Tuesday, December 5, 2017

Ujjain Mahakaleshwar Jyotirlinga Yatra

उज्जैन के बारे मे  (About Ujjain)
उज्जैन  मध्य प्रदेश राज्य का अत्यन्त प्राचीन शहर है। जो क्षिप्रा नदी के किनारे बसा है। यहाँ हर १२ वर्ष पर सिंहस्थ कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। उज्जैन विक्रमादित्य राजा के राज्य की राजधानी थी। कवी कालिदास इसी नगरी में बसते थे। शिवजी के १२ ज्योतिर्लिंग में से एक महाकालेश्वर इस नगरी में स्थित है।उज्जैन अवन्तिका ,उज्जयनी , कनकश्रन्गा  आदि नामो से जाना जाता है। उज्जैन मंदिरों का शहर है। यहाँ हर गल्ली महोल्ले में मन्दिर बने है।

उज्जैन कैसे पहुँचे How to reach ujjain
हवाई सेवा द्वारा
उज्जैन से सबसे नजदीक इंदौर का अहिल्याबाई होलकर हवाई अड्डा है। देश के सभी प्रमुख शहरोसे हवाई जहाज उड़ान भरते है। इंदौर से उज्जैन ५५ कि मी की दुरी पर है।

रेल्वे द्वारा

उज्जैन भारत के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जुड़ा है। मुंबई, पुणे, चेन्नई , दिल्ली, कोलकाता,भोपाल,जयपुर, वाराणसी ,गोरखपुर ,रतलाम , अहमदाबाद ,बड़ौदा ,ग्वालियर ,हैदराबाद ,बैंगलोर जम्मू और कई बड़े शहरोसे रेल चलती है।

बस ,टैक्सी द्वारा

उज्जैन राज्य परिवहन की सार्वजनिक बसों द्वारा जुड़ा है।
प्रमुख शहरोसे उज्जैन की दुरी :- भोपाल  १८३ कि.मी., इंदौर ५५ कि.मी, ग्वालियर ४५० कि.मी, अहमदाबाद ४०० कि.मी. इन शहरों से उज्जैन के लिए नियमित रूप से बसे  चलती है।
उज्जैन में कितने दिन के लिए रूम बुक करे  :-  २ दिन

उज्जैन में रूम कहाँ  बुक करे ? 

Where to book the room in Ujjain?

उज्जैन में बहुत सारे होटल है। महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट के भक्त निवास में ४०० से लेकर १२०० रू.तक ऑनलाइन रूम  बुक कर सकते है।महाकालेश्वर मंदिर को लगकर ही भक्त निवास है। भक्तनिवास में रूम बुक करने से मंदिर आने जाने में आसानी होगी। 

 महाकालेश्वर की भस्म आरती

भस्म आरती का समय :- सुबह ४ बजे
भस्म आरती के लिए ड्रेस कोड :- पुरुषो को धोती और महिलाओ को साडी पहनना अनिवार्य

भस्म आरती बुकिंग कैसे करे ? How to book aasha aarti?

भस्म आरती को उपस्थित रहने के लिए टोकन(टिकट) एक दिनपहले लेना जरुरी होता है। टोकन दो प्रकार से प्राप्त कर सकते है।
१.महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती काउंटर पर जाकर
भस्म आरती काउंटर पर सुबह १०.३० से १२.३०  के बिच  पहचान पत्र ( आधार कार्ड) दिखाकर फार्म लेना होता है। उसमे सही जानकारी भरकर ११.३० से २.३० के बिच आधार कार्ड की फोटो कॉपी लगाकर जमा करना होता है।अगर फार्म को स्वीकृति मिल गई तो शाम ७ बजे के बाद मोबाइल पर SMS प्राप्त होता है।शाम  ७.३० से १० बजे तक SMS दिखाकर आपको भस्म आरती का टोकन दिया जाता है। काउंटर पर भस्म आरती का टिकट पहले आओ पहले पाओ बेसिस पर होता है। टोकन मुक्त में दिया जाता है।
२.ऑनलाइन
एक महीने पहले  मंदिर ट्रस्ट के वेब साईट पर जाकर आप भस्म आरती का टिकट एडवांस में बुक कर सकते है। उसके लिए १०० रु. ऑनलाइन पे करना होता है।

भस्म आरती , भक्त निवास रूम बुकिंग और VIP दर्शन टिकट ऑनलाइन  कैसे बुक  करे ?

