Saturday, December 30, 2017

Jagannath Puri yatra Complete Guide in Hindi

पूरी कैसे पहुंचे ?

How to reach Puri?

रेल द्वारा

जगन्नाथ पूरी भारत के सभी प्रमुख शहरोसे  से ट्रेने चलती है। जिसमें नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, ओखा, अहमदाबाद, तिरुपति आदि के साथ सीधे एक्सप्रेस और सुपर फास्ट ट्रेन लिंक हैं। कुछ महत्वपूर्ण ट्रेन कोलकाता (हावड़ा) पूरी हावड़ा एक्सप्रेस, जगन्नाथ एक्सप्रेस, नई दिल्ली, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस इत्यादि ।

फ़्लाइट द्वारा By Flight

पूरी में कोई हवाई अड्डा नहीं है।सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा भुवनेश्वर हवाई अड्डा है।भुवनेश्वर से पूरी की दुरी 60 किमी है।

सड़क मार्ग द्वारा

ओडिशा में सड़कों का अच्छा नेटवर्क है।ओडिशा से कई एक्सप्रेस-वे और रोड-वे गुजरते हैं, ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आता है, जो चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों को जोड़ता है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 5, 6, 23, 42 और 43 राज्य से होकर गुजरते हैं।
पूरी यात्रा का सबसे अच्छा समय
Best time to visit puri
पूरी बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित है। यहां का मौसम समुद्र से बहुत प्रभावित होता है। बारिश के मौसम में यहाँ भारी बारिश होती है। गर्मियों का मौसम गर्म होता है और तापमान 27 से लेकर 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।अक्टूबर से मार्च तक पूरी की यात्रा का सबसे अच्छा समय है। 

जगन्नाथ पूरी यात्रा का प्लानिंग कैसे करे ?

How to plan for the journey of Jagannath?

जगन्नाथ पूरी में कितने दिन के लिए रूम बुक करे :-
जगन्नाथ पूरी के सभी दर्शनीय स्थल को भेट देने के लिए दो दिनो के लिए रूम बुक करे।

जगन्नाथ पूरी में कहां रूम बुक करे ?

where to book room in jagannath puri?

जगन्नाथ पूरी के मंदिर परिसर को लगकर बहुत सारी होटले है। धर्मशाला भी है। समुद्र बिच को लगकर न्यू मरीन ड्राइव रोड पर भी होटल है।

मंदिर प्रशासन के भक्त निवास :-

नीलाचल भक्त निवास और श्री गुंडिचा भक्त निवास में ६०० से ११४० तक AC, non Ac रूम उपलब्ध है।
दोनों भक्त निवास में रूम ऑनलाइन बुक करने के लिए मंदिर प्रशासन की वेब साई www.jagannath.nic.in पर जाकर बुक कर सकते है।

जगन्नाथ मंदिर के बारे में 

About Jagannath Temple

जगन्नाथ मंदिर ओडिशा राज्य के पूरी शहर स्थित है।जगन्नाथ का मतलब जगत के नाथ जगन्नाथ। जगन्न्थ पूरी चार धाम में से एक धाम है। यह मंदिर वैष्णव सम्प्रदाय का मंदिर है। जो श्री कृष्ण को समर्पित है। जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ उनके बड़े भाई बलभद्र (बलराम) और बहन सुभद्रा के साथ विराजते है। पुरी के अनेक नाम हैं। इसे पुरुषोत्तमपुरी तथा शंखक्षेत्र भी कहा जाता है,क्योंकि इस क्षेत्र की आकृति शंख के समान है। शाक्त इसे उड्डियान पीठ कहते हैं। विश्व की सबसे बड़ी रसोई भी यहीं है।जहां रथ यात्रा उत्सव के दिनों में प्रतिदिन एक लाख लोगों के लिए भोजन बनता है और सामान्य दिनों में 25 हजार लोगों की रसोई तैयार होती है।

