Wednesday, October 11, 2017

Rameshwaram Complete travel guide

रामेश्वरम सम्पूर्ण यात्रा 

Rameswaram  Complete Trip Guide 


रामेश्वरम कैसे पहुँचे :-

How to Reach Rameswaram


कन्याकुमारी यात्रा करके  रामेश्वरम भी पहुंचा जा सकता है। 
त्रिवेंद्रम केरला यात्रा की जानकारी के लिए यहाँ  क्लीक करे 
कन्याकुमारी यात्रा की जानकारी के लिए यहाँ क्लीक करे  

रामेश्वरम  जाने के लिए  मदुरई  जो तमिलनाडु का सबसे बड़ा शहर है।उससे गुजरकर जाना होता है। रामेश्वरम के लिए भारत के सभी प्रमुख शहरों से डाइरेक्ट ट्रेन सुविधा उपलब्ध  है।अगर आपके शहर से  रामेश्वरम के लिए डायरेक्ट ट्रैन नहीं है, तो मदुरई जाने के लिए अवश्य होगी ही।मदुरई से कुल ८९ ट्रेने गुजरती है।  मदुरई से रामेश्वरम ट्रैन से भी जा सकते है या बस से भी जा सकते हो। 


रामेश्वरम के लिए प्रमुख शहरो से  जाने वाली ट्रैन के नाम   

Name of train from major cities for Rameswaram


Train No.        Train Name                         Departs

18496      Bhubaneswar - Rameswaram        12:00 (Weekly)  Friday

16779     Tirupati - Rameswaram  Exp             12:40     Sunday ,Tuesday, Friday  

16101     Chennai - Boat Mail (Rames.Exp.)        19:15    Daily

22661     Chennai Sethu SF Express              17:45     Daily 

16618     Coimbatore- Rames.Exp.                19:45     Tuesday

22622     Kanyakumari Rames. Express        22:00    Sunday ,Tuesday, Friday    

16734      Okha - Rames. Express                  06:45   Thursday

14265     Varanasi - Ramnagar Express         08:25   Daily

16794     Faizabad - Rames. (Shraddha Sethu)     23:55   Wednesday


Madurai To rameshwaram Daily Passenger 

Train No.               Train Name                            Departs

56723         Madurai Rameswaram Pass                  6:50

56829         Tiruchirappalli - Ram   Pass                   09:40
 
56721         Madurai Rameswaram Pass                  12:40

56725         Madurai Rameswaram Pass                  18:25


Best Time to visit Rameshwaram 

रामेश्वरम यात्रा करने का अच्छा समय 

सर्दियों के दिनों में रामेस्वरम का मौसम बहुत सुहाना होता है। नवम्बर  से फेब्रुवारी के बिच की यात्रा काफी सुखद होगी। 


रामेश्वरम का  ऋतु अनुसार  तापमान 

Seasons            Months                  Temperature

Summers         March -June                26°c - 43°c

Monsoon        July- October             28°c - 36°c

Winter        November - February      18°c - 30°c 


रामेश्वरम में कहाँ  रुके 

Where to stay in Rameshwaram

१) रामेश्वरम मंदिर परिसर को लगाकर ही बहुत सारी प्रायवेट होटले  है।       ऑनलाइन होटल रूम  बुकिंग वेबसाइट पर जाकर एडवांस में होटल रूम   बुक कर सकते हो। 

२) मंदिर परिसर में धर्मशाला भी है। मुक्त में या नाममात्र शुल्क में कॉमन  रूम मिलती  है।  एडवांस में बुक नहीं कर सकते। वक्त पर मिलने की कोई गारंटी नहीं। 

३) रामेश्वर देवस्थान की रूम रू.५०० उपलब्ध है। 
देवस्थान की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन एडवांस में तीन दिन पहले  बुक कर सकत हो। 

 रामेश्वरम के सभी दर्शनीय स्थल देखने के लिए कितने दिन रामेश्वरम में रुकना होगा :- २ दिन (होटल रूम दो दिन के लिए बुक करे )

