Thursday, February 8, 2018

Kedarnath Dham Yatra Complete Guide In Hindi

केदारनाथ मंदिर के बारे में ?

About kedarnath Temple

केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। यह मंदिर हिमालय पर्वत की गोद में स्थापित है। केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंग में से सर्वोच्च स्थान पर है और पंच केदार मे से एक है। इस मंदिर का निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था। आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। यह मंदिर कत्यूरी शैली से पत्थरो में बनाया है।


केदारनाथ यात्रा की शुरुवात और समाप्ति

Beginning and end of Kedarnath yatra

केदारनाथ यात्रा मई से अक्टुम्बर तक ६ महीने ही चलती है। अक्षय तृतीया को एप्रिल या मई के महीने से यात्रा की शुरुवात होती है। कार्तिक पूर्णिमा अक्टूबर या नवंबर में केदारनाथ के कपाट बंद कर दिए जाते है।हर साल केदारनाथ के कपाट खोलने और कपाट बंद होने की तारिक घोषित की जाती है।

कोनसे महीने में यात्रा करे ?

In which month do you travel Kedarnath?

मई और जून - मई और जून में बारिश का मौसम शुरू हुवा नहीं होता है।भारी बारिश होने का डर कम रहता है।केदारनाथ में रात का तापमान -७ तक गिर जाता है।बर्फ का भरपूर आंनद उठा सकते है।में जून के भीषण गर्मी से कुछ दिन राहत भी मिल जाती है।

मई और जून यात्रा की दिक्कत - मई और जून में स्कुल और कॉलेज को छुट्टी होने की वजह से बहुत ज्यादा भीड़ होती है। सभी जरुरी सामान महंगे बिकते है। कमरों का किराया भी ज्यादा होता है।
जुलाई और अगस्त - बारिश के मौसम में केदारनाथ की यात्रा न करे भारी बारिश होती है। २०१३ की भयानक आपदा हम देख चुके है।
सितंबर और ओक्टुबर- मौसम काफी अच्छा होता है। जिन लोगो को भीड़ और ठंड से परेशानी होती है।जो लोग शांति से केदारनाथ बाबा के दर्शन करना चाहते है।वह लोग सितंबर और ओक्टुबर के महीने में यात्रा करे।

केदारनाथ यात्रा जाने की प्लानिंग

Planning to visit Kedarnath

हरिद्वार से केदारनाथ यात्रा के लिए कितने दिन लगेंगे - ५ दिन
रात कहा रुकना ठीक रहेगा
हरिद्वार से केदारनाथ जाते समय -
हरिद्वार     - १ दिन
गौरीकुंड   - १ दिन
केदारनाथ - १ दिन
केदारनाथ से हरिद्वार जाते समय -
केदारनाथ से सुबह जल्दी गोरीकुंड के लिए निकले तो
गौरीकुंड की बजाय गुप्तकाशी या रुद्रप्रयाग - १ दिन
हरिद्वार - १ दिन

रात रुकने के लिए कहाँ रूम बुक करे -

GMVN (Garhwal Mandal Vikas Nigam) की यात्री निवास
हरिद्वार से केदारनाथ जाते वक्त जितने भी प्रमुख स्थल पड़ते है उन सभी जगह पर GMVN के रेस्ट हॉउस ,टेन्ट ,कॉटेजेस बने है। सभी जगह में एडवांस में ऑनलाइन कमरे बुक कर सकते है। कमरा बुक करने के लिए GMVN की वेब साइट http://www.gmvnl.in/newgmvn/ पर जाकर कर सकते है।

पहिला पड़ाव 
हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचना-
रेल द्वारा 

केदारनाथ के सबसे नजदीकी रेल्वे स्टेशन हरिद्वार और ऋषिकेश है।ऋषिकेश स्टेशन पर फ़ास्ट ट्रेने जाती नहीं है। भारत के सभी प्रमुख  शहरो से हरिद्वार के लिए डायरेक्ट ट्रेने चलती है।अगर आपके शहर से हरिद्वार जाने के लिए ट्रैन नहीं है तो दिल्ली पहुंच जाइये। दिल्ली से बहुत सारी फ़ास्ट और पैसेंजर ट्रेने हरिद्वार और ऋषिकेश के लिए चलती है।
सड़क मार्ग
दिल्ली से हरिद्वार और ऋषिकेश बहुत सारी बस सेवायें उपलब्ध है।प्राइवेट कार से भी पहुंच सकते है।
हवाई जहाज द्वारा 