मंदिर की वास्तुकला

Temple architecture

जगन्नाथ मंदिर चार लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है और बिस फुट ऊंची चहारदिवारी से घिरा है। यह मंदिर कलिंग शैली से बना है। मंदिर की ऊंचाई २१४ फुट है। जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर सुदर्शन चक्र बना है।जो अष्ट धातुओं से बना है। इसे नीलचक्र कहा जाता है, और यह लगभग 11 मीटर (36 फीट) की परिधि के साथ 3.5 मीटर (11 फीट 8 इंच) ऊंचा है।
मंदिर के चारों दिशामे चार द्वार है।
१) सिंह द्वार:-  पूर्व दिशा में है। जहां से आम लोग को प्रवेश दिया जाता है।
२) अश्व द्वार:-  दक्षिण दिशा में है। इस द्वार से VIP लोग प्रवेश करते हैं।
३) हाथी द्वार:- पश्चिम दिशा में है। इस द्वार से पुजारी पंडित प्रवेश करते हैं।
४) व्याघ्र द्वार:- उत्तर दिशा में है। इस द्वार से विकलांग , बीमार व्यक्ति प्रवेश करते हैं।

जगन्नाथ पूरी के दर्शनीय स्थल
Places to Visit in Jagannath Puri

चिल्का झील

चिल्का झील प्रमुख आकर्षण   :- डॉलफिन मछली और अनेक प्रजाति के देश विदेश से आये पछि।
पुरीसे से चिल्का झील की दुरी :- ५५ की मी
चिल्का जाने के लिए बस        :- OTDC (Odisa Torisum Development Corp.) की बसे चलती है।प्राइवेट बस भी चलती है।
चिल्का बस ऑनलाइन टिकट बुकिंग :- OTDC की वेबसाइट visitodisha.org पर जाकर ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते है।
OTDC बस किया          :- रू. ३२०/- प्रति व्यक्ती
OTDC बस कहासे पकड़े :- Panthanivas, Puri.
OTDC बस टाइम          :- सुबह ७ बजे

पूरी जाये तो अवश्य चिल्का झील जाये। चिल्का झील में अनेक छोटे द्वीप बने हुए है। पक्षी द्वीप ,हनीमून द्वीप ,परीकुद द्वीप , मलूद द्वीप ,निर्मलझरा द्वीप ,कालीजई द्वीप, नालंबना द्वीप बने है। इन द्वीपों पर जाने के लिए डीज़ल इंजिन की बोट चलती है। द्वीप पर बोट से जाने का शेयर बेसिस किराया प्रति वक्ती २०० रू और प्राइवेट बोट का किराया २५०० से ३५०० लेते है। द्वीप पर जाने का तीन घंटे का सफर होता है। तक इन द्वीपों की यात्रा जीवन में आप कभी भूलेंगे नहीं। इस झील में डॉल्फिन भी पाई जाती है। इसके जल में मछली, झींगे व केकड़ों आदि की 150 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।एशिया का सबसे बड़े खारा पानी का झील है।चिलिका झील ७० किलोमीटर लम्बी और ३० किलोमीटर चौड़ी है।यह पुरी, खुर्दा और गंजम के तीन जिलों की सीमाओं के साथ चलती है और अंत में एक छोटे मुंह के माध्यम से बंगाल की खाड़ी में मिलती है। दिसम्बर से जून तक इस झील का पानी खारा रहता है। बरसात के मौसम में इसका पानी मीठा हो जाता है। इसकी औसत गहराई 3 मीटर है।इस झील में लगभग 160 प्रजातियों के पछी पाये जाते है।देश विदेश दूर दराज़ के क्षेत्रोंसे यहाँ पछी उड़ कर आते हैं।कुछ पछी तो लगभग १२००० किमी से भी ज्यादा की दूरियाँ तय करके चिल्का झील पंहुचते हैं।

साक्षी गोपाल मंदिर 

यह भुवनेश्वर राजमार्ग पर पूरी से २० कि.मी. दुरी पर स्थित है।पुरी के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक साक्षी गोपाल मंदिर कलिंग शैली में बनाया गया है। बहुत ही खूबसूरत मंदिर है।यहाँ श्री कृष्ण राधा के साथ बसते है।यह मंदिर में पूरे वर्ष के दौरान पर्यटकों की भीड़ रहती है।कहा जाता है कि जब तक आप इस मंदिर का दर्शन नहीं करेंगे तब तक जगन्नाथ दर्शन पूरा नहीं होता है।मंदिर में प्रवेश मुक्त है।पण्डा से सावधान रहे श्रद्धालु को लुटने का काम करते है।मंदिर में प्रवेश के लिए टिकट लेने को कहते है जो की मुक्ति है। 