रामेश्वरम शहर के बारे में 

About rameshwaram City

रामेश्वरम तमिलनाडु के चेन्नई शहर से ५९२ किलो मीटर की दुरी पर है। रामनाथपुरम जिले में स्थित है। हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारो ओर घिरा हुआ शंख आकार का टापू है। पहले रामेश्वरम जाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जाता था। अंग्रेजोने जर्मन इंजीनियर की मदत से खाड़ी पर २ किलो मीटर लम्बा रेल का पुल बनवाया जो आज भी रामेश्वरम जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 

रामेश्वरम की पौराणिक कथा 

Mythology of Rameswaram

पौराणिक कथा अनुसार भगवान श्री राम ने  लंका पर आक्रमण करके रावण को युद्ध में पराजित कर उसका वध किया था। सीता माता के साथ  लौटते समय गंधमादन पर्वत पर विश्राम किया।वहाँ के  ऋषि मुनियोंने  श्री राम  को बताया रावण ब्रम्हं कुल का था। उन को  ब्रंम्हहत्या का पाप लगा है। ब्रम्ह हत्या का पाप शिवलिंग की पूजा करने से ही दूर  हो सकता है। भगवान श्री राम ने ऋषि मुनियोंने की बात मानकर हनुमानजी को शिवलिंग लाने  के लिए कैलास पर्वत भेजा। हनुमानजी ने छलांग लगाई और कैलास पर्वत पहुंचे। शिवजी तपस्या में लीन थे। हनुमानजी इंतजार करते रहे कब शिवजी की आँखे खुलेगी। उधर  शिवलिंग पूजा का मुहूर्त नजदीक आ रहा था। सभी हनुमानजी की प्रतीक्षा करने लगे। सीता माता चिन्तित हो गयी। पूजा का मुहूर्त निकल  जाने की भय से सीता माताने रेत से ही शिवलिंग का निर्माण किया।  श्रीराम जी ने सीतामाता निर्मित शिवलिंग की स्थापना मुहूर्त अनुसार की और शिवलिंग की  पूजा की। और ब्रम्ह हत्या के दोष और पाप  से मुक्त हो गये।  थोड़ी देर में कैलास पर्वत से हनुमान जी शिवलिंग ले कर पहुंच गये। उन्होंने देखा  शिवलिंग की स्थापना हो चुकी है। उनको बड़ा दुःख हुवा।हनुमानजी नाराज हो कर रूठ गये।श्रीराम ने हनुमान जी की नाराजगी को भाप लिया। श्रीराम ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन हनुमानजी मानने  को तैयार नहीं थे। आखिर में रामजी ने हनुमानजी को कहाँ अगर  उनके द्वारा स्थापित शिवलिंग हनुमान  उखाड़ देंगे तो। हनुमानजी द्वारा  कैलास पर्वत से लाये शिवलिंग  की स्थापना कर दूंगा। हनुमानजी ने शिव लिंग उखाड़ने को  अपनी पूरी शक्ति लगा दी। लेकिन हनुमानजी शिवलिंग को उखाड़ नहीं सके। अन्ततः मूर्छित हो कर गंधमादन पर्वत पर जा गिरे। होश आने पर हनुमानजी को अपनी गलती का अहसास  हुआ। श्रीराम से उन्होंने क्षमा मांगी। भगवान श्रीराम ने हनुमानजी द्वारा लाये शिव लिंग को सीता माता द्वारा निर्मित शिवलिंग के नजदीक ही स्थापित कर दिया।

रामेश्वरम का  महात्म्य

Importance of Shri Rameshwaram Jyotirling  

रामेश्वरम चार धामों में से एक धाम है। और बारह जीतिर्लिंग में से एक ज्योतिर्लिंग है। रामेश्वरम को दक्षिण भारत की काशी माना जाता है। जो व्यक्ति गंगा जल से रामेश्वर शिव लिंग का सच्चे दिल से भक्तिपूर्वक अभिषेक और आराधना करेगा वह मोक्ष को प्राप्त होगा। 

