Tuesday, September 26, 2017

kanyakumari Travel Guide कन्याकुमारी यात्रा

   कन्याकुमारी तमिलनाडु यात्रा  की सम्पूर्ण जानकारी  

   How to reach kanyakumari , where to stay ,which place visit  






Best time to visit kanyakumari :- 

कन्याकुमारी में मौसम हमेशा गर्म रहता है। कन्याकुमारी में  सूर्य उदय और सूर्य अस्त खास आकर्षण होता है। बारिश के दिनों में  सूर्य उदय और सूर्य अस्त का मजा ले नहीं पाते। इस लिए नवंबर से मई के बिच जाना ही उचित होगा। 

Kanyakumari Seasons wise temperature

    Seasons                  Months                          Temprature
 
    Summers            March to May                   25 c - 39 c

    Monsoon            June to September             20 c - 35 c

    Winter                December to February       17 c - 32 c


कन्याकुमारी के बारे में 

कन्याकुमारी तमिलनाडु राज्य स्थित है और समुद्र तट पर बसा हुआ है। यहाँ तीन  समुद्र  का संगम है।हिन्द महासागर, अरब सागर , बंगाल की खाड़ी। समुद्र के अंदर स्वामी विवेकानन्द जी का स्मारक और सूर्य  उदय ,सूर्य अस्त  यहाँ का  खास आकर्षण है। 

8 Best Places to visit in Kanyakumari :-

  1. Vivekananda Rock Memorial
  2. Thiruvalluvar Statue
  3. Bhagavathy Amman Temple
  4. Gandhi Memorial
  5. Sun set View Point
  6. Sun rise View Point
  7. Kanyakumari Beach
  8. Suchindram


Kanyakumari Trip Planning

अगर आप चाहते  हो की  कन्याकुमारी यात्रा मजेदार ,यादगार हो। तो  सबसे पहले यात्रा की पूरी प्लानिंग करना  जरुरी है। जैसे कोनसे दिन जाना है। कितने दिन के लिए जाना है।   कोनसे स्थल को देखना है।  


Railway confirm  ticket book in Advance

कन्याकुमारी के लिए भारत के सभी प्रमुख शहरों से डायरेक्ट ट्रेने  चलती है। ट्रेन का  आपके शहर से जाने का और आने का दोनों कंफर्म टिकट बुक करा ले।  ट्रेन का टिकट बुक करते वक्त दो बातो पर  ध्यान दे। पहली बात   आपके शहर से जाते वक्त कन्याकुमारी में सुबह जल्दी पहुंचने वाली ट्रेन को  प्राथमिकता  दे। दूसरी बात  कन्याकुमारी से आपके शहर जाने वाली ट्रेन देर रात चलने वाली ट्रेन को प्राथमिकता दे। ताकि आप ज्यादा से ज्यादा समय कन्याकुमारी में  गुजार  सके।
ट्रैन का टिकट ऑनलाइन बुक करने के लिए या ट्रैन का टाइम टेबल देखने के लिए  रेलवे की वेब साइट www.irctc.co.in पर जाये।


कन्याकुमारी में कितने दिन रुकना होगा ?

कन्याकुमारी में एक रात गुजारनी होगी।एक दिन में सारे प्रमुख दर्शनीय स्थल देखकर पुरे हो जाते है। 


कन्याकुमारी में होटल रूम एडवांस में बुकिंग 


प्राइवेट होटल रूम 
एक दिन के लिए भरोसेमंद  ऑनलाइन होटल बुकिंग वेब साइट पर जाकर एडवांस में रूम बुक कराले ।
मै किसी भी होटल रूम बुकिंग वेब साइट का नाम सजेस्ट नहीं करूँगा।  

विवेकांनद केन्द्र रूम 
कन्याकुमारी में विवेकानंद  केंद्र बना है। विवेकानंद केंद्र में योग शिबिर भी लगाए जाते है। विवेकानंद केंद्र में बहुत ही कम  रेट में रूम उपलब्ध है। विवेकानंद केंद्र की रूम भी ऑनलाइन एडवांस में बुक की जा सकती है। विवेकानंद केंद्र के बारे में अधिक जानकारी के लिए और रूम बुक करने के लिए  केंद्र की वेब साइट  की  निचे की  लिंक पर क्लिक करे 