निम्न मंदिर ट्रस्ट के वेब साइट के लिंक पर क्लिक करे
http://dic.mp.nic.in/ujjain/mahakal/default.aspx
वेब साईट ओपन होने के बाद मैन मेनू दिखेगा
HOME                Bhasm Arati          Dhramshala      Paid Darshan Ticket
Bhasm Arati पर क्लिक करना है। आपके सामने एक महीने का केलिन्डर ओपन हो जायेगा। कितनी सीटे उपलब्ध है। उसकी संख्या भी दिखेगी। जिस तारीख का भस्म आरती का बुकिंग करना चाहते है। उस तारीख पर क्लिक कर दे। एक फॉर्म आपके सामने ओपन हो जायेगा। उसमे मुख्य आवेदन कर्ता  का नाम ,मोबाइल नबर ,ईमेल आईडी,पता डालना होगा। Applicant Photo में मुख्य आवेदन कर्ता का फोटो jpg/jpeg format में उपलोड करना होगा। आगे के कॉलम में ID Proof No. डालना होगा। उसके सामने ही ID Proof मतलब आधार कार्ड की फोटो jpg/jpeg format में उपलोड करनी होगी। निचे आपके साथ जाने वाले फैमिली मेंबर के नाम,मुख्य आवेदन कर्ता से रिलेशन  और ID Proof का नंबर और फोटो अपलोड करनी होगी। उसके बाद निचे Permission Name में तीन मंडपम के नाम दिखेंगे
Kartikey Mandapam
Ganpati Mandapam
Nandi Mandapam
जिस मंडपम में  आप भस्म आरती को उपस्थित रहना चाहते है।उस मंडपम का नाम सिलेक्ट करना होगा। नंदी मंडप से भस्म आरती का दृश्य अच्छीतरह से दिखता है। नंदी मंडपम सिलेक्ट करना  है।उसके बाद Check Availiability  पर क्लिक करना होगा। अगर सीटे उपलब्ध है तो Available दिखायेगा। प्रति व्यक्ति १०० के हिसाब से टोटल अमाउंट दिखेगी।Payment mode में से डेबिट कार्ड ,क्रेडिट कार्ड ,नेट बैंकिंग सिलेक्ट करना है। और पेमेंट प्रोसीजर पूरी करके। भस्म आरती का प्रिंट आउट निकालना है। 
ऊपर दिए भस्म आरती बुकिंग के स्टेप्स अनुसार रूम बुकिंग Darmshala पर क्लिक करके और VIP दर्शन टिकट Paid Darshan Ticket पर क्लिक करके बुक करना है।

भस्म कैसे बनाया जाता है ?

गाय के गोबर से बने कंडे ,शमी ,पीपल ,पलाश ,बड़ ,अमलतास और बेर की लकड़ियों को जलाकर जो  भस्म प्राप्त होता है। उसे कपड़े से छान लिया जाता है। इसी भस्म को शिवजी को अर्पित किया जाता है। 