रामेश्वर मंदिर के निर्माण का इतिहास 

History of the construction of Rameshwar Temple

इस मंदिर का निर्माण में कई राजाओ का योगदान रहा है। बहुत  सारे राजाओं ने अपने कार्यकाल में इस मंदिर के कुछ हिस्से का नयेसे निर्माण और पुनर्निर्माण किया।  इस मंदिर का निर्माण १२ शताब्दी  में श्रीलंका के राजा बाहु  ने मूल लिंग वाले गर्भगृह का निर्माण किया था। उसके बाद में १५ शताब्दी में उजवाईं सेतुपति राजा और वैश्य राजा ने गोपुरम का निर्माण करवाया था। १६ शताब्दी में तिरुमलय सेतुपति ने मंदिर के कुछ भाग का निर्माण किया था। बाद में मदुरई  के राजा विश्वनाथ नायक ने नंदी मंड़प का निर्माण किया। १७ शताब्दी में दलवाय सेतुपति ने गोपुरम निर्माण करना आरंभ किया। १८ शताब्दी में रविविजय सेतुपति ने देवताओ के शयन कक्ष और मंडप का निर्माण किया। इ.स.१८९७ से १९०४ के बिच देवकोट्टई के अलार  परिवार ने भव्य पूर्वी टॉवर का निर्माण किया।   १९०७ और १९२५ के उन्होंने   चुने के पत्थर की जगह  ग्रैनाइट का उपयोग करके  पुनर्निर्माण किया। लोगो से चंदा इकट्ठा  करके १९४७ और १९७५ में मंदिर के कुछ अंग का  पुनर्निर्माण  किया गया।


रामेश्वरम मंदिर की वास्तुकला 

Architecture Of Rameshwaram Temple

रामेश्वरम मंदिर १५ एकड़ में फैला हुवा है। द्रविड़ शैली से इसका निर्माण किया गया है। यह मंदिर तीन भागो में बना है। पूर्वी गोपुरम ,पच्छिमी गोपुरम,भीतर का गलियारा ओर बाहर का गलियारा । मंदिर के चारो ओर ऊंची दीवार बनी  है। जिसकी पूर्व से पक्ष्चिम की लम्बाई ८६५ फिट है और उत्तर से दक्षिण की लम्बाई ६५७ फिट है। मंदिर के बाहर का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा बना है। पांच फुट ऊंचे चबूतरे  पर  स्तंभ बने है।स्तंभ के आधार से छत बनी है। गलियारों की ऊंचाई ९ मी. और  परकोटे की चौड़ाई ६ मी. है। लम्बाई पूर्व पच्छिम में १३३ मी. और उत्तर दक्षिण में १९७ मी. है। मंदिर के प्रवेश द्वार ३८.४ मी. ऊंचा है। गलियारों में १२१२ स्तंभ  है। जो देखने में एक जैसे लगते है। बारीकी से देखने पर पता चलता है की हर एक स्तंभ  की कारीगरी एक दूसरे से अलग है।  हर एक स्तंभ पर शिल्प कला की अधभुत बेहतरीन कारीगरी की गयी है।  

रामेश्वरम में तीर्थ का महत्त्व  

Importance of tirth in Rameswaram

रामेश्वरम द्वीप पर कुल ६४ तीर्थ है। इनमे से २३ तीर्थ ही महत्वपूर्ण है।मुख्य  अग्नि तीर्थ मंदिर से १०० मीटर की दुरी पर है और २२ तीर्थ मंदिर के भीतर ही है। इन तिर्थो में स्नान करने से पापोंसे और रोगोसे मुक्ति मिलती है और शरीर में नई ऊर्जा आजाती  है । 

२२ तीर्थ के नाम 
१. महालक्मी तीर्थ             २. सावित्री  तीर्थ             ३. गायत्री तीर्थ 
४.सरस्वती तीर्थ                ५.सेतु माधव  तीर्थ         ६. गंधमाधना तीर्थ 
७.केवटचा तीर्थ                  ८.गवाया तीर्थ                ९. नल  तीर्थ 
१०.नीला तीर्थ                     ११. संकु  तीर्थ                १२.संक्कारा तीर्थ 
१३.ब्रह्माहथि तीर्थ               १४ .सूरिया तीर्थ             १५ .चंद्र तीर्थ             
१६ .गंगा तीर्थ                    १७ .यमुना तीर्थ              १८ .गया तीर्थ           
१९ . शिवा तीर्थ                  २० .सदयामीर्था तीर्थ       २१ .सर्व तीर्थ             
२२ .कोड़ी तीर्थ 


