट
केदार घाट
चौकी घाट
क्षेमेश्वर घाट
मानसरोवर घाट
नारद घाट
राजा घाट
गंगा महल घाट
पाण्डेय घाट
दिगपतिया घाट
चौसट्टी घाट
राणा महल घाट
दरभंगा घाट
मुंशी घाट
अहिल्याबाई घाट
शीतला घाट
प्रयाग घाट
दशाश्वमेघ घाट
राजेन्द्र प्रसाद घाट
मानमंदिर घाट
त्रिपुरा भैरवी घाट
मीरघाट घाट
ललिता घाट
मणिकर्णिका घाट
सिंधिया घाट
संकठा घाट
गंगामहल घाट
भोंसलो घाट
गणेश घाट
रामघाट घाट
जटार घाट
ग्वालियर घाट
बालाजी घाट
पंचगंगा घाट
दुर्गा घाट
ब्रह्मा घाट
बूँदी परकोटा घाट
शीतला घाट
लाल घाट
गाय घाट
बद्री नारायण घाट
त्रिलोचन घाट
नंदेश्वर घाट
तेलिया- नाला घाट
नया घाट
प्रल्हाद घाट
रानी घाट
भैंसासुर घाट
राजघाट
आदिकेशव या वरुणा संगम घाट

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