गुंडिचा मंदिर

यह मंदिर जगन्नाथ मंदिर से २ कि.मी ग्रांड रोड के दूसरे छोर पर स्थित है।गुंडिचा श्रीकृण की मौसी थी। यहां रथ यात्रा के अलावा ज्यादा गतिविधि नहीं होती है।रथयात्रा' के दौरान कृष्णा,सुभद्रा और बलभद्र की मूर्तियां इस मंदिर की यात्रा करते हैं और वहां रहती हैं। 

लोकनाथ मन्दिर

जगन्नाथ मन्दिर से यह एक किलोमीटर दुरी पर स्थित है।यह बहुत ही प्रसिद्ध शिव मन्दिर है।माना जाता है भगवान राम ने इस जगह पर अपने हाथों से इस शिवलिंग की स्थापना की थी। यह 'शिवलिंग' पानी के नीचे है। क्योंकि पानी लगातार उसके ऊपर से निकला है। यह केवल शिवरात्रि के त्योहार पर पूजा के लिए सभी पानी निकाला जाता है।तभी 'शिवलिंग' देखा जा सकता है।

चन्दन तालाब 

चन्दन जगन्नाथ मंदिर से 2 किमी के आसपास ग्रांड रोड पर स्थित है। यह वह जगह है जहां 42 दिन अप्रैल मई में चंदन समारोह आयोजित किया गया है। 

मार्कण्डेश्वर शिव मंदिर

मार्कण्डेश्वर शिव मंदिर जगन्नाथ मंदिर से लगभग 4 किमी दुरी पर पुरी-ब्रह्मगिरी रोड के करीब स्थित हैं। यह मंदिर पुरी धाम में पांच पंच तीर्थों में से एक है।पेड़ों से घिरा हुआ है और घाटों की बहुत ही खूबसूरत जगह है।दक्षिणी हिस्से में पर्यटकों के लिए स्नान करने वाले घाट उपलब्ध हैं।लोग पिंड दान,मुंडन आदि जैसे अनुष्ठानों को घाट पर करते दिखते है। 

बेदी-हनुमान मंदिर

पुरी रेलवे स्टेशन से आधा किलोमीटर दूर बेदी हनुमान का यह मंदिर है। जगन्नाथ मंदिर में समुद्र बार बार क्षति पहुँचता था। मंदिर के सुरक्षा के लिए भगवान जगन्नाथ ने हनुमान जी को नियुक्त किया था। लेकिन हनुमानजी समुद्र तट छोड़कर बार बार जगन्नाथ के दर्शन करने मंदिर चले आते थे।समुद्र मौके का फायदा उठा कर फिर से मंदिर को नुकसान पहुँचता था। इसलिए भगवान जगन्नाथ ने हनुमान जी के पैरो मे बेड़ी दाल दी ताकि हनुमानजी वापस मंदिर ना आ सके। इस लिए इसे बेदी हनुमान कहते है।

सोनार गौरांग

यह बेदी-हनुमान मंदिर के नजदीक है। यहां 'श्री गौरव महाप्रभाव' की स्वर्ण मूर्ति है।

चकनारायण और चक्रधर 

 'बेदी-हनुमान मंदिर' के सामने 'चकनरायण' का एक पुराना मंदिर है समुद्र तट के पास इस मंदिर के पीछे 'चक्र-तीर्थ' है जिस लकड़ी से 'विश्वकर्मा' ने पहली मूर्ति बनाई थी, वह इस स्थान पर समुद्र से बाहर निकल गई थी।
अष्टचंडी मंदिर
आठ चांदियों को एक साथ अष्टचंडी कहा जाता है। जो माता मंगला, बिमल, सर्वमंगल,अर्धसनी, अलम्बा, दक्षिणकिनकाल, मारिचिका और हराचंडी शामिल हैं।

यमेश्वर(जमेश्वर ) मंदिर

जगन्नाथ मंदिर की दक्षिण-पश्चिमी दिशा में लगभग आधे मील दूर, भगवान शिव को समर्पित एक छोटा मंदिर है। यह पुरी का एक महत्वपूर्ण शिव मंदिर है। भगवान जगन्नाथ मंदिर की यात्रा करने वाले भक्त भी यमेश्वर मंदिर में जाते हैं। यहाँ शिवलिंग है जो वर्तमान ग्राउंड लेवल से 6.40 मीटर नीचे स्थित है। पांडव ने यहाँ एक रात गुजारी और अपनी यात्रा की सुरक्षा के लिए भगवान विष्णु की पूजा की थी।

