Wednesday, May 2, 2018

Baba Baidyanath Dham Deoghar Travel Guide in Hindi

How to Reach Baba Baidyanath Dham Deoghar

बाबा बैद्यनाथ धाम कैसे पहुंचे
सड़क मार्ग द्वारा
देवघर सीधे बड़े शहरोसे जुड़ा हुआ है। कोलकाता (373 किमी), पटना (281 किमी), (रांची 250 किमी) तक सड़क से जुड़ा हुआ है। देवघर से धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर, रांची और बर्धमान (पश्चिम बंगाल) तक नियमित बसें चलती हैं।
रेल मार्ग द्वारा
बैद्यनाथ धाम के निकटतम रेलवे स्टेशन जसीडीह है। यह हावड़ा पटना दिल्ली लाइन पर है।सभी प्रमुख शहरोसे जसीडीह के लिए ट्रेनें चलती हैं।जसीडीह से देवघर की दुरी 8 किमी है। जसीडीह रेल्वे स्टेशन से देवघर पहुंचने के लिए ऑटो रिक्शा या टैक्सी मिल जाती है।
हवाई मार्ग द्वारा
देवघर का निकटतम हवाई अड्डा पटना है। पटना से आप ट्रैन या टैक्सी से देवघर पहुंच सकते है।पटना से देवघर की दुरी 281 किमी है।
देवघर बाबा धाम की यात्रा कितने दिन की होगी - 2 दिन
कोनसे महीने में यात्रा करे :-
अक्टूबर से फेब्रुवरी तक का समय बाबा धाम की यात्रा के लिए सबसे अच्छा होता है। गर्मी के दिनों में तापमान 45 तक चला जाता है। बारिश के मौसम में भारी बारिश होती है।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर देवघर में दर्शन और पूजा समय नीचे दिए गए हैं
सुबह: 4:00 से दुपहर 3:30 बजे
शाम: 6:00 से 9:00 बजे तक
बाबा बैद्यनाथ का मुख्य मंदिर द्वार सामान्य दिनों में रात 9: 00 बजे बंद हो जाता है, लेकिन बाबा मंदिर परिसर का द्वार पूरी रात खुला रहता है।श्रवण मेला और शिवरात्रि, सोमवारी आदि जैसे कई अन्य अवसरों के दौरान दर्शन समय आमतौर पर बढ़ाया जाता है।

Where to Stay in Deoghar Baba Baidyanath Dham

देवघर में कहाँ रुके -
देवघर के टॉवर चौक ,जलसार रोड ,कॉलेज रोड ,देवघर बस स्टैंड के नजदीक बहुत सारी होटल है। अपने बजेट अनुसार होटल उपलब्ध है।

The History of Baba Baidyanatha Temple Deoghar

बाबा बैद्यनाथ धाम की पौराणिक कथा
रावण ने कई देवता, यक्ष और गंधर्वो को कैद कर के लंका में रखा हुआ था।रावण चाहता था शिवजी कैलाश को छोड़ कर लंका में रहें।ताकी वह त्रिलोक पर राज कर सके। शिवजी को प्रसन्न करने  रावण हिमालय में तप करने लगा। रावण एक एक करके अपने सर को काट कर शिवलिंग पर चढाने लगा। जब उसका आखरी सर बचा तो शिवजी प्रकट हो गए। रावण को वर मांगने को कहा। रावण ने इच्छा जताई शिवजी कैलास छोड़ लंका में रहे। शिवजी ने रावण को एक शिव लिंग दिया और शर्त रखी लंका जाते वक्त शिवलिंग को निचे धरती पर रख नहीं सकता। अगर धरती पर रख दिया तो शिवलिंग वही स्थापित हो जायेगा। रावण ने शिवजी की शर्त मानी और लंका की तरफ प्रस्थान किया। सभी देवता घबरा गए। अगर रावण लंका में शिवलिंग की स्थापन करता है तो वह और भी ताकदवर हो जायेगा।सभी देवता भगवान श्री विष्णु के पास गए। श्री विष्णु भगवान ने वरुण देव को आदेश दिया वह रावण के पेट में प्रवेश करे।रावण जब देवघर पंहुचा तो उसे लघुशंका लगी। रावण शिवलिंग को लेकर लघुशंका कर नहीं सकता था।तभी श्री विष्णु भगवान ने बैजू नाम के एक ग्वाले का रूप धारण कर लिया। रावण की दॄष्टि ग्वाले पर पड़ी। उसने ग्वाले को शिव लिंग थमा दिया और कहा मै जब तक लौटूंगा नहीं तब तक शिवलिंग को धरती पर रखना नहीं।रावण लघुशंका करने चला गया। रावण कई घंटो तक लघुशंका करता रहा लेकिन उसकी लघुशंका थमने का नाम नहीं ले रही थी। ग्वाले ने शिवलिंग को धरती पर स्थापित कर दिया। जब रावण लौट कर आया। उसने देखा शिवलिंग धरती पर स्थापित हो गया है। उसने शिवलिंग को उठाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हो सका। श्रीविष्णु भगवान की रची लीला रावण के समझ में आगई। रावण क्रोधित हो गया और अपना अंगूठा शिवलिंग पर गड़ाकर लंका चला गया। इस कारन देवघर का शिवलिंग निचे दबा हुआ है। ब्रम्हा ,विष्णु ,आदि देवताओ ने आकर उस शिवलिंग की पूजा की। जिस ग्वाले ने शिवलिंग को स्थापित कर दिया था उसका नाम बैजू था। इसी कारन यह शिवलिंग बैद्यनाथ नाम से विख्यात हुवा।
बैद्यनाथ मंदिर के बारे में
देवघर बैद्यनाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक ज्योतिर्लिंग है। जो झारखंड राज्य के देवघर शहर में स्थित है। यहाँ भक्तो की मनोकामन पूर्ण होती है इस कारण इस लिंग को कामना लिंग भी कहा जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव का मंदिर विश्वकर्मा, देवताओं के वास्तुकार द्वारा बनाया गया था।
देवघर एक शक्ति पीठ
देवघर माता के 51 माता के शक्ति पीठ में से एक शक्ति पीठ है।इसे हाद्रपीठ के रूप में जाना जाता है।   यहाँ माता सती का ह्रदय गिरा था। एक साथ ज्योतिर्लिंग और माता सती एक साथ कही और देखने नहीं मिलती है। इसलिए देवघर का महत्व अधिक है।  