निकटतम हवाई अड्डा केदारनाथ से 239 किमी दूर देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है। देहरादून हवाई अड्डे से केदारनाथ(गौरीकुंड) तक टैक्सी उपलब्ध हैं। 
हरिद्वार या ऋषिकेश रात को कहाँ रुके -
हरिद्वार और ऋषिकेश में मुक्त या बहुत ही कम दाम में धर्मशाला और आश्रम में रुक सकते है।हरिद्वार में बहुत सारी होटले है। अपने बजट नुसार  होटल में रुक सकते है। 


दूसरा पड़ाव
हरिद्वार या ऋषिकेश से सोनप्रयाग
हरिद्वार से सोनप्रयाग की दुरी - २५२ किमी
हरिद्वार या ऋषिकेश से गौरीकुंड का रास्ता सड़क मार्ग से तय करना होता है।
हरिद्वार से सोनप्रयाग जाते वक्त बीच मे पड़ने बाले स्थल और एक दूसरे से दुरी -
ऋषिकेश    - 24 किमी
देवप्रयाग    - 73 किमी
श्रीनगर      - 32 किमी
रुद्रप्रयाग    - 36 किमी
अगस्तमुनि  - 9 किमी
चन्दनपुरी  - 22 किमी
कुंड           - 22 किमी
गुप्तकाशी     - 7 किमी
फाटा         - 14 किमी
सोनप्रयाग - 13 किमी

ऊपर दिए सभी स्थलों में रुकने के लिए अच्छे होटल है। किसी कारन डायरेक्ट सोनप्रयाग पहुंचने में दिक्कत आती है। तो बिच में आप ऊपर दिए कोई भी स्थल पर रात रुक सकते है। ऊपर का हर एक स्थल धार्मिक कारणों से महत्त्व रखता है। यहाँ रुक कर मंदिर और दूसरे दर्शनीय स्थलों को भेट दे सकते है। 


रात में कहा रुके - सोनप्रयाग या सीतापुर या गौरीकुंड
हरिद्वार या ऋषिकेश से आने के बाद आप अगर अच्छी होटल में रुकना चाहते है तो सीतापुर जो सोनप्रयाग से ४ किमी की दुरी पर स्थित है। वहाँ रुक सकते है.सीतापुर में बहुत सारी अच्छी होटल है।सोनप्रयाग में भी बहुत सारी  होटल है।सोनप्रयाग में भी रात गुजार  सकते है। लेकिन केदारनाथ जल्दी समय पर पहुंचना चाहते है।तो सबसे अच्छा विकल्प गौरीकुंड है। गौरीकुंड में भी होटल है और GMVN के लॉज भी बने है।


सोनप्रयाग पहुंचने पर सबसे पहले किसे प्राथमिकता दे।
बायोमैट्रिक कार्ड - सोनप्रयाग में सबसे पहले बॉयोमेट्रिक कार्ड प्राप्त करे। सुबह ६ बजे बायोमैट्रिक कार्ड का ऑफिस खुलता है।
हेल्थ सर्टिफ़िकेट - बायोमेट्रिक कार्ड ऑफिस में ही ब्लड प्रेशर चेक करके हेल्थ सेर्टिफिकेट मिलता है। अगर मेजर प्रॉब्लम रहा तो केदारनाथ ट्रेक पर आप जा नहीं सकते। हेलीकाप्टर से जाना पड़ेगा।

सोनप्रयाग में बायोमेट्रिक कार्ड ऑफिस पर सुबह ज्यादा भीड़ होती है  कार्ड मिलने में देरी होती है।केदारनाथ ट्रेक पर जाने में भी देरी हो जाती है। इसलिए एक दिन पहले ही बायोमेट्रिक कार्ड निकाल ले।सोनप्रयाग से बायोमेट्रिक कार्ड और हेल्थ सेर्टिफिकेट के बिना सोनप्रयाग चेक पोस्ट से आगे पुलिस वाले गौरीकुंड जाने नहीं देंगे।


सोनप्रयाग से गौरीकुंड -
सोनप्रयाग से गौरीकुंड ५ किमी की दुरी पर स्थित है।गौरीकुंड आखरी स्टॉप है। गौरीकुंड से आगे बस  नहीं जाती।सोनप्रयाग चेकपोस्ट से आगे एक डेढ़ किमी पैदल चलकर एक ब्रिज क्रॉस करके जाना होगा। ब्रिज से आगे शेयरिंग जीप से गौरीकुंड पहुंच सकते है।