 कन्याकुमारी यात्रा का विस्तार से वर्णन 

आप का ट्रिप का पूरा प्लानिंग हो गया।  रेलवे का आने जाने का कंफर्म टिकट और होटल रूम एक दिन का  एडवांस में  बुक। आपने  बैग पैक कर लिए ही होगे।फिर  देर किस बात की  चलिए कन्याकुमारी की सफर पर निकलते है।

पहला दिन 

कन्याकुमारी स्टेशन पर उतरने के बाद आपको  सीधे होटल पर जाना है।  रेल्वे  स्टेशन से त्रिवेणी संगम देढ  किलोमीटर  की दुरी पर है। ऑटो वाले को आपके होटल का नाम बता दीजिए ऑटोवाला 50 रुपये  तक किराया लेगा। आप को होटल तक छोङ देगा ।होटल में चेक इन करके आराम फरमाइए सफर की थकावट दूर हो जाएगी। जनरली  हम किसी भी जगह पहुंचते हैं।  तो ट्रेन लेट हो जाती है, या ट्रेन का पहुंचने का  वक्त ही दोपहर 3:00 बजे   के बाद  का होता है। तो हमारे पास ज्यादा समय नहीं होता। सभी सफर से  काफी   थके  हुए होते हैं।  तुरंत कहां बाहर जाने को मन नहीं करता, इसलिए हम आज खाली कन्याकुमारी माता और सूर्य अस्त का नजारा ही देखने जाएंगे।

                       

        Bhagavathy Amman Temple भगवती अम्मान मंदिर 

Kanyakumari Devi temple

कन्याकुमारी माता के दर्शन से पहले कन्याकुमारी माता की कहानी जान लेते है। कन्याकुमारी  शहर का नाम कन्याकुमारी क्यू है। इसकी एक कहानी है।

कन्याकुमारी देवी की कहानी 

बाणासुर नाम का एक दैत्य था। उसने शिवजी की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया और वरदान मांगा की उसकी कुंवारी कन्या के हाथो ही मृत्यु  हो दूसरे किसी के हाथोसे नहीं। शिवजी ने तथास्तु कहकर वरदान दे दिया। शिवजी से वरदान पाने के बाद बाणासुर उन्मत्त होकर  लोगो पर अत्याचार करने लगा। देवताओंको चुनौती देने लगा।देवता गन परेशान हो गए। देवताओ ने आदिशक्ति माता से  गुहार लगाई।  आदिशक्ति माता ने अपने  अंश से एक कन्या को उत्पन्न किया। जीसका अवतार बाणासुर का वध करने के लिए हुआ।  इस कन्या ने शिवजी को पती के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की। शिवजी ने प्रसन्न होकर विवाह करने का वरदान दिया। शिवजी कन्या से विवाह करने निकल पड़े। देवता चिंतित हो गये अगर शिवजी का विवाह इस कन्यासे हो जाता है तो बाणासुर का वध कदापि  संभव नहीं होता। इस विवाह को रोकने की जिम्मेदारी देवताओंने नारदजी पर डाली। नारदजी ने सुचिन्द्रम स्थान पर शिवजी को ऐसा उलझाकर रखा की विवाह का मुहूर्त टल गया। इस दौरान बाणासुर को कन्या की सुंदरता के बारे में पता चला। उसने कन्या के सामने जबरन विवाह  का प्रस्ताव रखा।कन्या ने कहा यदि बाणासुर युद्ध में हरा दे तो वह बाणासुर से विवाह कर लेंगी।  दोनों में घनघोर युद्ध हुवा और कन्या ने बाणासुर का वध कर दिया। शिवजी और कन्या का विवाह अधुरा रहा गया। कन्या के कुंवारी रह जाने के कारन इस स्थान का नाम कन्याकुमारी पड़ा। जिस स्थल पर देवी का विवाह होना था उसी स्थान पर देवी कन्याकुमारी का मंदिर बना हुआ  है।     


