Wednesday, April 18, 2018

Amritsar visiting Places

स्वर्ण मंदिर

रेल्वे स्टेशन से स्वर्ण मंदिर की दुरी - २ की.मि.
स्वर्ण मंदिर सिख धर्म का प्रमुख देव स्थान है। जिसे हरमंदिर साहिब ,दरबार साहिब भी कहा जाता है।

हरमंदिर साहिब अमृत सरोवर के बीचो बीच बना है। इसे देखने दुनिया भर से लोखो श्रद्धालु आते है।
हरमंदिर साहिब के ऊपर और भीतर सोने की परत चढ़ाई गयी है।इस लिए इसे स्वर्ण मंदिर कहा जाता है।
स्वर्ण मंदिर के भीतर निम्न स्थलों का दर्शन करे -
दुःख भजनी बेरी
सेंट्रल सिख म्यूजियम
अठसठ तीर्थ
बाबा दिप सिंह जी शहीद
गुरुद्वारा मानजी साहिब दिवान हॉल
अकालतख्त साहिब
बेर बाबा बुढ़ाजी
स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने के बाद क्या करे
प्रवेश द्वार से भीतर प्रवेश करते ही पहले हरमंदिर साहिब की और मुँह करे और घुटनो के बल बैठकर माथा टेके।स्वर्ण मंदिर की परिक्रमा करे। दुःख भजनी बेरी स्थल पर स्नान करे। अठसठ तीर्थ स्थल का दर्शन करे। कराह प्रसाद काउंटर पर जाकर अपनी मर्जी नुसार कराह प्रसाद का टिकट ख़रीदे और कराह प्रसाद काउंटर से प्रसाद प्राप्त करे,इस प्रसाद को भोग के रूप में चढ़ाना है। दर्शन देवरी जहा से हम हरमंदिर साहिब के दर्शन के लिए प्रवेश करते है। वहां भोग का काउंटर बना है यह प्रसाद भोग काउंटर पर दे दीजिये। कराह प्रसाद जब श्रद्धालु हरमंदिर साहिब का दर्शन करने के बाद  बाहर निकलते है तो उन्हें दिया जाता है। 

जलियाँवाला बाग

स्वर्ण मंदिर के नजदीक ही जलियाँवाला बाग है। १३ अप्रैल १९१९ को बैसाखी के दिन रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए सभा बुलाई गई थी। अग्रेज अफसर जनरल डायर ने निह्त्ये लोगो पर गोलियाँ चलवा ने का आदेश दिया था।१० मिनट में १६५० राउंड गोलिया चलाई गयी थी। उस दिन एक हजार से अधिक लोग शहीद हुए और दो हजार से अधिक लोग जख्मी हुये थे। लोग जान बचाने के लिये एक कुएँ में कूदे थे।१२० लोगो के शव इस कुँए से निकाले गये थे। वह कुआँ आज भी जलियाँवाला बाग में शहीदी कुएँ के नाम से मौजूद है।दीवारों पर गोलियों के निशान भी मौजूद है।

पार्टिशन म्यूजियम 

स्वर्ण मंदिर से दुरी :- आधा किलोमीटर 
पार्टीशन म्यूजियम टाउन हॉल में बनाया गया है।यह म्यूजियम १७००० वर्ग फुट में बनाया गया है। इस में दो मंजिले और १५ कमरे है।इसकी दीवारे लाल पत्थर से बनाई गयी है। इस म्यूजियम में भारत पाकिस्तान के बटवारे से जुड़े दस्तावेज ,अखबारों के कटिंग और पुरानी फोटो दीवारों पर लगायी गयी है।अग्रेजो से आजादी की लड़ाई अपने आँखो से देखने वाले कुछ चश्मदीद के इंटरव्यू के वीडियो क्लिप दिखायी जाती है। 

दुर्गियाना माता मंदिर

स्वर्ण मंदिर से दुरी - २ कि.मी.
यह मंदिर अमृतसर शहर में लोहगेट के पास स्थित है। दुर्गियाना माता मंदिर स्वर्ण मंदिर की तरह ही सरोवर के बीचो बिच बनाया गया है। यह मंदिर दुर्गा माता को समर्पित है। दुर्गियाना माता मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के निर्माण का कार्य की शुरुवात गंगा दशमी के दिन १९२५ में पंडित  मदन मोहन मालवीय के है हाथो करवाया गयी थी। मंदिर के गर्भगृह में दुर्गा माता और श्री गणेश जी की मुर्तिया है। स्वर्ण मंदिर की तरह यहाँ भी मंदिर की परिक्रमा करे।

