Sunday, October 14, 2018

Golden Temple Vellore travel guide in hindi

गोल्डन टेम्पल वेल्लोर
श्रीपुरम का स्वर्ण मंदिर तमिलनाडु राज्य के वेल्लोर शहर में मलाइकोडी नामक क्षेत्र में छोटे हरे पहाड़ों के बीच स्थित है। यह तिरुमालाकोदी के स्थान पर वेल्लोर शहर के दक्षिण भाग में स्थित है।यह मंदिर महालक्ष्मी देवी को समर्पित है। जिसे लक्ष्मी नारायणी मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर अंदर से और बाहर से सोने की परतो से बनाया गया है।इस का निर्माण लगभग 100 एकड़ भूमि पर किया गया है, जिसे वेल्लोर के श्री नारायणी-पेदम द्वारा धार्मिक गुरु शक्ति अम्मा द्वारा निर्मित किया गया है।
स्वर्ण मंदिर में स्थापित मूर्तियां सैकड़ों स्वर्ण विशेषज्ञ द्वारा बनाई गई हैं। स्वर्ण मंदिर का अंदुरनी और बाहरी हिस्सा सोने की प्लेटों और चादरों से ढका हुआ है, जिसे बनाने में 300 करोड़ की राशी खर्च हुयी है। इस मंदिर में निर्माण में १५०० किलोग्राम सोने का इस्तेमाल किया गया है। इतना सोना विश्व के दूसरे किसी भी धार्मिक स्थल को बनाने में नहीं हुवा है।रात में मंदिर चमकने के लिए अनोखी प्रकाश प्रणाली की व्यवस्था की गई है। 24 अगस्त, 2007 को, मंदिर का निर्माण पूरा हो गया था। इस मंदिर का बाहरी मार्ग को एक सितारा की तरह आकार दिया गया है जो 1.8 किमी की इतना लंबा है और इसकी सभी दीवारें गुरु शक्ति अम्मा की आध्यात्मिक शिक्षाओं से सजाए गए हैं।

वेल्लोर स्वर्ण मंदिर कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग द्वारा

बैंगलोर और चेन्नई के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे निकटतम हवाई अड्डे हैं।
सड़क मार्ग द्वारा
बैंगलोर, चेन्नई, तिरुपति और कुछ अन्य मुख्य शहरों से बस सेवाये चलती है ।
रेल मार्ग द्वारा

निकटतम रेलवे स्टेशन वेल्लोर कटपाडी स्टेशन है, जहासे स्वर्ण मंदिर केवल 15 किमी दूर है।काटपाडी रेलवे स्टेशन से श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर जाने के लिए ऑटो या टैक्सी ,बस मिल जाती है। 

ड्रेस कोड
वेल्लोर गोल्डन टेम्पल का दौरा करते समय तीर्थयात्रियों को सख्त नियमों का पालन करना होता है।
  • शॉर्ट्स, लुंगी , मिडिज या बरमुडा पहनकर जा नहीं सकते।
  • तंबाकू और च्यूइंग या शराब का उपभोग।
  • कैमरा, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स और किसी भी ज्वलनशील वस्तुओं को ले जाना प्रतिबंधित है।
मंदिर का समय
हर दिन सुबह 8 AM से 8 PM के बीच मंदिर दर्शन के लिए खुला रहता है।

तिरुपति से वेल्लोर बिच रस्ते में पड़ने वाले दर्शनीय स्थल
चंद्रगिरी किला
तिरुपति से दुरी :- 14 km