उज्जैन का इतिहास Ujjain History 

महाभारत व् पुराणों  उल्लेख  अनुसार श्रीकृष्ण व  बलराम यहाँ महर्षि सांदीपनी के आश्रम में विद्याप्राप्त करने हेतु आये थे। कृष्ण की एक पत्नी मित्रवृंदा उज्जैन की राजकुमारी थी।महाकवि कालिदास उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्न में से एक थे। मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के पुत्र अशोक यहाँ के राज्यपाल  रहे थे। मौर्य सम्राज्य के पतन के बाद सातवाहनों उज्जैन को कब्जे में कर लिया। सातवीं शताब्दी में उज्जैन कन्नौज के हर्षवर्धन साम्राज्य में विलीन हो गया। हर्षवर्धन के मृत्य के पछात उज्जैन गुर्जर परमारों के अधीन रहा। दिल्ली का सुल्तान शमशुद्दीन इल्तमिश उज्जैन  आया  और बुरी तरह लूटपाट की प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थलों को नष्ट कर दिया। सन १७३७ में उज्जैन सिंधिया वंश अधिकार में आया। राणोजी सिंधिया ने महाकालेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।

शिवपुराण महाकालेश्वर की कथा

Mahakaleshwar story as per shivpuran 

अवंती (उज्जैन)नगरी में वेदप्रिय नाम के ब्राम्हण रहा करते थे। अपने घर प्रति दिन शिवलिंग का निर्माण कर शास्त्र विधि से शिव की पूजा करते थे। शिवजी की आराधना के फलस्वरूप उन्हें चार पुत्र हुए। वेदप्रिय के अनुरूप ही उनके चारो पुत्र तेजस्वी और गुनी थे।उनके नाम  देवप्रिय ,प्रियमेधा , संस्कृत और सुवृत थे।दूषण  नाम के  असुर को ब्रम्हा से अजेयता का वर मिला था।दूषण धर्म कार्य में विघ्न उत्त्पन कर लोगो को सताता था। एक दिन उसने उज्जैन पर आक्रमण कर दिया चारो और उत्पात  मचाने लगा। वेदप्रिय और उसके पुत्र असुर से डरे नहीं। उज्जैन नगरी के सभी ब्राम्हण असुर के आक्रमण से  घबराने लगे  तब चारो शिव भक्त बन्धुओने सभी उज्जैन वासी  लोगो को  आस्वासन भरोसा देते हुए कहा "भगवान शिव पर भरोसा रखे असुर हमारा कुछ भी बिघाड नहीं पायेगा। उसके बाद चारो बंधू शिवजी का पूजन कर उनकी तपस्या में तल्लीन हो गए। दूषण तपस्या में लीन उन ब्राम्हण बंधू के पास पहुँच गया। उनको ललकार कर डराने लगा। लेकिन ब्राम्हण बंधू पर उसका असर नहीं हुवा। वह अपने तपस्या में लीन रहे। दूषण ने उनके प्राण लेने हेतु शस्र उठाया तभी विराट भयंकर रूपधारी शिव प्रकट हुए। दूषण को कहा तुज जैसे पापी का नाश करने मै " महाकाल प्रकट" हुआ हूँ।महाकाल के हुँकार मात्र से ही दूषण भस्म हो गया। शिवभक्त ब्राम्हण बंधू पर शिवजी प्रसन्न हो गए और मन चाहा वर मांगने को कहाँ।चारो भाइयो ने हाथ जोड़कर  विनम्रतापूर्वक   शिवजी को कहा। हे प्रभु आम जनता के कल्याण तथा उनकी रक्षा करने हेतु उज्जैन में हमेशा के लिए विराजिए। दर्शनार्थी मनुष्योंका सदा उद्धार करे। तभी से भगवान शिव महाकालेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए।  

उज्जैन के दर्शनीय स्थल :-

श्री बड़े गणेशजी मंदिर

महाकालेश्वर मंदिर के पीछे प्रवचन हॉल के सामने बड़े गणेशजी  का मंदिर है। श्री गणेश जी की विशाल और कलापूर्ण मूर्ति प्रतिष्ठित है। इस मूर्ति का निर्माण विख्यात विद्वान स्व. पं. नारायणजी व्यास ने किया था। इस मंदिर  में पंचमुखी हनुमानजी की विलोभनीय आकर्षक मूर्ति प्रतिष्ठित है। भीतरी भाग में नवग्रह मंदिर और कृष्ण यशोदा की प्रतिमाये विराजित है। बड़ा गणेश जी को महिलाये अपने भाई के रूप में मानती है ,एंव रक्षा बंधन के पावन पर्व पर राखी पहनाती है।