कन्याकुमारी माता मंदिर दर्शन 


फ्रेश होकर  कन्याकुमारी माता के दर्शन के लिए तैयार हो जाइये।  कन्याकुमारी माता अम्मन नाम से भी जानी जाती है। आप सभी को पता ही होगा देवी माता के 51 शक्ति पीठ है।  उनमें से एक  शक्तिपीठ कन्याकुमारी माता  मंदिर है।  इसलिए यह मंदिर  महत्वपूर्ण है।  दोस्तों जब कभी भी आप साउथ के किसी मंदिर में दर्शन करने जाने की सोचते हो तो पहले  बॉडी बना लीजिए, बढ़ा पेट थोड़ा कम करने का प्रयास करें क्योंकि आपको साउथ में शर्ट उतारकर नंगे बदन ही मंदिर में प्रवेश मिलता है। कन्याकुमारी में सभी दर्शनीय स्थल  नजदीक नजदीक ही है।  आप को कही भी जाने के लिए ऑटो करने की जरुरत नहीं।

आप को  15 मिनट पैदल चलकर  समुद्र तट  की ओर कुमारी अम्मान माता मंदिर पहुंचना है।  महिलाओं को कोई ड्रेस कोड नहीं है।  पुरुषों को लूंगी लगाने की जरूरत नहीं है।  पेंट पहन सकते हैं।  शर्ट उतार दीजिए मंदिर के बाहर प्रसाद और फूलों की दुकानें लगी है।  यहां से फूलो  की माला प्रसाद खरीदले।  आपका शर्ट फूल वाले के पास रख दे। चिंता  करना नहीं  फुलवाला  संभाल के  रखेगा। उसे  पैसा आने के बाद देना है। यहां भी भक्तों की  ज्यादा भीड़  होती  है।दर्शन लाइन में लग जाइये।  आप मंदिर के गर्भगृह में पहुंच चुके है।  आप के सामने है  आकर्षक और सुंदर वस्त्र परिधान की हुई आभूषण से सजी  माता अम्मान। पंडित आपसे  फूलों की माला प्रसाद ले लेगा।  पंडित अपनी अभिषेक करवाने की मार्केटिंग शुरु कर देगा उसके ऊपर ध्यान ना दें। गर्भ गृह में  ख़ाली दिप जले होंगे।  आपका पूरा ध्यान माता पर केंद्रित करे।  माता की नाक में हीरा जुड़ा हुआ है।  ध्यान से देखें दीपक की रोशनी में  हीरे की चमक से आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएगी। पुरी आस्था से माता को हाथ जोड़कर नमन करें।माता के  दर्शन  से  आपके दिल को काफी सुकून मिलेगा।मंदिर के बाहर आजाइये आपके सामने होगा अथांग सागर।  थोड़ा रुककर समुद्र की ऊंची ऊंची उठती लहरो  का आनंद उठाइए।

                          

     Sun Set kanyakumari सूर्य अस्त कन्याकुमारी 

कन्याकुमारी सूर्य अस्त

सूरज ढलने से पहले समुद्र तट पर जाना है।  प्रकृति का हसीन  सूर्यास्त का नजारा देखने सैलानियों का जमावड़ा पहलेसे मौजूद होगा। सभी सैलानी हाथो में  मोबाइल और कॅमेरे  पकड़े हुए सूर्य अस्त का इंतजार  करते हुए खड़े हैं। सूर्य  पच्छिम  की ओर धीरे धीरे ढलता जारहा  है। इतना बड़ा  सूर्य का रूप पहली बार देखेंगे। धीरे धीरे सूर्य क्षितीज की ओर समुद्र में समां कर लुप्त  हो जाता है। आसमान में  छाया  लाल रंग अँधेरे में बदल रहा है। आप को  होटल की  और  चलना है।  यहां के मेन चौक में राजस्थानी पंजाबी  होटल है।  इडली डोसा से आप को राहत मिल जाएगी। रात को  होटल पर आराम से सो जाइए। आपको सुबह जल्दी उठकर सूर्य उदय का एक और हसीन नजारा देखना है।  होटल  के रिसेप्शन पर सुबह सूर्योदय का टाइम पूछ लीजिये। सूर्य उदय का वक्त  बदलता रहता है।

