Thursday, September 27, 2018

Bhimashankar Jyotirlinga maharashtra travel guide in hindi

भीमाशंकर कैसे पहुंचे
रेल द्वारा

भीमाशंकर के निकटतम रेलवे स्टेशन पुणे है।पुणे रेल से न केवल अन्य महाराष्ट्र के शहरों से जुड़ा हुआ है बल्कि भारत के अधिकांश प्रमुख शहरों के साथ भी जुड़ा हुआ है। दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बैंगलोर, मैसूर, लखनऊ और कई अन्य शहरों से सीधी गाडियां नियमित रूप से उपलब्ध हैं। 

सड़क द्वारा
पुणे से भीमाशंकर कैसे पहुंचे
पुणे से भीमाशंकर 125 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। पुणे शिवजी नगर बस स्टैंड से भीमाशंकर के लिए MSRTC की बसे हर आधे घंटे के बाद नियमित रूप से चलती है।
शिवाजीनगर पुणे बस स्टैंड से MSRTC Bus Time:-
00:30, 04:30, 05:15, 05:30, 06:00, 06:02, 06:15, 06:30, 07:00, 07:00, 07:01, 07:30, 08:00, 08:30 09:00, 09:30, 10:00, 10:30, 11:00, 11:30, 12:00, 12:30, 13:00, 13:30, 14:00, 14:30, 15:00, 15:15,  16:00,  18:12


नाशिक से भीमाशंकर कैसे पहुंचे
नाशिक से पुणे के लिए एक सीधे ट्रैन चलती है -
Train no .11025 Bhusaval - Pune Express सुबह 5 बजे नाशिक रोड से निकलती है और पुणे में दुपहर 12 बजे पहुँचती है। नाशिक से भीमाशंकर 205 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। नाशिक से अगर आप सड़क के रास्ते जाना चाहते है तो नाशिक से नारायण गांव तक बस से जाना पड़ेगा और आगे नारायणगांव से भीमाशंकर के लिए सीधे बस मिलजाती है। 


शिरडी से भीमाशंकर कैसे पहुंचे
शिरडी से 16 किलोमीटर की दुरी पर कोपरगाव रेलवे स्टेशन है। कोपरगाव से पुणे के लिए कुल ३४ ट्रेने चलती है। शिरडी से सीधे भीमाशंकर के लिए बस नहीं है। शिरडी से मंचर या घोडेगाव तक बस मिलजाती है और आगे मंचर से भीमाशंकर के लिए बस से जाना पड़ता है।मंचर से भीमाशंकर की दुरी 60 किलोमीटर है। 

मुबंई से भीमाशंकर कैसे पहुंचे
रेल द्वारा
मुंबई से भीमाशंकर रेल द्वारा जाने के लिए पुणे ही पहुंचना पड़ता है।मुंबई से पुणे के लिए कुल 77 ट्रेने चलती है। मुंबई से पुणे पहुंचने में तीन से चार घंटे का समय लगता है। 
सड़क मार्ग द्वारा
मुंबई से भीमाशंकर की दुरी २३० किलोमीटर है। मुंबई से सड़क मार्ग से जाने के लिए पुणे जाने की आवश्यकता नहीं है।तळेगाव -चाकन-मंचर - से होकर भीमाशंकर पहुंचना पड़ता है।

भीमाशंकर पौराणिक कथा
रावण का भाई कुंभकर्ण की मुलाकात एक पर्वत पर कर्कटी नामक महिला से हुई।कर्कटी बहुत ही सुन्दर थी।कुंभकर्ण उसके रूप को देखकर मोहित हो गया और उसने कर्कटी से विवाह कर लिया। कर्कटी ने एक पुत्र को जन्म दिया उसका नाम भीम रखा गया। पुत्र के जन्म के बाद कुंभकर्ण वापस लंका चला गया मगर कर्कटी उसके साथ लंका नहीं गयी और उसी पर्वत पर रहने लगी।कुंभकर्ण के वध के बाद कर्कटी ने फैसला किया कि एक दिन वो अपने पुत्र को कुंभकर्ण के वध का बदला लेने के लिए शक्तिशाली बनाएगी। 

समय बीतता गया, भीम जवान हो चुका था। एक दिन कर्कटी ने भीम को उसके पिता की मृत्यु की कहानी सुनाई। पिता के मृत्यु का सच सुनकर भीम ने फैसला किया कि वो पिता के मृत्यु का बदला अवश्य लेगा। भीम ने घोर तपस्या की और ब्रम्हा जी से सबसे शक्तिशाली होने का वरदान प्राप्त किया ।

कामरूप देश के राजासुदक्षिण भगवान शिव के परम भक्त थे। जब भीम को इस बात की भनक लगी तो उसने सुदक्षिण पर आक्रमण किया। सुदक्षिण को युद्ध में हराकर भीम ने राजा को बंदी बना कर कारागार में डाल दिया। राजा सुदक्षिण ने कारागार में शिवलिंग की स्थापना की और नित्य भगवान शिव की पूजा करने लगा। राजा सुदक्षिण ने कारागार में बंद अन्य कैदी को शिव की महिमा का महत्त्व बताया।अन्य कैदी भी शिवजी के भक्त हो गए और उनकी पूजा करने लगे। भीम को इस बात की भनक लगी तो वह क्रोधित हो गया और उसी समय भीम ने राजा सुदक्षिण को मारने का निर्णय लिया।कारागार में पहुंचकर जैसे ही भीम ने राजा का वध करने के लिए तलवार उठाई वहां शिवलिंग से शिवजी प्रकट हो गए। भगवान शिव ने युद्ध में भीम को पराजित कर उसका वध कर दिया। भीम के वध के बाद ऋषि मुनियों और देवताओ ने भगवान भोलेनाथ को हमेशा के लिए वहां स्थापित होने के लिए मनाया और शिवजी उसी स्थान पर शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गए। इस स्थान पर भीम और भगवान भोलेनाथ का युद्ध हुआ था इसलिए यह  स्थान  भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के नाम से विख्यात हुवा।

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