रामेश्वरम में दर्शनीय स्थल 

Places to visit in Rameswaram


रामेश्वरम में पहले दिन का यात्रा नियोजन 

First day trip planning in Rameswaram


१) रामनाथस्वामी मंदिर दर्शन 
रामनाथस्वामी मंदिर दर्शन करने से पहले क्या करना महत्त्व रखता है। 
अग्नि तीर्थ में स्नान :- अग्नि तीर्थ रामनाथस्वामी  मंदिर से १०० मिटर  की दुरी पर है। रामनाथ स्वामी मंदिर दर्शन करने से पहले अग्नि तीर्थ में स्नान करना महत्त्व रखता है।  क्योकि श्री राम ने रावण का वध करने के बाद अग्नि तीर्थ में स्नान किया था। रावण के हत्या के पाप से उन्हें मुक्ति मिली थी।अग्नि तीर्थ में स्नान करने के बाद गीले वस्र के साथ रामनाथस्वामी मंदिर  की ओर जाना है। 

२२ तीर्थ (कुंड )से स्नान  

मंदिर के अन्दर के २२ कुण्ड के पवित्र जल से स्नान करना होगा।२२ तीर्थ से स्नान करने के लिए टिकट लेना होगा मंदिर के बाहर  टिकट काउंटर बना है।  २२ तीर्थ  के नाम ऊपर बताये गये  है।यहाँ हर एक  कुंड के पवित्र जल से स्नान करने का अलग अलग महत्व है। बस इतना जान लीजिये यहाँ स्नान करने से पाप धूल जाते है। लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। रामनाथस्वामी के दर्शन का उसे अधिकार प्राप्त होता है। 

मुख्य रामनाथस्वामी  मंदिर में प्रवेश :-    
गीले वस्र बदल कर मुख्य मंदिर में प्रवेश करे। भीतर का दृश्य देख कर आपकी आँखे फटी की फटी रह जाएगी। बड़े बड़े पत्थर के शेकडो स्तंभ उस पर देवी देवता के  शिल्प बने है। भारतीय वास्तु कला का अद्भुत नमूना यहाँ देखने को मिलेगा।यहाँ दो शिव लिंग स्थापित है। हनुमानजी द्वारा कैलास पर्वत से लाया शिव लिंग ओर सीता द्वारा निर्मित रेत का शिव लिंग। सबसे पहले हनुमानजी द्वारा लाये शिव लिंग का दर्शन करले। श्री राम ने हनुमाजी को वरदान दिया था।हनुमानजी द्वारा लाये शिव लिंग का दर्शन करने के बाद ही सीता माता द्वारा निर्मित शिव लिंग का दर्शन करने से ही रामेश्वरम की यात्रा पूर्ण होगी। मंदिर के भीतर अनेक मंदिर है पार्वती माता मंदिर ,अम्बिका माता मंदिर , हनुमान मंदिर ,विसालाक्षी  मंदिर के निकट नौ ज्योतिर्लिंग है ,जो विभीषण द्वारा स्थापित किये थे। 
     

रामेश्वरम में दूसरे दिन का यात्रा नियोजन 

रामेश्वरम  निकट के दर्शनीय स्थल को भेट देना 

रामेश्वरम के निकट बहुत सारे छोटे मोटे मंदिर ओर तीर्थ है। वक्त की कमी के कारन सभी को भेट देना संभव नहीं होता इसलिए जिन स्थलों का दर्शन करना आवश्यक है उन्ही का समावेश किया है।      
तीन अलग अलग रास्ते पर बहुत सारे दर्शनीय तीर्थ ओर मंदिर है। 

कहाँ से बस या ऑटो रिक्शा मिलेगी 
अग्नि तीर्थ के निकट ही ऑटो रिक्शा और बस स्टैंड है। यहाँ से बस,कार, ऑटो ,भाड़े पर मिल जाएगी। 

१) गन्धमादन पर्वतम रास्ते के स्थल का दर्शन :-(दुरी ४ की मि) 