दूसरा दिन 

                                

   Sun Rise Kanyakumari सूर्य उदय 

कन्याकुमारी सूर्य उदय 

आप सुबह सूर्य तट  सनराइज पॉइन्ट पर पहुंच जाइए। आप के पहले काफी सैलानी पहले से मौजूद  दिखेंगे। आप को विवेकानद स्मारक  की  ओर  नज़ारे जमाये  रखना है। सूर्य की धुंदली धुंदली  किरणे नजर आने लगेगी। सूर्य नारायण समुद्रकी कोख से धीरे धीरे बाहर आते दिखेंगे सागर सूर्य की किरणोसे चमक उठेगा सूर्य नारायण पूर्ण रूपसे प्रकट हो जाएंगे।अदभुत नजारा देख कर मन भर जाता है। सारे सैलानी रोमांचित हो कर चिल्लाने लगते हैं।

                              

    Gandhi Memorial Kanyakumari  गाँधी मंडप 

कन्याकुमारी गाँधी मंडप 

समुद्र तट पर ही गांधी स्मारक है जिसे  गांधी मंडप कहते।  आपको गांधी  मंडप  जाना है।यह स्मारक महात्मा गाँधी जी के सन्मान में बनवाया था। गांधी जी की कुछ अस्थियाँ जिस जगह  प्रवाहित की गई थी वहाँ गाँधी  मंडप बना है।इसका निर्माण १९५६ में किया गया था। इस स्मारक को बनाते वक्त एक अनोखी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। २ अक्टूबर को गाँधी जयंती के दिन हर साल दोपहर को सूर्य की किरणे जहाँ गाँधी जी का अस्थिकलश विसर्जन के पूर्व रखा गया था उस स्थान पर  पड़ती है।  गांधीजी के संदेश और उनके जीवन की महत्वपूर्ण  घटनाओं के चित्र दीवारों पर  लगे हुए हैं। सीढ़ियों से  आप ऊपर जाइये। यहां से चारों ओर नजर घुमाई हसीन नजारा आपको दिखेगा। गांधी स्मारक से ही आपको सामने ही विवेकानंद स्मारक और एक विशाल तमिल संत कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा दिखेगी। आपको वहां जाना है लेकिन उससे पहले गांधी स्मारक से आपको होटल रूम पर जाना है। कन्याकुमारी में होटल चेक आउट टाइम बारा  बजे का है।विवेकानंद स्मारक से आते आते देर हो जायेंगी ।बेहतर यही होगा होटल रूम चेक आउट करके बैग होटल की लॉकर रूम में रख दे।

 

     Vivekananda Rock Memorial Kanyakumari  विवेकानंद स्मारक 

कन्याकुमारी विवेकानंद स्मारक 


विवेकानंद  स्मारक का टाईमिंग  सुबह  आठ  बजेसे  दुपहर चार बजे तक ही होता है।  आप को पैदल चलकर विवेकानद डॉक पे जाना है। समुद्र के अंदर ५०० मीटर की दुरी पर  विवेकानंद स्मारक बना है। वहाँ  केवल इन्जीन वाले नाव से ही जा सकते है। पहले आप को टिकट काउंटर लगेगा। प्रति व्यक्ति ३४ रुपए टिकट आने जाने का निकालना  होगा।टिकट काउंटर पर काफी भीड़ होती है एक घंटा लाइन में लगना पड़ेगा। सबसे पहले नाव  विवेकानंद स्मारक ले जायेगी  बाद में तिरुवल्लुवर की प्रतिमा जहॉ  है उस सिला पर ले जाएगी।  आगे ब्रिज बना हुआ है। उससे गुजरकर आप को नाव तक पहुँचना  है।  नाव में बैठ जाइये यहॉ  एक अच्छी बात देखने को मिली सभी को लाइफ जैकेट दिया जाता है। कोई दुर्घटना घटी तो हम सुरक्षित रहें। आपकी नाव   शुरु हो चुकी है।  15 मिनट में आप  विवेकानंद स्मारक पर पहुंच जाओगे।  