दुर्गानिया मंदिर परिसर के निम्न मंदिरो का दर्शन करे
हनुमान मंदिर
सीतला माता मंदिर
श्री सत नारायण मंदिर
तुलसीदासजी मंदिर
वेद कथा भवन

गोबिंदगढ़ किला

स्वर्ण मंदिर से दुरी :- २ कि.मी.
गोबिंदगढ़ किला अमृतसर शहर के बीचो बिच बना है। गोबिंदगढ़ किले का निर्माण ईटो और चुने से किया गया है। इसका आकार चोकर है। किले में दो द्वार है इसके मुख्य प्रवेश द्वार का नाम हरि सिंह नलवा के नाम पर है। जिसे नलवा गेट कहते है।दूसरे द्वार को केलाल गेट कहा जाता है। कहते है, यहासे एक सुरंग बनायीं गयी थी जो लाहौर तक जाती थी। गोविंदगढ़ किला सिख मिस्ल के गुज्जर सिंह भंगी की सेना ने बनाया था। 1805 और 1809 के बीच महाराजा रणजीत सिंह द्वारा पुनर्निर्माण किया गया। महाराजा रणजीत सिंह ने इस किले को और मजबूत किया और सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के नाम पर इस किले का नाम "गोबिंद गढ़" रखा। ब्रिटिश शासन के दौरान, यह किला लगभग 150 वर्षों तक ब्रिटिश  सेना के कब्जे में था। ब्रिटिश शासन के दौरान दरबार हॉल, हवा महल और फांसी घर को किले में जोड़ा गया था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय इस किले को पाकिस्तान के शरणार्थी के लिए शिविर बनाया गया था। भारतीय स्वतंत्रता के बाद, भारतीय सेना ने किले पर कब्जा कर लिया और अब तक यह भारतीय सेना के प्रशासन के अधीन था। दिसंबर 2006 में तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह किला जनता के लिए खुला कर दिया। श्याम को यहाँ लेज़र शो और महाराजा रणजीतसिंह के जीवन पर आधारित 7D शो दिखाया जाता है। 

अटारी वाघा बार्डर

अमृतसर से दुरी :- २८ की.मि.
कैसे पहुंचे :- जलियाँवाला बाग के पास ट्रेवल एजेंट खड़े रहते है। बस या कार का बुकिंग उनसे कर सकते है। 

वाघा बॉर्डर से २ किलोमीटर पहले ही वाहनों को रोक दिया जाता है। कड़ी चेकिंग के बाद आगे दिया जाता है। साथ में कोई सामान न ले। बार्डर तक २ किलो मीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है। ढाई से तीन बजे के बिच यहाँ पहुंचे। आप लेट पहुंचे तो स्टेडियम लोगो से भर जाता है। फिर भीतर प्रवेश दिया नहीं जाता। वाघा बोर्डेर से लाहौर  केवल २२ किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।श्याम ४.३० बजे से हिंदी देश प्रेम के गाने बजाये जाते है और महिला और बच्चे तिरंगा हाथ में लेकर नृत्य करते है। श्याम ५ बजे परेड की शुरुवात की जाती है। दोनों देशो के झंडे को उतारा जाता है। भारत और पाकिस्तान के सैनिक आमने सामने आ जाते है और एक दूसरे को खुन्नस से देखते है। आखिर में बॉर्डर के दोनों देशो के गेट बंद कर दिये जाते है। और परेड की समाप्ति होती है। 

लाल देवी मंदिर

अमृतसर रेल्वे स्टेशन से दुरी :- २ किलोमीटर
संत देवी माता को समर्पित लाल देवी माता मंदिर, अमृतसर रेलवे स्टेशन से 2 किमी दूर पर स्थित है। यह हिंदू मंदिर राणी के  बाग के भीतर स्थित है और माता वैष्णो देवी कटरा मंदिर की तरह बनाया गया है।

अमृतसर यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी 

2 comments:

  1. please mention where to stay and how many day stay at amritsar

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    1. please click the link here to know amritsar other imformation http://www.jeevanjallosh.com/2018/04/amritsar-golden-temple-hindi.html

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Thank you for comment