Shravani Mela

श्रावण मेला
धार्मिक मान्यता नुसार श्रावण मास में जब सभी देवी देवता विश्राम करने चले जाते है। उस समय भोलेनाथ माता पार्वती के साथ पृथ्वी लोक पर विराजमान होकर अपने भक्तो के संकटो का निवारण करते है। लोगो की आस्था है की श्रावण मास में  सुल्तानगंज बिहार स्थित अजगैबीनाथ धाम और देवघर में बाबा धाम में साक्षात् शिव विराजमान रहते है। शिवजी को गंगा जल अति प्रिय है। सुलतानगंज बिहार में गंगा उत्तरवाहिनी है। भगवान श्रीराम ने सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा के जल से बाबा बैद्यनाथ का जलभिषेक किया था। इसलिए सुल्तानगंज गंगा जल का महत्त्व बढ़ जाता है। इस महत्व के कारन श्रद्धालु श्रावण मास में बड़ी संख्यामे सुल्तानगंज पहुंचते है। आषाठ पूर्णिंमा के अगले दिन से श्रावणी मेला प्रारंभ होता है। सुल्तानगंज गंगा नदी से दो पात्रो में जल भरकर कंधे पर कावड़ को लटका ने के बाद बाबा बम भोले की जयकारे करते कावड़िये नंगे पाव चलकर 105 किमी स्थित देवघर पहुंचते है। श्रावणी मेले में बूढ़े ,बच्चे,युवा महिलाये बड़ी संख्यामे भाग लेते है। देवघर में आठ से दस कोलोमीटर लंबी कतार बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलभिषेक करने के लिए लग जाती है। जो शिवभक्त गंगा जल लेकर सुल्तानगंज से १०५ किलोमीटर पैदल चलकर 24 घंटे के भीतर देवघर पहुँचता है। उसे डाक बम कहा जाता है।देवघर में एक पात्र के जल से जलाभिषेक करते है और दूसरे पात्र का जल देवघर से 42 किलोमीटर स्थित बासुकीनाथ बाबा को जलाभिषेक करते है। बासुकीनाथ बाबा पर जलाभिषेक नहीं किया तो यात्रा अधूरी असफल मानी जाती है।
बासुकी नाथ पौराणिक कथा
बासु नाम का एक किसान भूमि खोद रहा था। उसने देखा उसके शस्र किसी चीज पर पड़ा है। उसने मिटटी हटाकर देखा उसे शिवलिंग जैसी चीज नजर आयी और उसमे से खून बह रहा था। बासु यह नजारा देख घबरा गया। तभी शिवजी द्वारा आकाशवाणी हुयी बासु डरो मत यहाँ मेरा निवास है। शिव की वाणी सुनकर बासु आनंदित हो उठा। रोजाना शिवलिंग की पूजा यव आराधना करने लगा। बासु द्वारा इस शिवलिंग को पूजने के कारन इस शिवलिंग का नाम बासुकीनाथ पड़ गया। तभी से शिव की पूजा का सिलसिला आज तक बरक़रार है।आज यहाँ शिव और पार्वती माता का विशाल मंदिर है। मुख्य मंदिर के निकट शिवगंगा तालाब है।श्रद्धालु शिवगंगा में स्नान कर शिव को बेल पत्र और गगाजल अर्पण करते है।
देवघर का पेड़ा
देवघर का पेड़ा उसके स्वाद के कारन प्रसिद्ध है। इसका स्वाद आम पेढ़े से अलग होता है। पेड़ा बनाने के लिए बिहार और उत्तरप्रदेश से दुकानदारों द्वारा खोया मंगवाया जाता है। श्रावण मेले के दौरान करोडो के पेढ़े बिकते है। मंदिर के बाहर  पेढ़े की दुकाने लगी हुयी है।


बाबा बैद्यनाथ धाम के प्रांगण में स्थित मंदिर के नाम

  1. माँ  पार्वती मंदिर
  2. माँ जगत जननी मंदिर
  3. गणेश मंदिर
  4. ब्रह्मा मंदिर
  5. संध्या मंदिर
  6. कल मनाशा मंदिर
  7. हनुमान मंदिर
  8. माँ  मनशा मंदिर
  9. माँ सरस्वती मंदिर
  10. सूर्य नारायण मंदिर
  11. माँ बागला मंदिर
  12. राम मंदिर
  13. आनंद भैरव मंदिर
  14. माँ गंगा मंदिर
  15. गौरी शंकर मंदिर
  16. माँ तारा मंदिर
  17. माँ काली मंदिर
  18. माँ नारदेश्वर मंदिर
  19. माँ अन्नपूर्णा मंदिर
  20. लक्ष्मी नारायम मंदिर
  21. नीलकंठ मंदिर
बाबा बैद्यनाथ धाम के दर्शनीय स्थल की जानकारी 
बाबा बैद्यनाथ धाम यात्रा youtube Video देखने के लिए यहाँ क्लिक करे 










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