विवेकानंद स्मारक एक बड़ी सिला पर बना हुआ है।  स्वामी विवेकानंद 1892  में  कन्याकुमारी  आये  थे एक दिन तैरकर  कर इस विशाल  पर जा पहुँचे। इस निर्जन स्थान पर योग साधना करने लगे।  इस स्थान पर साधना करने के बाद ही उन्हें दिव्या द्रुस्टि प्राप्त हुई थी।  कुछ दिन बाद ही वे शिकागो सम्मेलन में भाग लेने गए थे। आगे का इतिहास आप जानते ही है। 

नाव से  उतरने के बाद आप को एंट्री टिकट १० रुपये  का निकालना  होगा।  आगे चलकर चप्पल और जूता चप्पल स्टैंड पर उतार  देना है। ऊपर चढाई चढ़कर जाना होगा।  सबसे पहले श्रीपाद  मंडपम  लगेगा कहां जाता है, इस स्थान पर कन्याकुमारी माता  ने तपस्या की थी इस लिए यह स्थल महत्व रखता है। अंदर जाकर माता के पादुका का  दर्शन कर लें।  श्रीपाद मंडपम के बाहर आकर एक बार पुरे  चौराहे का  चक्कर लगा ले। यहां से भी समुद्र का विलोभनीय दृश्य देख सकते हो।  मुख्य मंडप जाने के लिए  सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाना होगा।  भवन में प्रवेश करने के बाद 5 फुट से ऊंची चौराहे पर स्वामी जी की मूर्ति  दिखेगी। यह मूर्ति  कासे  के धातु से बनी है। मूर्ति की  ऊंचाई 8 फुट है। स्वामीजी की  मूर्ति को सच्चे दिल से निहार के देखे लगेगा स्वामी जी जीवित आपके सामने खड़े है। 

यहां  ध्यान केंद्र बना है।  आपको ध्यान केंद्र  के अंदर प्रवेश करना है। यहां अंधेरा होता है एकदम शांति होती है। यहाँ  बोलना मना होता है। नीचे शांति से पद्मासन की अवस्था में बैठ जाइए। आप के सामने अंधेरे में चमकता दीवार पर ओम दिखेगा।  उस पर आपको ध्यान केंद्रित करना है।  आप सभी दुख दर्द यहां भूल जाएंगे ध्यान साधना की शक्ति क्या होती है, थोड़ी देर ध्यान  करने के बाद आपको पता चलेगा। ध्यान केंद्र को लगकर ही एक बुक स्टॉल  है।  स्वामी विवेकानद जी से जुडी हुई बहुत सारी  किताबे कम  किमंत पर उपलब्ध है। भवन से बाहर आ जाइए।आप जितना चाहे यहां वक्त बिताओ। चारों ओर नज़रे  घुमा कर देखो।चारो और समुद्र की लहरे स्मारक की चट्टान पर जोर जोर  से  दस्तक देती दिखती है। आसमान में लहरों की आवाज निरंतर गूंजती रहती है। यहां से जाने का मन नहीं करता लेकिन जाना तो पड़ेगा। नीचे आजाइए नाव में फिरसे बैठ जाइये।

                       