साक्षी हनुमान मंदिर :-
गन्धमादन  पर्वतम जाते वक्त रामेश्वरम मंदिर से २ की.मि.की दुरी पर साक्षी हनुमान मंदिर पहले लगता है। इस स्थान पर हनुमानजी ने श्री रामजी को सीता माता रावण के कब्जे में होने की खबर दी थी ओर प्रमाण के तौर पर सीतामाता की दि हुई अंगूठी श्रीराम को दिखाई थी। हनुमान जी का छोटा मंदिर बना हुवा है।   


पंचमुखी हनुमान मंदिर :-

गन्धमादन  पर्वतम के नजदीक ही पंचमुखी हनुमान मंदिर है। यहाँ हनुमानजी की काले रंग की बड़ी प्रतिमा है। यह प्रतिमा धनुषकोडि गांव से लाकर  स्थापित की गई है। 

गन्धमादन  पर्वतम :-

साक्षी हनुमान मंदिर से १ किलोमीटर की दुरी पर गन्धमादन  पर्वत है। यह एक छोटासा शिखर है। रामेश्वरम का सबसे ऊँचा स्थल माना जाता है। दो मंजिले बने हुए  है। यहाँ रामजी के पैरो के निशान मौजूद है। लंका पर आक्रमण करने के लिए जाते वक्त वानर सेना द्वारा समुद्र पर सेतु के निर्माण में जिस  पत्थर का उपयोग किया गया था वह तैरते पत्थर यहाँ रखे हुए है। ऊपर के मंजिल से रामेश्वरम का दृश्य बेहद खूबसूरत दिखता है।  


२) पंबन ब्रिज रस्ते के स्थल का दर्शन :- (दुरी १४ की.मी.)


कलाम  स्मारक  :-

रामेश्वरम मंदिर से ५ की मि की दुरी पर पेईकुरुंबू स्थित  ऐ पी जे अब्दुल कलम जी का स्मारक बनाया गया है। जिस स्थान पर कलामजी  को दफनाया गया था उसी स्थान पर स्मारक बना है।लगभग ३०० से ज्यादा मजदूरोने दिन रात मेहनत करके केवल १० महीने में स्मारक का निर्माण किया है। यहाँ एक सेंट्रल हॉल बना है। उसमे कलाम  की ७ फुट ऊंची कास्य की प्रतिमा रखी है। हॉल में उनके  द्वारा किये गए उल्लेखनीय कार्य की प्रतिकृतियां रखी है।बाहर  ४५ फिट ऊंचे और चार टन वजन के अग्नि -२ मिसाइल खास आकर्षण है। 

विलूंदी तीर्थ  :-


कलाम स्मारक से २ की मि दुरी पर थागाचिंदम गांव के निकट विलूंदी तीर्थ है। विलूंदी तीर्थ रामेश्वरम का पवित्र तीर्थ में से एक तीर्थ माना जाता है। इस स्थल पर सीताजी को जब प्यास लगी तो भगवान राम ने सीता की प्यास बुझाने के लिए समुद्र में तीर मारा था। समुद्रसे पवित्र जल की धारा उत्पन्न हुई थी। 

पंबन पुल :-

यहाँ  दो पुल  बने  है। रेल और सड़क पुल। दोनों पुल पंबन गांव के पास बने है। इस लिए पंबन पुल  नाम से ही जाने जाते है। रेल पुल २४ फेब्रुवारी १९१४ को रेल यातायात के लिए  खोला गया। यह पुल भारत का पहला समुद्र पुल था। मुंबई बांद्रा वरली लिंक बनने से पहले भारत का सबसे लंबा पुल था। इस पुल की लंबाई २.३ की.मि.है। नेवी के जहाज निचे से जब गुजरते है तब यह पुल अनोखी तकनीक  के कारन ६  कर्मचारी द्वारा बिच में से ऊपर उठाया जाता है। निचे से जहाज गुजरने के बाद फिर से निचे बिठाया जाता है। १९८८ तक रामेश्वरम जाने के लिए यह रेल पुल  ही एक मात्र जरिया था। राजीव गाँधी के कार्यकाल में २.३४५ किलोमीटर सड़क पुल बनाया  गया जिसे पूरा होने में १४ साल लग गये। २ अक्टूबर १९८८ को राजीव गाँधी ने इस पल का उद्घाटन किया। पबन पुल को आधिकारिक रूप से एनाई इंदिरा गाँधी रोड ब्रिज नाम दिया गया।     



3)धनुषकोडि (रामसेतु) रस्ते के स्थल का दर्शन :-(दुरी २६ की.मी.)