हरसिद्धि मन्दिर

हरसिद्धि मंदिर महाकालेश्वर मंदिर से ७०० मीटर की दुरी पर है। इस मंदिर को ५१ शक्ति पीठो मेसे एक माना जाता है। यहाँ सती की कोहनी गिरी थी। माता हरिसिद्धि राजा विक्रमादित्य की कुल देवी थी। माता की प्रतिमा अत्यंत मनमोहक तथा प्रसन्न मुद्रा में है।

राम घाट

हरसिद्धि मंदिर से ३०० मीटर की दुरी क्षिप्रा नदी पर रामघाट बना है। ऐसी धारणा  है की शिप्रा नदी भगवान विष्णु के शरीर से निकली है। इसमे स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। क्षिप्रा नदी में श्रीराम ने अपने पिता दशरथ का पिंड दान किया था। क्षिप्रा नदी में सायं की आरती का दृश्य अत्यंत विलक्षण होता है। घाटों पर विभिन्न देवी -देवताओ के नए पुराने मंदिर भी है।   

श्री चिंतामन गणेश मंदिर

रामघाट से चिंतामन गणेश मंदिर ५ कि. मी. दुरी पर स्थित है।मंदिर में इच्छामन ,चिन्तामण ,चिन्ताहरण गणेश के नाम से तीन प्रतिमाएँ है। श्रद्धालु यहाँ मन्नत के धागे बांधते है और मनोकामना पूर्ण होने पर फिर से यहाँ दर्शन करने एते है।

महर्षि सांदीपनि आश्रम

सांदीपनि आश्रम महाकालेश्वर मंदिर से मंगलनाथ मार्ग पर स्थित है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण ,बलराम ने शिक्षा प्राप्त की थी। यहाँ मंदिर में श्रीकृष्ण ,बलराम और सुदामा की मूर्तियाँ है।

गढ़कालिका मंदिर

सांदीपनि आश्रम से १ किलोमीटर की दुरी पर गढ़कालिका मंदिर स्थित है। महाकवि कालिदास के तप से प्रसन्न होकर गढ़कालिका ने उन्हें प्रकट होकर दर्शन दिया था। देवी के आशीर्वाद से ही कालिदास को कवित्व की प्रतिभा प्राप्त हुई थी।

मंगलनाथ मंदिर

उज्जैन को मंगल की जननी कहा जाता है। जिन व्यक्ति के कुंडली में मंगल अनिष्ट रहता है ,वे लोग मंगल ग्रह के शांति के लिए यहाँ पूजा पाठ करवाने आते है। हर मगलवार के दिन यहाँ श्रद्धालु की काफी भीड़ रहती है।

कालभैरव मंदिर

सांदीपनि आश्रम से १ किलोमीटर की दुरी पर कालभैरव मंदिर स्थित है। पुराणों के अनुसार अष्टभैरवों में कालभैरव प्रमुख है। कालभैरव की प्रतिमा अदभूत और चमत्कारिक है। इस मंदिर में मदिरा का प्रसाद चढ़ाया जाता है। मूर्ति के मुख में छिद्र नहीं है। फिर भी मूर्ति के मुख में मद्य का पात्र लगातेहि खाली होजाता है।यह मंदिर अत्यंत जागृत है।

द्वारकाधीश गोपाल मंदिर

महाकालेश्वर मंदिर से १ किलोमीटर की दुरी पर गोपाल मंदिर स्थित है। मंदिर में गोपाल कृष्ण एंव राधा की आकर्षक प्रतिमाएँ है।  
उज्जैन यात्रा का youtube वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करे  




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