तीसरा पड़ाव
केदारनाथ
गौरीकुंड से केदारनाथ १६ की मि दुरी पर स्थित है।केदारनाथ की उचाई समुद्री लेवल से ११७७५ फिट है। गौरीकुंड से केदारनाथ पैदल या घोड़े से या हेलीकॉप्टर  से तय करना होता है।गौरीकुंड से केदारनाथ घोड़े से पहुंचने के लिए ४ से ५ घंटे लगते है। पैदल चलकर स्वस्थ व्यक्ति को ७ घंटे लगते है। केदारनाथ ट्रेक पर कई जगह तीव्र उतार चढाव है। केदारनाथ ट्रेक पर बिच में रामबाड़ा,जंगल चट्टी,भीमबली,छोटा लीनचौली, लिनचौली, छानी कैंप,रुद्रा पॉइंट प्रमुख स्थल पड़ते है।ट्रेक पर जगह जगह अस्थाई टॉइलेट बनाये गए है।पिने का पानी और खाने पिने के स्टॉल लगे है। जंगल चट्टी और लिनचौली में GMVN के टेंट बने है। यहाँ रात को रुकने की भी व्यवस्था है। मेडिकल कैंप भी लगाए गए है। 

हेलीकॉप्टर से केदारनाथ यात्रा
केदारनाथ जाने के लिए फाटा से हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है। फाटा गुप्तकाशी से १४ किमी की दुरी पर स्थित है। फाटा से गौरीकुंड १८ किमी पड़ता है। फाटा में रात रुकने के लिए होटल भी है। हेलीकॉप्टर का टिकट का किराया प्रति व्यक्ति ३५०० रु. पड़ता है।प्रति वर्ष उत्तराखंड सरकार द्वारा हेलीकॉप्टर टिकट की दरे तय की जाती है।फाटा से हेलीकॉप्टर द्वारा केदारनाथ १० मिनट में पहुंच जाते है। 

केदारनाथ की पौराणिक कथा

महाभारत के युद्ध में विजयी होने के बाद। कौरवो के वध करने के कारन पांडवो को बंधू हत्या का पाप लग गया था। बंधू हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडव भगवान शिव की पूजा कर शिव का आशीर्वाद पाना चाहते थे। लेकिन शिवजी पांडवो से नाराज थे।पांडव शिवजी के दर्शन के लिए काशी  गए। काशी में शिवजी ने पांडव को दर्शन नहीं दिए।जो की शिवजी पांडवो से नाराज थे इसलिए पांडवो को दर्शन देना नहीं चाहते थे। शिवजी अंतध्र्यान होकर केदारनाथ में जा बसे। पांडव अपने निक्ष्चय पर दृढ़ थे। किसी भी हालात में शिवजी का आशीर्वाद पाकर बंधू हत्या से मुक्ति पाना चाहते थे।पांडवो को शिवजी केदारनाथ होने की भनक लग गई। पांडव केदारनाथ पहुंच गए। शिवजी ने बैल का रूप धारण कर लिया और अन्य गाय बैल में जा मिले।पांडव जान गए थे शिवजी इन्ही गाय बैलो में मौजूद है। लेकिन पांडवो के समझ में नहीं आरहा था  इन मे से शिवजी कोनसे है।भीम ने अपना विशाल रूप धारण कर लिया दोनों पहाड़ो पर पैर फैलाकर खड़े हो गये।सभी गाय बैल भीम के पैरो के निचे से निकल गए। एक ही बैल बचा जो भीम के पैर के निचे से जाने को तैयार नहीं था। भीम समज गया यही शिव है।भीम तुरन्त इस बैल को पकड़ ने के झपटे बैल रूपी शिव भूमि में अंतध्र्यान होने लगे तब भीम ने बैल की त्रिकोणात्मक पीठ का भाग पकड़ लिया।शिवजी पांडवो की भक्ति और दृढ़ निक्ष्चय देख कर प्रसन्न हो गए। शिवजी ने पाडवो को दर्शन देकर पाप से मुक्त कर दिया।तभी से शिवजी के बैल की त्रिकोणात्मक पीठ की आकृति पिंड के रूप में केदारनाथ में पूजे जाते है। 

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