चंद्रगिरी किला एक ऐतिहासिक किला है, आंध्र प्रदेश के चंद्रगिरी तिरुपति में स्थित है। इस किले का निर्माण 11 वीं शताब्दी में यादव नायडू राजाओं द्वारा बहुत पहले किया गया था। इस किले को अभी भी चंद्रगिरी किला कहा जाता है जबकि किले का नाम विजयनगर साम्राज्य की राजधानी शहर के नाम पर रखा गया था। वर्तमान में, किला भारत सरकार की संपत्ति है और भारत के पुरातात्विक सर्वेक्षण इस ऐतिहासिक इमारत की देखभाल कर रहा है।इस किले में संग्रहालय बनाया गया है।इसमें प्रसिद्ध और ऐतिहासिक पत्थरों और धातुओं को देखने के लिए रखा गया है।यहां रखे गए लेख 2 शताब्दी के हैं। उस समय के युद्ध हथियार, ड्रैगर्स, तलवारें, धनुष और चाकू जैसे एक छोटे शस्त्रागार को भी प्रदर्शित किया गया है। सैनिकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कुछ हथियार भी यहां रखे हैं।इस किले की वास्तुकला अद्भुत है। किले की प्रकाश प्रणाली को भी खूबसूरती से डिजाइन किया गया था क्योंकि उस समय प्राकृतिक प्रकाश ही केवल स्रोत था। इस किले का स्थान 183 मीटर ऊंचा पहाड़ी पर है। किले के दक्षिणी भाग को विशाल और चौड़ी दीवारों द्वारा सुरक्षित किया गया है। किले में किसी भी अप्रत्याशित घुसपैठ को रोकने के लिए एक गहरी और चौड़ी खाई भी बनायीं गयी है। किले के शेष भाग में अभी भी दो महल मौजूद हैं। दोनों महल पत्थर और ईंट से बने हैं। यहाँ तेलुगू और अंग्रेजी भाषाओं में आधुनिक पीढ़ी के लिए इस किले के अस्तित्व और निर्माण के बारे में जानकारी हेतु एक लाइटिंग और साउंड शो भी आयोजित किया जाता है। 
श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर 
तिरुपति से दुरी :- 15 km
श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी का प्राचीन मंदिर श्रीनिवास मंगलपुरम में स्थित है, चित्तूर जिले के पश्चिम तिरुपति से लगभग 15 किमी दूर है।यह प्राचीन मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियंत्रण में है, 1 9 67 से तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम द्वारा इसे संचालित किया जाता है। श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर को तिरुमाला तिरुपति मंदिर के इतनाही पवित्र माना जाता है। जो लोग तिरुमाला जाने में असमर्थ हैं वे भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन कर तिरुमला व्यकटेश स्वामी के दर्शन करने का फल उन्हें मिलता है। यह मंदिर नवविवाहित जोड़ों के लिए महत्व रखता है। नवविवाहित जोड़े इस मंदिर में पहले प्रार्थनाएं करते है क्योंकि यह वह स्थान है जहां भगवान श्री कल्याण वेंकटेश्वर स्वामी देवी पद्मवती देवी के साथ विवाह के बाद छह महीने तक इस स्थान पर रहे थे। 
कनिपकम श्री वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर
तिरुपति से दुरी :- 70 km
श्री वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर चित्तूर जिले के कनिपकम बहुदा नदी के तट पर बसा एक छोटे गांव में स्थित है। श्री वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर अपने स्वयंभू भगवान विनायक मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। भगवान विनायक को समर्पित, यह मंदिर देश में सबसे लोकप्रिय भगवान गणेश मंदिरों में से एक है।एक पौराणिक कथा के अनुसार, तीन भाई थे प्रत्येक भाई एक विकृति के साथ पीड़ित थे। एक गूंगा था, एक बहरा और तीसरा अंधा था।एक छोटी सी भूमि पर तीनो भाई अनाज उगाकर गुजारा करते थे। उन्होंने एक कुँवा खोद रखा था।एक साल सूखा पड़ गया और कुँवा सुख गया। तीनो भाईओ ने कुएँ की पानी के तलाश में ओर खुदाई शुरू कर दी। एक दिन खुदाई करते वक्त अचानक एक पत्थर से खून निकलने लगा। खून के छींटे तीनो भाईओ के शरीर पर उड़ते ही तीनो भाई एकदम स्वस्थ हो गए। यह खबर गांव में फ़ैल गयी। लोग इकट्ठे हो गए। तभी अचानक गणेश जी की प्रतिमा कुँवे में प्रकट हो गयी। 