   Thiruvalluvar Statue तिरुवल्लुवर प्रतिमा 

कन्याकुमारी तिरुवल्लुवर प्रतिमा 

 नाव तमिल सन्त कवी तिरुवल्लुवर  की चट्टान पर ले जायेगी। दस  मिनट में  चट्टान पर पहुंच जाओगे।नाव  से उतरकर आपको सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाना है। ऊपर जाने के बाद आपको विशाल मूर्ति दिखेगी यह मूर्ति  प्रसिद्ध तमिल संत कवि तिरुवल्लुवर की है।  इसकी ऊंचाई 135 फुट है।  तिरुवल्लुवर द्वारा रचित काव्य ग्रंथ तिरुवकुरल  के 133 अध्यायों  का प्रतीक है।  इस मूर्ति को लगभग 5000 शिल्पकारों ने  बेहद मेहनत से बनाया था।  यहां से भी अद्भुत नजारा चारों ओर दिखेगा।  विवेकानद स्मारक यहां से  पूरी तरह दिखता है।   कुछ वक्त बिताने के बाद आप नीचे उतर कर आइए। नाव  से आपको समुद्री तट पर लौटना है।

                         

    Kanyakumari Beach कन्याकुमारी बिच 

कन्याकुमारी बीच 

कन्याकुमारी बीच दूसरे जगह के बीच की तरह  साफ सुतरा नहीं है। यहाँ जितना चाहे समुन्दर के पानी में उछलो कूदो। पूरी तरह सावधानी बरतो बच्चे साथ है।  तो उनपर नज़रे जमाये रखे। समुद्र के ज्यादा अंदर ना जाये।यहाँ तीनो समुद्र का पानी अलग अलग दिखाता है। 

                              

 Suchindram Kanyakumari सुचिंद्रम 

सुचिन्द्रम मंदिर 


अभी आपको आगे सुचिंद्रम जाना है जो  कन्याकुमारी से 13 किलोमीटर की दूरी पर है।  ऑटोवाला 300 से 400 रुपये तक किराया  आने और जाने का लेगा।ऑटो में बैठ जाइए। रस्ते  के दोनों तरफ नारियल के पेड़  नजर आएंगे। बीच-बीच में बड़ी बड़ी चट्टानों के पहाड़ नजर आते  रहेंगे। बिच  मैं साईं बाबा का बड़ा मंदिर लगेगा।  साईं बाबा  का  दर्शन कर लीजिए।  साईबाबा मंदिर से बिस मिनट  में आप सुचिंद्रम पहुंच जाओगे। ऑटो वाला ठीक मंदिर के सामने उतारेगा। ऑटो का नंबर और ऑटो वाले का मोबाइल नंबर आप लिख ले। बाहरसे ही मंदिर के भव्यता का पता चलता है।अति प्राचीन मंदिर है।  पत्थर से बने स्तभ के  विशाल  मंडप  से  गुजर कर मंदिर के भीतर प्रवेश करना होता है।  मंदिर में ब्रम्हा,विष्णु ,महेश त्रिमूर्ति लिंग के रूप में विराजमान है।  अनेको देव देवता की  प्रतिमा यहाँ बनाई गई है। भगवान विष्णु की अस्ष्टधातु की प्रतिमा विराजमान है।   यहां मुस्कुराते हनुमान जी की  18 फीट ऊंची प्रतिमा है।  आपने अभी तक इस तरह की भव्य हनुमान जी की प्रतिमा  देखी नहीं होगी। हनुमान जी का दर्शन कर लीजिए। ८०० वर्ष पुरानी  विशाल नंदी की प्रतिमा विशेष दर्शनीय है। कुछ समय बिताने के बाद मंदिर से बाहर आजाइए।  मंदिर को लगकर  एक सरोवर है। जिस के  मध्य में एक मंडप बना है।सरोवर के चारो ओर चक्कर लगाकर आइये।  

ऑटो वाला आपका इंतजार करता होगा। ऑटोवाला आपको कन्याकुमारी वापस छोड़ देगा।कन्याकुमारी  के सभी प्रमुख दर्शनीय स्थल आप ने देख लिए है।होटल से आप का बैग ले लीजिए। और आपके शहर जाने के लिए  रेलवे स्टेशन की ओर चल पड़िये।

You tube पर कन्याकुमारी यात्रा  का वीडियो देखने के लिए निचे की लिंक पर क्लिक करे 

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