चक्रतीर्थ (चक्र नरसिम्हा) मंदिर

पुरी का एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्री केंद्र है। यह पुरी शहर के उत्तरी छोर और भगवान जगन्नाथ मंदिर से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर भगवान नरसिह को समर्पित है। स्थानीय लोगों को इस मंदिर में चक्र नरसिंह मंदिर, चक्र नृसिंघ मंदिर और चक्र नारायण मंदिर जैसे विभिन्न नामों में जाना जाता है।
रामचंडी मंदिर
रामचंडी मंदिर पूरी रेलवे स्टेशन के नजदीक स्थित है। यह मंदिर देवी रामचंडी को समर्पित है। यह मंदिर जमीन से 40 फीट ऊंचा और दक्षिण मुखी है।रामचंडी देवी की छ भुजा की सुन्दर मूर्ति विराजित है।भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए यहाँ देवी की पूजा की थी।

अलवरनाथ (अल्वानाथ) मंदिर

यह मंदिर पूरी से २३ कि.मी ब्रह्मगिरि में स्थित है। पुरी और सातपाड़ा (चिलका गेट) के बीच आता है।अलवरनाथ मंदिर विष्णु को समर्पित है।माना जाता है की कृष्णपक्ष के पुरी में भगवान जगन्नाथ नहीं होते तब भगवान जगन्नाथ अल्वानाथ मंदिर में अलवरनाथ देव के रूप में प्रकट होते हैं।कृष्णपक्ष के समय जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करने के बजाय लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते है। 

जगन्नाथ पूरी रथ यात्रा

रथ यात्रा कब निकलती है :- हर साल आषाढ़ माह के शुक्लपक्ष की द्वितीया को

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा यह एक बड़ा उत्सव है, रथ यात्रा महज भारत के ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सवों में से एक है। इस भव्य त्यौहार को मनाने के लिए पुरे विश्व भर से लोखो की संख्या में लोग पूरी पहुँचते हैं।इस दौरान रथ को अपने हाथों से खिंचना बेहद शुभ माना जाता है।यह दस दिवसीय महोत्सव होता है। इस दस दिवसीय महोत्सव की तैयारी का श्रीगणेश अक्षय तृतीया को रथ के निर्माण से होता है। यह रथ लकड़ी के बनाये जाते है।रथ यात्रा के लिए भगवान जगन्नाथ ,बलराम, और सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथ निर्मित किए जाते हैं। रथ प्रति वर्ष नए बनाये जाते हैं। 
रथ की ऊंचाई और रंग
भगवान जगन्नाथ का रथ - 45.6 फीट ऊंचा. रथ को पहिये - १६ रथ का रंग - लाल और पीला
बलरामजी का रथ             - 45 फीट ऊंचा.    रथ को पहिये - १४ रथ का रंग - लाल और हरा
सुभद्रा का रथ                  - 44.6 फीट ऊंचा . रथ को पहिये - १२ रथ का रंग - नीले और लाल रंग
रथ के नाम
भगवान जगन्नाथ का रथ - ' नंदीघोष' या 'गरुड़ध्वज'
बलरामजी का रथ            - तालध्वज
देवी सुभद्रा का रथ           - 'दर्पदलन' या ‘पद्म रथ’
रथ यात्रा के दिन सबसे आगे बलरामजी का रथ, उसके बाद बीच में देवी सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ होता है।तीनो रथ को श्रद्धालु खिंच कर मुख्य मंदिर जगन्नाथ मंदिर से उनकी मौसी के घर गुंडीचा मदिर ले कर जाते हैं।इसके बाद दूसरे दिन रथ पर रखी जगन्नाथ जी, बलराम जी और सुभद्रा जी की मूर्तियों को विधि पूर्वक उतार कर गुंडिचा मंदिर में लाया जाता है और अगले 7 दिनों तक श्रीजगन्नाथ जी यहीं निवास करते हैं।इसके बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी के पुन: गुंडिचा मंदिर से भगवान के रथ को खिंच कर जगन्नाथ मंदिर तक लाया जाता है। जिसे बहुडा यात्रा कहा जाता है।मंदिर तक लाने के बाद प्रतिमाओं को पुन: गर्भ गृह में स्थापित कर दिया जाता है।

जगन्नाथ पूरी से कोणार्क सूर्य मंदिर की यात्रा के जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे

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