वेल्लोर शहर और नजदीक के दर्शनीय स्थल
वेल्लोर किला
काटपाडी रेलवे स्टेशन से दुरी :- 7 km
वेल्लोर में शीर्ष पर्यटन स्थलों में से प्रमुख स्थल है। मुख्य रेलवे स्टेशन से 1.5 किमी की दूरी पर स्थित, यह किला 16 वीं शताब्दी का ग्रेनाइट किला है जो शहर के केंद्र में स्थित है। यह एक गहरी घास से घिरा हुआ है जो एक बार मगरमच्छ से भरा था। किला 133 एकड़ के क्षेत्र में फैला है। यहां नौकायन सुविधा भी उपलब्ध है। 
सरकारी संग्रहालय
सरकारी संग्रहालय लक्ष्मणस्वामी टाउन हॉल में वेल्लोर किले के अंदर स्थित है। यह एक बहुउद्देश्यीय संग्रहालय है। जिसमें पुरातत्व, इतिहास, भूविज्ञान और वनस्पति विज्ञान जैसे विभिन्न प्रकार के कलाकृतियों का एक बड़ा संग्रह है। सरकारी छुट्टियों को छोड़कर संग्रहालय पूरे दिन खुला रहता है। संग्रहालय में 8 गैलरी हैं जिसमे जिला गैलरी, स्टोन मूर्तिकला गैलरी, प्री-हिस्ट्री-फिलेटली गैलरी, पेंटिंग्स गैलरी, जूलॉजी गैलरी, कांस्य गैलरी, सिक्के गैलरी और मानव विज्ञान गैलरी हैं।
जलकंदेश्वर मंदिर
काटपाडी रेलवे स्टेशन से दुरी :- 7 km
यह मंदिर वेल्लोर किले परिसर के अंदर स्थित है। जलकंदेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर द्रविड़ शैली वास्तुकला में बनाया गया है। मंदिर पत्थर से बने स्तंभ पर खड़ा हैं और मंदिर की छत पर खूबसूरत नक्काशी निकाली गयी हैं।
विज्ञान पार्क 
काटपाडी रेलवे स्टेशन से दुरी :- 8 km
वेल्लोर सिटी पार्क (जिसे वेल्लोर जिला विज्ञान केंद्र भी कहा जाता है) वेल्लोर शहर के सथुवाचारी पूर्व भाग में स्थित है। यह विज्ञान केंद्र तमिलनाडु के चार केंद्रों में से एक है जो तमिलनाडु विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा विकसित किया गया है। छात्रों के लिए यह विज्ञान पार्क प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। यहाँ कई गैलरीज़ बनायीं गयी है। जिसमे पर्यावरण सहित , चमड़े और भौतिक विज्ञान की जानकारी दी गयी है । विज्ञान पार्क का उद्देश्य बच्चों को नाटक विधि के माध्यम से विज्ञान सीखने में सक्षम बनाना है।यहां विज्ञान पार्क ने छात्रों और आम जनता के लिए 28 नवंबर 2013 को अपनी दूरबीन से धूमकेतु आईएसओएन को देखना संभव बना गया था। विज्ञान पार्क में भौतिकी, रसायन शास्त्र, गणित, जीवविज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, योग, मनोविज्ञान और व्यावहारिक प्रयोगों पढ़ने वाले छात्रों के लिए ग्रीष्मकालीन शिविर भी आयोजित किया जाता है।
दिल्ली गेट
काटपाडी रेलवे स्टेशन से दुरी :- 28 km
तमिलनाडु के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। दिल्ली गेट का इस्तेमाल मुगल साम्राज्य के गवर्नर दौलत खान पनी द्वारा निर्मित 18 वीं सदी के किले के प्रवेश द्वार के रूप में किया जाता था। मशहूर ब्रिटिश अधिकारी रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में यहां कई ऐतिहासिक लड़ाईएं की गई हैं।
रत्नागिरी बालामुरुगन मंदिर
काटपाडी रेलवे स्टेशन से दुरी :- 18 km

रत्नागिरी बालमुरुगन मंदिर वेल्लोर, थिरुमानिकुंडम में स्थित एक प्राचीन मुरुगन मंदिर है। इसे 14 वीं शताब्दी के आसपास बनाया गया था। यह एक पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है।पहले यह मंदिर एक साधारण मंदिर था। समय के साथ इसे पत्थर के मंदिर में परिवर्तित कर दिया गया है। 
येलगिरी
काटपाडी रेलवे स्टेशन से दुरी :- 95 km
यह वेल्लोर में स्थित एक छोटा लेकिन प्राचीन पहाड़ी स्टेशन है। येलगिरी 1410 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ अलग अलग प्रकार के फूल के पौधे , चाय के बगीचे भी देख सकते है। यहां कई झीलों और झरने देखने को मिलेंगे।यह स्थान चार पहाड़ों के बीच घिरा हुवा है। यह एक पहाड़ी स्टेशन है जहां साल भर पर्यटको का ताता लगा रहता है। इस क्षेत्र के मुख्य निवासी आदिवासी हैं जो येलगिरी में 14 छोटे गांवों में रहते हैं। ये आदिवासी कृषि, बागवानी इत्यादि में लगे हुए हैं। ग्रामीण पहाड़ी लोक के सभी व्यवसाय, उनके रीति-रिवाजों और आदतों, और विशेष रूप से उनके घरों की संरचना अद्वितीय है और इस पहाड़ी स्टेशन पर कई पर्यटकों को आकर्षित करती है।

गोल्डन टेम्पल वेल्लोर यात्रा का youtube Video





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