नाम्बु नायागी अम्मान मंदिर  :-

यह मंदिर रामेश्वरम मंदिर से ८ की. मी. की दुरी पर है। यह पार्वती माता का मंदिर है। जीन लोगोको संतान नहीं होती है। माता के प्रार्थना के बाद उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। उस संतान का नाम नाम्बु रखा जाता है। माता के आशीर्वाद से रोगो से मुक्ति भी मिलती है। मानसिक रोग से बीमार व्यक्ति को यहाँ इलाज के लिए रखा जाता है।  
     

जादा  (जटा ) तीर्थ   :-


नाम्बु नायगी मंदिर से १.५ की.मी. जादा तीर्थ है। रावण का वध करने के बाद भगवान राम इसी स्थान पर ठहरे थे। श्रीराम ओर लक्मण ने अपनी बालो को मतलब जटा को धोया था और ब्रम्ह हत्या के पाप से मुक्ति पाई थी। इसलिए इसे जटा तीर्थ कहा जाता है। श्रीराम ने यहाँ शिव लिंग का निर्माण किया था ओर उसकी पूजा की थी।  इस शिव लिंग को श्री रामलिंग भी कहाँ जाता है। 

कोथानदारामार मंदिर  :-
जड़ा तीर्थ से ७ की.मी.दुरी पर कोथानदारामार मंदिर है। भगवान राम ने रावण को युद्ध में पराजित करने और रावण के वध के बाद विभीषण को इसी स्थान पर लंका का राजा बनाया था। यह मंदिर समुद्र के पानी से घिरा है। 

धनुषकोडि (घोस्ट सिटी ) Dhanushkodi :-

धनुषकोड़ी रामेश्वरम से २६ की.मी. की दुरी पर है। पहले यहाँ पंबन से धनुषकोडि एक रेल चलती थी। धनुषकोडि उभरता हुवा पर्यटन स्थल और व्यापार  केंद्र था। श्रीलंका के लिए यहाँ से नाव से यात्रियों और सामान ढ़ोने के लिए साप्ताहिक फेरी चलती थी। यात्रियोंके सुविधा के लिए यहाँ दुकाने ,बनी हुई थी। पोस्ट ऑफिस ,सरकारी कार्यालय ,मंदिर ,चर्च ,रेल्वे स्टेशन बने थे। एक दिन ऐसा कुछ हुवा की सभ कुछ एक क्षण में तहेस महेस हो गया। २२ दिसंबर  १९६४ में भयानक तूफान आया था। ११५ मुसाफिरों को लेकर पबंन से धनुषकोडि रेल निकली थी जो धनुषकोडि से चंद दुरी पर थी। तूफान के लपेटे में आ गई और ११५ मुसाफिरों के साथ समुद्र में डुब  गई।सभी ११५ मुसाफिरों की  मृत्यू  हो गयी।  
धनुषकोडि पूरी तरहसे नष्ट हो गई। आज भी रेल्वे स्टेशन ,चर्च ,पोस्ट ऑफिस,मंदिर के अवशेष ढांचे के रूप में खड़े है। तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तोर पर इसे भूतिया जगह करार दिया। लोगो को न जाने की सलाह दी। आज इस जगह पर सिर्फ कुछ मछुाआरे बसते है। दो साल पहले यहाँ आने के लिए  कोथानदारामार मंदिर तक ही पक्की सड़क थी। आगे धनुषकोड़ी तक  रेत  पर से चार पहिया गाडीसे ही जा सकते थे। लेकिन अभी धनुषकोडि तक पक्की सड़क बन गई है। यहाँ बिच बना है।यहाँ पर स्नान करना पवित्र माना जाता है। लंका पर आक्रमण करने के लिए  वानर सेना द्वारा समुद्र पर पत्थर रखकर सेतु बनाया गया  था। जिसे राम सेतु कहते है। उसका प्रारंभ धनुषकोडि से हुवा था। सुनामी और तूफान के कारन वह नष्ट हो गया।  भारत का यह आखरी पॉइंट है। श्रीलंका यहाँ से महस २५ की. मी.दुरी पर है। 

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